AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन दोनों को झकझोर कर रख दिया है। नौहझील क्षेत्र के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तैनात हेडमास्टर पर आरोप है कि उन्होंने स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों को जबरन नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया और कथित तौर पर उन्हें एक विशेष धर्म की ओर प्रेरित करने की कोशिश की।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और प्राथमिक जांच के आधार पर संबंधित हेडमास्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
📌 क्या है पूरा मामला?
यह मामला नौहझील ब्लॉक स्थित एक प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा है, जहां बच्चों के अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक, स्कूल के हेडमास्टर जान मोहम्मद पर आरोप है कि वे स्कूल के समय में बच्चों से नियमित रूप से नमाज पढ़वाते थे।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि बच्चों को यह समझाया जाता था कि एक विशेष धर्म सबसे श्रेष्ठ है और उसी को अपनाना चाहिए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मासूम बच्चों की उम्र इतनी कम है कि वे सही-गलत का अंतर नहीं समझ सकते, ऐसे में इस तरह की गतिविधियां बेहद संवेदनशील और आपत्तिजनक हैं।
🧠 बच्चों के ब्रेनवॉश का आरोप
स्थानीय भाजपा नेता और बाजना मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान द्वारा दी गई शिकायत में दावा किया गया है कि हेडमास्टर लंबे समय से बच्चों का कथित तौर पर मानसिक रूप से ब्रेनवॉश कर रहे थे। आरोप है कि बच्चों को धार्मिक बातें पढ़ाई जाती थीं, जिनका शिक्षा से कोई सीधा संबंध नहीं था।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि विद्यालय परिसर में बाहर से कुछ लोगों को बुलाया जाता था, जिनका संबंध तबलीगी जमात से बताया जा रहा है। इन लोगों पर भी बच्चों को प्रभावित करने और कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप है।
🇮🇳 राष्ट्रगान को लेकर भी गंभीर दावा
मामले में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है। शिकायत के अनुसार, स्कूल में राष्ट्रगान नहीं होने दिया जाता था। अगर कोई बच्चा राष्ट्रगान गाने की कोशिश करता, तो उसे हेडमास्टर की फटकार का सामना करना पड़ता था।
यह भी आरोप लगाया गया है कि हेडमास्टर स्वयं कभी राष्ट्रगान के दौरान खड़े नहीं होते थे, जिससे बच्चों में गलत संदेश जाता था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक सरकारी स्कूल में इस तरह का व्यवहार न सिर्फ अनुशासन के खिलाफ है, बल्कि देश के सम्मान से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।
⚖️ शिक्षा विभाग की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने तत्काल संज्ञान लिया। प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए हेडमास्टर जान मोहम्मद को निलंबित कर दिया गया है।
बीएसए ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों को किसी भी प्रकार से किसी विशेष धर्म की ओर प्रेरित करना या राष्ट्रगान के सम्मान में लापरवाही बरतना एक अत्यंत गंभीर अपराध है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
🏫 प्रशासन और अभिभावकों की चिंता
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय अभिभावकों में भी डर और नाराजगी देखी जा रही है। कई माता-पिता का कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि वे शिक्षा और संस्कार सीखें, न कि किसी विवाद का हिस्सा बनें।
प्रशासन ने अभिभावकों को भरोसा दिलाया है कि बच्चों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और स्कूलों में शिक्षा का माहौल पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष और सुरक्षित रखा जाएगा।
🔍 आगे क्या?
फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। शिक्षा विभाग के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ निगरानी और जवाबदेही कितनी जरूरी है।
A serious controversy has emerged from Mathura, Uttar Pradesh, where a government primary school headmaster was suspended following allegations of forcing students to offer namaz and attempting religious conversion. The case has raised major concerns about religious neutrality in schools, child rights, and the role of the education department. Authorities have ordered a detailed investigation, calling the matter extremely sensitive and serious.


















