OTT कंटेंट पर मोहन भागवत का बड़ा बयान: ‘इंटरनेट पर क्या देखना है, यह फैसला दर्शकों को खुद करना चाहिए’
AIN NEWS 1: डिजिटल दौर में मनोरंजन के साधनों में तेजी से बदलाव आया है। पहले जहां लोग केवल टीवी या सिनेमा के माध्यम से फिल्में और कार्यक्रम देखते थे, वहीं अब इंटरनेट के जरिए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने लोगों के मनोरंजन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। इसी बदलते समय और डिजिटल कंटेंट को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने एक अहम टिप्पणी की है।
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कंटेंट को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आज के डिजिटल युग में कंटेंट की कोई कमी नहीं है। इंटरनेट पर हर तरह का कंटेंट उपलब्ध है—चाहे वह मनोरंजन से जुड़ा हो, शिक्षा से संबंधित हो या धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित हो।
सेंसरशिप नहीं, समझदारी जरूरी
मोहन भागवत का मानना है कि इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि कंटेंट पर कितना नियंत्रण होना चाहिए, बल्कि यह है कि दर्शक अपनी समझ और विवेक का इस्तेमाल करके तय करें कि उन्हें क्या देखना है और क्या नहीं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के पास आज स्वतंत्रता है कि वह अपनी पसंद का कंटेंट चुन सके।
उनके अनुसार, सरकार या किसी संस्था द्वारा हर कंटेंट को नियंत्रित करना एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने सेंसरशिप की बजाय जागरूकता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी को ज्यादा महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि जब दर्शक खुद सही और गलत कंटेंट की पहचान करना सीखेंगे, तब समाज में सकारात्मक बदलाव स्वतः आएगा।
डिजिटल युग में बढ़ती जिम्मेदारी
आज इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा माध्यम बन गया है जो लोगों की सोच और व्यवहार को भी प्रभावित करता है। ऐसे में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों का असर सीधे तौर पर युवाओं और बच्चों पर पड़ता है।
मोहन भागवत ने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। दर्शकों को चाहिए कि वे अपने समय और मानसिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए कंटेंट का चुनाव करें।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर जो भी उपलब्ध है, वह हमेशा सही या उपयोगी नहीं होता। इसलिए यह जरूरी है कि लोग अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल कंटेंट का चयन करें।
धार्मिक और सांस्कृतिक कंटेंट पर राय
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कई बार धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को लेकर विवाद भी सामने आते रहते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि विविधता वाले समाज में अलग-अलग विचारों का होना स्वाभाविक है। लेकिन यह भी जरूरी है कि किसी भी प्रकार का कंटेंट समाज की भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। ऐसे में कंटेंट निर्माताओं और दर्शकों दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
दर्शकों की पसंद ही सबसे बड़ी ताकत
मोहन भागवत ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर क्या दिखाया जाएगा, यह काफी हद तक दर्शकों की पसंद पर निर्भर करता है। अगर दर्शक किसी प्रकार के कंटेंट को पसंद नहीं करते, तो वह स्वतः ही अप्रासंगिक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट की सफलता या असफलता अंततः दर्शकों के हाथ में ही होती है। इसलिए यह जरूरी है कि लोग सोच-समझकर ऐसे कार्यक्रमों का चयन करें जो समाज और परिवार के लिए सकारात्मक हों।
कंटेंट चयन में सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट की विविधता एक अवसर भी है और चुनौती भी। जहां एक ओर यह लोगों को नए विचारों और दृष्टिकोण से परिचित कराता है, वहीं दूसरी ओर यह कई बार भ्रम और विवाद की स्थिति भी पैदा कर सकता है।
ऐसे में मोहन भागवत का यह बयान दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि वे इंटरनेट का उपयोग किस तरह से कर रहे हैं। क्या वे केवल मनोरंजन के लिए कंटेंट देख रहे हैं या फिर उससे कुछ सीखने की भी कोशिश कर रहे हैं?
कुल मिलाकर, मोहन भागवत का यह बयान डिजिटल युग में व्यक्तिगत जिम्मेदारी और जागरूकता की अहमियत को दर्शाता है। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि इंटरनेट और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का सही उपयोग तभी संभव है जब दर्शक स्वयं अपने विवेक का इस्तेमाल करें।
आज के समय में जब हर तरह का कंटेंट आसानी से उपलब्ध है, तब यह जरूरी हो जाता है कि हम अपनी पसंद और प्राथमिकताओं के आधार पर ही डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें। इससे न केवल हमारा व्यक्तिगत विकास होगा, बल्कि समाज में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
RSS Chief Mohan Bhagwat’s statement on OTT content highlights the importance of viewer responsibility in the digital age. Instead of supporting censorship on OTT platforms, he emphasized that audiences should decide what kind of digital content they want to watch, especially when it comes to religious and cultural programming. His views on internet freedom, OTT regulation in India, and digital media consumption have sparked debate around content control, cultural values, and viewer choice in online entertainment platforms.


















