Mehak Pari Viral Video Case: Arrested for Obscene Reels, Apologized in Court to Avoid Jail
महक-परी वायरल वीडियो केस: अश्लील रील्स बनाकर कमाती थीं 35 हजार, कोर्ट में माफी मांग जेल से बचीं
AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से सामने आया महक और परी का वायरल वीडियो मामला अब सुर्खियों में है। इन दोनों लड़कियों पर अश्लील रील्स बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने और गलत नाम से पहचान छिपाकर काम करने का आरोप है। पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां दोनों ने माफी मांगकर जेल की सजा से राहत पा ली। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं।
मामला क्या है?
महक और परी, जो कि संभल जिले के असमोली क्षेत्र के शहवाजपुर गांव की रहने वाली हैं, सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट बनाकर इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर डालती थीं। पुलिस के अनुसार, ये दोनों लड़कियाँ मुसलमान हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर उन्होंने खुद को ‘महक’ और ‘परी’ जैसे हिंदू नामों से प्रस्तुत किया था, जिससे दर्शकों को भ्रम हो।
इनके साथ हिना नाम की एक और लड़की और एक कैमरामैन आलम भी इस काम में शामिल थे। ये सभी मिलकर इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील्स बनाते थे और हर महीने 30 से 35 हजार रुपये की कमाई करते थे।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
संभल पुलिस को जब इनकी गतिविधियों की जानकारी मिली, तो उन्होंने चारों को हिरासत में ले लिया। इन पर आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धारा 296(b) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके तहत 3 साल तक की सजा हो सकती है।
अगले दिन इन्हें चंदौसी कोर्ट में पेश किया गया। अदालत में पेशी के दौरान महक, परी, हिना और आलम ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और भविष्य में ऐसा न करने का वादा भी किया। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी और जेल भेजने से रोक दिया।
कोर्ट में भी बनी वीडियो
जब पुलिस चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने ले जा रही थी, तब वहां मौजूद लोगों ने इनका वीडियो बना लिया। इस वीडियो में महक और परी कोर्ट परिसर में हंसती हुई दिखाई दीं, जिससे कई लोगों में नाराजगी भी देखी गई।
सोशल मीडिया से हो रही थी कमाई
पूछताछ में पता चला कि ये सभी लोग अश्लील इशारे और फूहड़ भाषा वाले वीडियो बनाकर उन्हें इंस्टाग्राम अकाउंट “Mehakpari143” पर अपलोड करते थे। इनके फॉलोअर्स की संख्या काफी बढ़ रही थी, जिससे इन्हें प्रायोजक (sponsors) और व्यूज़ के ज़रिए महीने की मोटी कमाई हो रही थी।
कौन हैं ये चारों?
महक और परी: संभल जिले के शहवाजपुर गांव की रहने वाली, सोशल मीडिया पर फर्जी हिंदू नामों से प्रोफाइल बनाई।
हिना: इनकी करीबी दोस्त, जो रील्स में भी साथ नजर आती थी।
आलम: कैमरामैन, जो इनकी सारी वीडियो शूट करता था।
चारों मिलकर कमाई को आपस में बांटते थे।
बच्चों को ऐसे कंटेंट से कैसे बचाएं?
आज के डिजिटल युग में बच्चों को सोशल मीडिया पर मौजूद इस तरह की अश्लीलता से बचाना बेहद जरूरी हो गया है। नीचे कुछ उपाय दिए गए हैं जो हर माता-पिता के लिए जरूरी हैं:
1. पैरेंटल कंट्रोल का उपयोग करें
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक में पैरेंटल कंट्रोल सेटिंग होती है।
एंड्रॉइड: Google Family Link
iPhone: Screen Time
इन सेटिंग्स से आप कंटेंट को नियंत्रित कर सकते हैं।
2. बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी करें
बच्चे किन लोगों को फॉलो कर रहे हैं, क्या देख रहे हैं, और क्या पसंद कर रहे हैं — इस पर ध्यान दें।
उनकी फ्रेंड लिस्ट, वॉच हिस्ट्री, और एक्सप्लोर पेज नियमित जांचें।
3. स्क्रीन टाइम लिमिट सेट करें
बच्चों के मोबाइल पर सोशल मीडिया इस्तेमाल की रोजाना सीमा तय करें (जैसे 30 मिनट या 1 घंटा)।
ये सेटिंग एंड्रॉइड और iOS दोनों में मौजूद है।
4. एजुकेशनल ऐप्स का उपयोग बढ़ाएं
YouTube Kids, Quizzizz, Khan Academy Kids जैसे ऐप्स बच्चों के लिए मनोरंजन और शिक्षा का सुरक्षित तरीका हैं।
महक और परी का यह मामला सिर्फ एक अश्लील रील्स से जुड़े विवाद से बढ़कर है। यह एक सामाजिक चेतावनी है कि कैसे सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करके लोग पहचान छिपाकर पैसे कमा रहे हैं और किस तरह हमारे बच्चे इस गंदगी की चपेट में आ सकते हैं।
इसलिए माता-पिता और समाज को सतर्क रहना होगा और बच्चों को डिजिटल दुनिया की सही और गलत के बीच का फर्क समझाना होगा।
The Mehak Pari viral video case from Sambhal has raised serious concerns about online obscenity and identity misuse. Two Muslim girls, using fake Hindu names Mehak and Pari, created vulgar Instagram reels and earned ₹30,000–₹35,000 monthly. Along with their friends Hina and cameraman Alam, they were arrested by police and later apologized in court, avoiding jail time. This case highlights the importance of parental control, monitoring kids’ social media activity, and protecting young minds from inappropriate content online.



















