AIN NEWS 1: उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल केदारनाथ धाम में दर्शन की परंपरा को और अधिक पवित्र, शांत और अनुशासित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं को केदारनाथ मंदिर परिसर में मोबाइल फोन और कैमरे का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अब मंदिर में फोटो खींचना, वीडियो बनाना या सोशल मीडिया के लिए रील शूट करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि केदारनाथ जैसे पवित्र स्थल पर दर्शन के बजाय लोग मोबाइल कैमरे में ज्यादा व्यस्त नजर आते हैं। कोई रील बना रहा है, तो कोई लाइव वीडियो चला रहा है। इससे न सिर्फ मंदिर की गरिमा प्रभावित हो रही है, बल्कि दर्शन के दौरान अव्यवस्था और अवरोध की स्थिति भी पैदा हो रही है।
बढ़ती रील संस्कृति बनी चिंता का कारण
बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन के अनुसार, मंदिर परिसर में फोटो और वीडियो बनाने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कई बार श्रद्धालु दर्शन के दौरान रुककर वीडियो शूट करते हैं, जिससे पीछे खड़ी लंबी कतारें बाधित होती हैं। कुछ मामलों में तो सुरक्षा कर्मियों और श्रद्धालुओं के बीच बहस तक की नौबत आ चुकी है।
सोशल मीडिया पर “केदारनाथ रील”, “महादेव दर्शन वीडियो” और “वायरल मंदिर रील” जैसी प्रवृत्तियों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों का मानना है कि धार्मिक स्थल को कंटेंट क्रिएशन स्पॉट बनाना सही नहीं है।
मोबाइल-फ्री दर्शन: क्या होगी नई व्यवस्था?
प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत:
मंदिर परिसर में मोबाइल फोन, कैमरा और अन्य रिकॉर्डिंग डिवाइस ले जाना प्रतिबंधित होगा
मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था की जा सकती है
दर्शन केवल शांति और अनुशासन के साथ किए जा सकेंगे
किसी भी तरह की फोटो, वीडियो या रील बनाते पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी
प्रशासन इस बात पर भी विचार कर रहा है कि मंदिर के आसपास स्पष्ट संकेतक (Sign Boards) लगाए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को पहले से नियमों की जानकारी मिल सके।
उल्लंघन पर लगेगा भारी जुर्माना
नई व्यवस्था के तहत अगर कोई श्रद्धालु नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। कुछ मामलों में मंदिर परिसर से बाहर निकालने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। प्रशासन का कहना है कि शुरुआत में चेतावनी दी जाएगी, लेकिन बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती तय है।
अधिकारियों का साफ कहना है कि यह कदम किसी की आस्था को रोकने के लिए नहीं, बल्कि आस्था की मर्यादा बनाए रखने के लिए उठाया जा रहा है।
क्यों जरूरी है मोबाइल-फ्री दर्शन?
केदारनाथ धाम सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां दर्शन का उद्देश्य आत्मिक शांति और भगवान शिव से जुड़ाव है, न कि कैमरे के सामने पोज़ देना।
मोबाइल-फ्री दर्शन से:
मंदिर की पवित्रता और गरिमा बनी रहेगी
दर्शन प्रक्रिया तेज़ और व्यवस्थित होगी
सुरक्षा व्यवस्था में सुधार होगा
श्रद्धालु ध्यान और भक्ति के साथ पूजा कर सकेंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल से दूरी बनाकर दर्शन करने से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से ज्यादा जुड़ाव महसूस करता है।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे कदम
यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक स्थल पर मोबाइल प्रतिबंध की बात हो रही है। देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों और गुरुद्वारों में पहले से ही मोबाइल और कैमरे पर रोक लगी हुई है। केदारनाथ में यह व्यवस्था लागू होने के बाद इसे अन्य धामों में भी लागू किया जा सकता है।
श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
बद्री-केदार मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस निर्णय को सकारात्मक रूप में लें और प्रशासन का सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अस्थायी नहीं बल्कि दीर्घकालिक व्यवस्था का हिस्सा होगा।
प्रशासन का मानना है कि अगर श्रद्धालु खुद नियमों का पालन करेंगे, तो किसी तरह की सख्ती की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
आस्था बनाम सोशल मीडिया
आज के डिजिटल युग में हर अनुभव को कैमरे में कैद करने की होड़ है, लेकिन आस्था को दिखाने की नहीं, महसूस करने की जरूरत होती है। केदारनाथ धाम में मोबाइल-फ्री दर्शन इसी सोच को मजबूत करेगा।
यह फैसला उन लोगों के लिए जरूर चुनौती हो सकता है जो हर पल को रिकॉर्ड करने के आदी हैं, लेकिन जो सच्चे श्रद्धालु हैं, उनके लिए यह व्यवस्था एक बेहतर और शांत दर्शन अनुभव लेकर आएगी।
Kedarnath Dham, one of the most sacred Hindu pilgrimage sites, is set to implement mobile-free darshan to preserve its spiritual atmosphere. The Kedarnath Temple administration and Rudraprayag district officials are planning a complete ban on mobile phones, cameras, photos, videos, and social media reels inside the temple premises. The decision comes amid rising concerns over increasing reel-making and photography during darshan, which disrupts temple decorum and security. Strict penalties will be imposed on violators as part of the new Kedarnath temple rules.


















