AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में शुक्रवार को सदर बाजार इलाके के सर्राफा बाजार में उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब मदरसे के लिए चंदा मांगने पहुंचे कुछ लोगों को लेकर स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों ने विरोध जताया। व्यापारियों का आरोप था कि ये लोग बाहरी प्रतीत हो रहे थे और बिना किसी पूर्व अनुमति के दुकानों और मकानों के भीतर प्रवेश कर आर्थिक सहयोग की मांग कर रहे थे। इससे बाजार में असहजता और आशंका का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चंदा मांगने आए लोगों का समूह बाजार में घूम-घूमकर व्यापारियों से मदरसे के निर्माण या संचालन के नाम पर सहयोग राशि मांग रहा था। कुछ दुकानदारों का कहना था कि उन्होंने शुरुआत में इसे सामान्य सामाजिक कार्य समझते हुए नजरअंदाज किया, लेकिन जब समूह के कुछ सदस्य बार-बार दुकानों के भीतर आने लगे और निजी स्थानों तक पहुंचने का प्रयास किया, तो लोगों को संदेह हुआ।
स्थिति को देखते हुए व्यापारियों ने एकजुट होकर इसका विरोध करना शुरू कर दिया। विरोध बढ़ता देख किसी ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही मेरठ पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया।
पुलिस ने मौके से करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ की। प्रारंभिक स्तर पर दस्तावेजों की जांच और पूछताछ के बाद उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। हालांकि, मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। बाजार में हुई इस घटना की जानकारी जब उच्चाधिकारियों तक पहुंची, तो पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत सत्यापन के निर्देश दिए गए।
शनिवार को पुलिस ने दोबारा कार्रवाई करते हुए कुल 17 लोगों को हिरासत में लिया। इस बार उनका गहन सत्यापन शुरू किया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि चंदा मांगने वाले लोग वास्तव में किसी अधिकृत संस्था से जुड़े हैं या नहीं, और उनका उद्देश्य सामाजिक कार्य है या कुछ और।
इसी क्रम में पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए ‘यक्ष ऐप’ के माध्यम से इन सभी व्यक्तियों का डिजिटल सत्यापन शुरू किया है। यह ऐप पुलिस को संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान, आपराधिक पृष्ठभूमि और अन्य आवश्यक जानकारियों की त्वरित जांच में मदद करता है।
पुलिस का कहना है कि वर्तमान समय में कई बार सामाजिक या धार्मिक कार्यों के नाम पर लोग बिना अनुमति सार्वजनिक स्थानों पर चंदा एकत्र करते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में यह जरूरी हो जाता है कि संबंधित व्यक्तियों की पहचान और पृष्ठभूमि की जांच की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी या धोखाधड़ी की आशंका को समय रहते रोका जा सके।
स्थानीय व्यापारियों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई का समर्थन किया है। उनका कहना है कि बाजार में रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए आते हैं और इस प्रकार की गतिविधियां सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में इस तरह के मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति चंदा संग्रह के लिए बाजार क्षेत्र में प्रवेश न कर सके।
फिलहाल पुलिस सभी 17 लोगों के दस्तावेजों की जांच कर रही है और यक्ष ऐप के माध्यम से उनके सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति संदिग्ध पाया जाता है या उसके खिलाफ पूर्व में कोई मामला दर्ज है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद बाजार क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है और पुलिस द्वारा नियमित गश्त की जा रही है, ताकि आम नागरिक और व्यापारी स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सकें।
Meerut Police detained 17 individuals who allegedly entered shops in Sadar Bazaar Sarrafa Market seeking madrasa donations without authorization. Authorities have launched a detailed identity verification process using the Yaksh App to prevent unauthorized fundraising and ensure public safety. This Meerut madrasa donation case highlights the importance of police verification drives in Uttar Pradesh to maintain law and order in busy market areas.



















