AIN NEWS 1: मोहन भागवत ने हाल ही में सामाजिक समानता और आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज के एक बड़े वर्ग ने सदियों तक छुआछूत और सामाजिक भेदभाव जैसी कठिन परिस्थितियों को सहन किया है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी भी देश के प्रति अपनी निष्ठा नहीं छोड़ी। ऐसे में आज जरूरत इस बात की है कि उन्हें बराबरी का अवसर देने के लिए समाज पूरी तरह से तैयार हो।
देहरादून में पूर्व सैनिकों के साथ संवाद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए। यह कार्यक्रम हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित ‘प्रमुखजन गोष्ठी’ के तहत रखा गया था, जिसमें पूर्व सैनिकों और विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारियों ने भाग लिया।
इस दौरान भागवत ने सामाजिक समरसता, आरक्षण और राष्ट्रीय एकता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज के भीतर मौजूद असमानताओं को दूर करने के लिए ठोस प्रयासों की आवश्यकता है।
दो हजार वर्षों का सामाजिक अन्याय
अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू समाज का एक हिस्सा लगभग दो हजार वर्षों तक सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी समस्याओं का सामना करता रहा है। यह एक ऐसी ऐतिहासिक सच्चाई है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक अन्याय सहने के बावजूद इस वर्ग ने कभी भी राष्ट्र के साथ विश्वासघात नहीं किया। यह उनके धैर्य, त्याग और देशभक्ति का प्रमाण है।
आरक्षण पर स्पष्ट रुख
आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए भागवत ने कहा कि यदि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए आने वाले दो सौ वर्षों तक भी आरक्षण जैसी व्यवस्था को जारी रखना पड़े, तो समाज को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
उनके अनुसार, अगर अपने ही समाज के वंचित और पिछड़े भाइयों को आगे बढ़ाने के लिए हमें कुछ व्यक्तिगत या सामूहिक नुकसान भी सहना पड़े, तो यह एक आवश्यक सामाजिक निवेश माना जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाज की समग्र प्रगति तभी संभव है जब हर वर्ग को समान अवसर मिले और विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाए।
सभी भारतीयों के पूर्वज एक
भागवत ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज एक ही हैं और सभी की नसों में एक समान रक्त प्रवाहित होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू बनने के लिए किसी को अपनी पहचान या परंपरा को छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। केवल देश के प्रति निष्ठा और समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण ही पर्याप्त है।
विरोधियों को भी जोड़ने की जरूरत
अपने वक्तव्य के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में जो लोग विरोध कर रहे हैं, उन्हें भी भविष्य में समाज के साथ जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने संवाद और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने पर बल दिया।
उनके अनुसार, एक मजबूत और समरस समाज का निर्माण तभी संभव है जब मतभेदों को दूर कर सभी को साथ लेकर चला जाए।
सामाजिक समरसता की दिशा में संदेश
भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सामाजिक न्याय और आरक्षण को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। उनका यह संदेश समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने अंत में कहा कि एक समतामूलक समाज का निर्माण केवल नीतियों से नहीं बल्कि सामूहिक सोच और आपसी सहयोग से संभव है।
RSS Chief Mohan Bhagwat, while addressing former servicemen in Dehradun at the Himalayan Cultural Center, stressed the importance of long-term reservation in India to eliminate caste discrimination and ensure equality in Hindu society. He highlighted that marginalized communities have faced social discrimination for nearly two thousand years but have remained loyal to the nation. Bhagwat suggested that even if reservation policies need to continue for the next two hundred years to bring social justice and equal opportunities, society must support such measures for inclusive national development.


















