AIN NEWS 1 | मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसी बीच कुवैत ने सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए तेल उत्पादन घटाने का फैसला लिया है, जिससे वैश्विक तेल बाजार और खासतौर पर पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
कुवैत ने क्यों घटाया तेल उत्पादन
कुवैत की सरकारी कंपनी Kuwait Petroleum Corporation ने 7 मार्च को जारी बयान में कहा कि क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरों और समुद्री परिवहन जोखिमों के कारण तेल उत्पादन में कटौती का फैसला लिया गया है। कंपनी के अनुसार यह कदम जोखिम प्रबंधन और व्यापार रणनीति के तहत उठाया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य गतिविधियों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। इसी वजह से कुवैत ने एहतियात के तौर पर उत्पादन कम करने का निर्णय लिया है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उत्पादन में कुल कितनी कटौती की जाएगी।
कुवैत दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। फरवरी 2026 में कुवैत का औसत तेल उत्पादन लगभग 26 लाख बैरल प्रति दिन था। ऐसे में उत्पादन में थोड़ी भी कमी वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है।
Strait of Hormuz का वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्व
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस का प्रमुख ट्रांजिट रूट माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुसार दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। अगर यहां किसी भी प्रकार की सैन्य या सुरक्षा बाधा उत्पन्न होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में तुरंत अस्थिरता पैदा हो सकती है।
ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजरानी कंपनियों और ऊर्जा कंपनियों की चिंता बढ़ गई है।
खाड़ी क्षेत्र में तेल उत्पादन पर बढ़ता दबाव
कुवैत के फैसले के साथ ही खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में भी उत्पादन और निर्यात पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इराक के कुछ तेल क्षेत्रों में उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है और यह लगभग 15 लाख बैरल प्रति दिन तक कम हो गया है।
समुद्री मार्गों में जोखिम बढ़ने के कारण तेल भंडारण, निर्यात मार्ग और शिपिंग लॉजिस्टिक्स पर भी असर पड़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य तेल उत्पादक देश भी उत्पादन नीति की समीक्षा कर सकते हैं।
पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ी चिंता
कुवैत के तेल उत्पादन में कटौती का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान पर पड़ सकता है। पाकिस्तान पहले से ही गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है और उसकी तेल तथा गैस की बड़ी जरूरत आयात पर निर्भर है।
आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान प्रतिदिन लगभग 40 हजार से 60 हजार बैरल तक कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद कुवैत से आयात करता है। ऐसे में अगर कुवैत के निर्यात या उत्पादन में कमी आती है तो पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
स्थिति इसलिए और गंभीर हो गई है क्योंकि पाकिस्तान की LNG सप्लाई भी खतरे में बताई जा रही है।
कतर से LNG सप्लाई पर भी संकट
हाल ही में कतर ने पाकिस्तान को LNG सप्लाई को लेकर चेतावनी दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर भुगतान या अनुबंध संबंधी समस्याएं जारी रहती हैं तो कतर LNG आपूर्ति रोक सकता है।
पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार देश की लगभग 99 प्रतिशत LNG जरूरत कतर से पूरी होती है। अगर कतर की सप्लाई प्रभावित होती है तो पाकिस्तान में बिजली उत्पादन और गैस वितरण पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
वैश्विक तेल बाजार पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव जारी रहता है और Strait of Hormuz में जहाजरानी प्रभावित होती है तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।
कुवैत द्वारा उत्पादन घटाने का फैसला इसी व्यापक भू-राजनीतिक संकट का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में खाड़ी क्षेत्र के अन्य तेल उत्पादक देशों की नीतियां भी वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा तय करेंगी।


















