मथुरा यमुना एक्सप्रेसवे हादसा: खड़ी बस से उतरे यात्रियों को कंटेनर ने रौंदा, 6 की मौत
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। यमुना एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस के यात्रियों को तेज रफ्तार कंटेनर ने कुचल दिया। इस हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के मुताबिक, यह स्लीपर बस दिल्ली के नांगलोई इलाके से कानपुर देहात के रसूलाबाद जा रही थी। देर रात यात्रा के दौरान कुछ यात्रियों ने बस चालक से लघुशंका के लिए बस रोकने का अनुरोध किया।
बताया जा रहा है कि ड्राइवर ने बस को एक्सप्रेसवे पर निर्धारित ‘ग्रीन जोन’ या सुरक्षित स्थान पर रोकने के बजाय सड़क किनारे ही खड़ा कर दिया। कुछ यात्री बस से उतरकर सड़क के किनारे खड़े हो गए।
इसी दौरान पीछे से तेज गति से आ रहा एक कंटेनर ट्रक अनियंत्रित हो गया। पहले उसने खड़ी बस को टक्कर मारी और फिर सड़क किनारे खड़े यात्रियों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
हादसे की जगह
यह हादसा मथुरा जिले के सुरीर थाना क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के माइलस्टोन 88 के पास हुआ। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास से गुजर रहे वाहन चालकों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी।
पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची और घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया। छह लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
प्रशासन की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद कंटेनर चालक मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश की जा रही है। बस चालक से भी पूछताछ की जा रही है कि आखिर बस को निर्धारित सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं रोका गया।
मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है और उनके परिजनों को सूचना दी जा रही है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
बड़ा सवाल: क्या टल सकता था हादसा?
यमुना एक्सप्रेसवे देश के सबसे व्यस्त और तेज रफ्तार वाले मार्गों में से एक है। यहां वाहनों की स्पीड आम सड़कों की तुलना में काफी ज्यादा होती है। ऐसे में नियम है कि वाहन केवल निर्धारित ‘सेफ ज़ोन’ या ‘ग्रीन ज़ोन’ में ही रोके जाएं।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि अगर बस को सुरक्षित स्थान पर रोका जाता, तो शायद यह हादसा टल सकता था। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे पर थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
यात्रियों के परिवारों में मातम
इस घटना के बाद मृतकों के घरों में कोहराम मच गया है। जो लोग अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचने की उम्मीद लेकर निकले थे, वे रास्ते में ही हादसे का शिकार हो गए।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कई परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए हैं। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन की जरूरत को सामने लाता है।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही की एक बड़ी कीमत है। एक्सप्रेसवे पर वाहन रोकने के स्पष्ट नियम हैं, लेकिन कई बार चालक सुविधा या जल्दबाजी में नियमों की अनदेखी कर देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है:
एक्सप्रेसवे पर वाहन कभी भी मुख्य लेन में नहीं रोकना चाहिए।
यात्रियों को भी चलते हाईवे पर उतरने से बचना चाहिए।
रात के समय विशेष सावधानी जरूरी है।
आगे क्या?
पुलिस मामले की जांच कर रही है। कंटेनर चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बस कंपनी और ड्राइवर की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि एक्सप्रेसवे पर यात्रा करते समय सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करें।
A tragic Mathura accident on the Yamuna Expressway claimed six lives after a speeding container truck rammed into a stationary sleeper bus near Milestone 88 in the Surir police station area. The bus was traveling from Nagloi in Delhi to Rasulabad in Kanpur when passengers stepped out after the driver halted the vehicle on the highway instead of a designated green zone. The container truck accident highlights serious concerns about road safety, expressway parking rules, and high-speed traffic risks in Uttar Pradesh.


















