AIN NEWS 1 | महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा फिर से सुर्खियों में है। राज्य सरकार ने मराठा समाज के जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने वाली जीनियोलॉजी समिति का कार्यकाल 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया है। यह कदम सामाजिक न्याय और आरक्षण नीति के तहत मराठा समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया है। महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने 30 अगस्त 2025 को इस फैसले की जानकारी दी।
जीनियोलॉजी समिति का महत्व
महाराष्ट्र सरकार ने साल 2023 में ‘जस्टिस संदीप शिंदे समिति’ का गठन किया था। आम बोलचाल में इसे जीनियोलॉजी समिति कहा जाता है।
समिति की मुख्य जिम्मेदारी
मराठा और कुनबी जाति के बीच ऐतिहासिक और वंशावली संबंधों की जांच करना।
दस्तावेजों, सरकारी अभिलेखों और ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर यह तय करना कि कौनसे व्यक्ति कुनबी (OBC) वर्ग के आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं।
मराठा समाज और कुनबी जाति से जुड़े पात्र लोगों की पहचान करना।
समिति का यह कार्य बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह सीधे तौर पर मराठा समुदाय की आरक्षण मांग और सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ है।
मराठा समाज की आरक्षण मांग
मराठा समुदाय लंबे समय से आरक्षण की मांग करता रहा है।
समाज का तर्क है कि उनके पूर्वज मूल रूप से कृषक वर्ग (कुनबी) से जुड़े रहे हैं।
ऐतिहासिक और सरकारी अभिलेखों में इस संबंध की पुष्टि होती है।
समिति इन दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स का विश्लेषण करके यह निर्धारित करती है कि कौनसे व्यक्ति आरक्षण का पात्र हैं।
मराठा समाज महाराष्ट्र की एक बड़ी आबादी है। उनके आरक्षण से जुड़ा निर्णय न केवल राजनीतिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी बेहद संवेदनशील माना जाता है।
समिति की कार्यप्रणाली
जीनियोलॉजी समिति तहसील स्तर पर गठित होती है और इसके अध्यक्ष तहसीलदार होते हैं।
समिति पात्र व्यक्तियों के जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने में भूमिका निभाती है।
यह समिति आवेदकों के वंशावली दस्तावेजों, जातिगत रिकॉर्ड और ऐतिहासिक प्रमाणों का अध्ययन करती है।
इसके आधार पर यह तय होता है कि कौनसे व्यक्ति मराठा आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं।
इस तरह, समिति का काम मराठा समुदाय के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने और सरकारी नीतियों के तहत सामाजिक न्याय प्रदान करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
सरकार का निर्णय और रणनीति
सरकार ने समिति का कार्यकाल बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया है कि पात्र लोगों को आरक्षण का लाभ मिल सके।
इससे मराठा समुदाय के सामाजिक और आर्थिक हितों की रक्षा होगी।
OBC वर्ग और मराठा समुदाय के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर फैसले आने वाले समय में मराठा आरक्षण के मुद्दे में निर्णायक मोड़ साबित हो सकते हैं।
सरकार का यह निर्णय न केवल संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
मराठा आरक्षण का सामाजिक और राजनीतिक महत्व
मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र में लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है।
सामाजिक दृष्टि: मराठा समाज को कृषि और सरकारी नौकरियों में समान अवसर मिल सके।
राजनीतिक दृष्टि: मराठा आबादी बड़ी है और उनके वोट बैंक पर हर राजनीतिक दल की नजर रहती है।
आर्थिक दृष्टि: आरक्षण से बेरोजगारी और आर्थिक असमानता को कम करने में मदद मिल सकती है।
समिति का काम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तय करता है कि कौन पात्र है और कौन नहीं। इसके आधार पर ही राज्य में मराठा आरक्षण लागू होता है।
आगे का रास्ता
आने वाले महीनों में जीनियोलॉजी समिति की रिपोर्ट का महत्व और बढ़ जाएगा।
समिति की सिफारिशें सरकार के लिए मार्गदर्शक होंगी।
पात्र लोगों को प्रमाणपत्र और आरक्षण का लाभ मिलेगा।
सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा और मराठा समुदाय की लंबित मांगों को हल किया जा सकेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम केवल मराठा समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के सामाजिक न्याय और OBC आरक्षण संतुलन को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।
मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र में लंबे समय से संवेदनशील रहा है। जीनियोलॉजी समिति के कार्यकाल को बढ़ाना, सरकार का एक निर्णायक कदम है।
यह मराठा समाज को आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करेगा।
सामाजिक न्याय और OBC वर्ग के बीच संतुलन बनाएगा।
आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकारी निर्णय, मराठा आरक्षण की दिशा तय करेंगे।
इस तरह यह कदम समाज और राजनीति दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।



















