नमस्कार,
कल की बड़ी खबर सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के ट्रोल होने को लेकर रही। दूसरी बड़ी खबर AI समिट में कांग्रेस के प्रदर्शन की रही। कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट उतारकर भारत-US डील का विरोध किया।
आज के प्रमुख इवेंट्स:
- RSS पर की गई टिप्पणी मामले में राहुल गांधी महाराष्ट्र के भिवंडी कोर्ट में पेश हो सकते हैं।
- PM मोदी यूपी के गौतमबुद्ध नगर में सेमीकंडक्टर निर्माण यूनिट की नींव रखेंगे।
कल की बड़ी खबरें:
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को किया रद्द, कहा—टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद को
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति को यह अधिकार नहीं दिया गया है।
कोर्ट के इस फैसले के बाद उन सभी देशों पर लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क स्वतः निरस्त माने जाएंगे, जिन पर ट्रम्प प्रशासन ने टैरिफ लागू किए थे। इसमें भारत पर लगाया गया 18 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ भी शामिल है, जिसे अब कानूनी मान्यता नहीं रही।
दरअसल, अप्रैल 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कई देशों से अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। ट्रम्प प्रशासन का तर्क था कि विदेशी उत्पादों की बढ़ती आमद अमेरिकी उद्योग और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन रही है, इसलिए यह कदम जरूरी था।
हालांकि, इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आर्थिक नीति लागू की है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद माना कि संविधान में कर और शुल्क से जुड़े फैसले लेने की शक्ति विधायिका को दी गई है, न कि कार्यपालिका को।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। साथ ही, इससे अमेरिका की व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर भी असर पड़ने की संभावना है। अब आगे की व्यापारिक रणनीति तय करने की जिम्मेदारी अमेरिकी कांग्रेस पर होगी।
मुख्य बिंदु:
• सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को असंवैधानिक बताया
• अदालत ने कहा कि टैरिफ लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी संसद के पास है
• भारत समेत कई देशों पर लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क अब अवैध माने जाएंगे
दिल्ली AI समिट में यूथ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन, टी-शर्ट उतारकर लगाए नारे; 4 कार्यकर्ता गिरफ्तार
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI समिट 2026 के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट उतारकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए हलचल का माहौल बन गया।
प्रदर्शनकारियों की टी-शर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीरें छपी थीं। साथ ही उस पर ‘PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ लिखा हुआ था। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने इसी नारे को जोर-शोर से दोहराया। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया।
दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से चार प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और अव्यवस्था फैलाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।
इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाया है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि यह कोई अचानक हुआ विरोध नहीं था, बल्कि सुनियोजित प्रदर्शन था। उन्होंने दावा किया कि इसकी योजना कांग्रेस नेतृत्व स्तर पर बनाई गई थी।
वहीं, कांग्रेस की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AI समिट जैसे वैश्विक कार्यक्रम के दौरान हुए इस विरोध प्रदर्शन ने भारत की आंतरिक राजनीति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बना दिया है।
मुख्य बिंदु:
• AI समिट 2026 के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ट्रेड डील के खिलाफ प्रदर्शन किया
• ‘PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ लिखी टी-शर्ट पहनकर और उतारकर लगाए नारे
• दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा उल्लंघन के आरोप में 4 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया
यूपी में शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों को बड़ी राहत, मानदेय बढ़ाकर 18 हजार और 17 हजार रुपए किया गया
उत्तर प्रदेश में पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने करीब 1.70 लाख शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि की घोषणा की है। अब शिक्षा मित्रों को हर महीने 18 हजार रुपए और अनुदेशकों को 17 हजार रुपए मानदेय मिलेगा।
अब तक शिक्षा मित्रों को 10 हजार रुपए और अनुदेशकों को 9 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे थे। सरकार के इस निर्णय से लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार लगातार शिक्षा मित्रों के हित में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार के समय शिक्षा मित्रों को केवल 3 हजार रुपए मानदेय मिलता था। वर्ष 2017 में उनकी सरकार ने इसे बढ़ाकर 10 हजार रुपए किया था और अब बढ़ती महंगाई को देखते हुए इसमें 8 हजार रुपए की अतिरिक्त बढ़ोतरी की गई है।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि शिक्षा मित्रों के तबादले (ट्रांसफर) की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। लंबे समय से ट्रांसफर नीति की मांग उठ रही थी, जिसे अब लागू करने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि लगभग 9 साल बाद शिक्षा मित्रों के मानदेय में यह बड़ी वृद्धि की गई है।
सरकार के इस फैसले को चुनाव से पहले कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका असर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।
मुख्य बिंदु:
• शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार और अनुदेशकों का 17 हजार रुपए किया गया
• करीब 1.70 लाख कर्मचारियों को फैसले से सीधा लाभ मिलेगा
• 9 साल बाद वेतन वृद्धि के साथ शिक्षा मित्रों के ट्रांसफर की भी घोषणा हुई
बलूच लड़ाकों की कैद में पाकिस्तानी सैनिकों का वीडियो वायरल, सरकार से लगाई मदद की गुहार
बलूचिस्तान में सक्रिय बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) की कैद में बताए जा रहे पाकिस्तानी सैनिकों का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सैनिक रोते हुए नजर आ रहे हैं और पाकिस्तान सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं। यह वीडियो हक्काल मीडिया नामक प्लेटफॉर्म द्वारा जारी किए जाने का दावा किया गया है।
वीडियो में कुल सात सैनिक दिखाई दे रहे हैं, जो खुद को पाकिस्तानी सेना का सदस्य बताते हुए अपनी रिहाई की मांग कर रहे हैं। एक सैनिक भावुक होकर कहता है कि वह हमेशा देश के लिए लड़ता रहा, लेकिन अब सेना उसे अपना मानने से इनकार कर रही है। उसने कैमरे के सामने अपना पहचान पत्र होने की बात भी कही और सवाल उठाया कि आखिर उसे पाकिस्तानी सैनिक क्यों नहीं माना जा रहा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलोच लिबरेशन आर्मी ने 14 फरवरी को इन सैनिकों को पकड़ने का दावा किया था। संगठन ने उनकी रिहाई के बदले अपने कैद लड़ाकों को छोड़ने की मांग रखी है। इसके लिए पाकिस्तान सरकार को 27 फरवरी तक का समय दिए जाने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार और सेना की ओर से अलग दावा किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी पाकिस्तानी सैनिक के लापता होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस विरोधाभास के कारण वीडियो की सत्यता और परिस्थितियों को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वीडियो प्रमाणित होता है, तो यह बलूचिस्तान में जारी संघर्ष और पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर संकेत माना जा सकता है। फिलहाल, मामले को लेकर स्वतंत्र रूप से पुष्टि की प्रतीक्षा की जा रही है।
मुख्य बिंदु:
• BLA की कैद में बताए जा रहे पाकिस्तानी सैनिकों का वीडियो सामने आया
• वीडियो में सैनिकों ने सरकार से रिहाई और मदद की अपील की
• पाकिस्तान सरकार ने किसी सैनिक के लापता होने से इनकार किया
बांदा कोर्ट का सख्त फैसला: बच्चों के यौन शोषण और वीडियो बेचने वाले पति-पत्नी को फांसी की सजा
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की विशेष पॉक्सो अदालत ने बच्चों के यौन शोषण और अश्लील वीडियो बनाकर विदेशों में बेचने के गंभीर मामले में एक पति-पत्नी को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को अत्यंत जघन्य बताते हुए कठोरतम दंड देने का फैसला किया।
शुक्रवार को सुनाए गए फैसले में पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा कि दोनों दोषियों को “मरते दम तक फांसी पर लटकाए रखा जाए।” इससे पहले 18 फरवरी को अदालत ने दोनों को सभी आरोपों में दोषी ठहराया था।
जांच के अनुसार, आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में इंजीनियर के पद पर कार्यरत था, जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती गृहिणी थी। दोनों पर आरोप था कि वे बच्चों का यौन शोषण करते थे और उसके अश्लील फोटो व वीडियो बनाकर डार्क वेब के माध्यम से विदेशों में बेचते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी।
सीबीआई ने रामभवन को 18 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दुर्गावती ने गवाहों पर दबाव बनाकर समझौता कराने की कोशिश की, जिसके चलते उसे भी अपराध में दोषी पाया गया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार के अपराध समाज के लिए अत्यंत खतरनाक हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त संदेश देना जरूरी है। फैसले को बच्चों के खिलाफ अपराधों पर कड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य बिंदु:
• बांदा की पॉक्सो कोर्ट ने पति-पत्नी को फांसी की सजा सुनाई
• बच्चों का यौन शोषण कर वीडियो बनाकर डार्क वेब पर बेचने का आरोप
• सीबीआई जांच के बाद दोनों को दोषी ठहराया गया, अदालत ने कठोर टिप्पणी की
ट्रम्प के कहने पर खड़े हुए पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ, वीडियो वायरल होने पर सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना बोर्ड ऑफ पीस समिट के दौरान की बताई जा रही है, जहां दोनों नेता एक ही मंच पर मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प अपने संबोधन में बोल रहे थे, तभी उन्होंने शहबाज शरीफ से खड़े होने के लिए कहा। ट्रम्प के कहने पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री तुरंत अपनी सीट से खड़े हो गए। इस दौरान उनके चेहरे के भाव कुछ असहज नजर आए, जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ यूजर्स ने इसे ‘स्कूल असेंबली जैसा पल’ बताते हुए टिप्पणी की, जबकि कुछ ने इस व्यवहार को लेकर शहबाज शरीफ की आलोचना भी की। कई पोस्ट में उन्हें ट्रोल करते हुए विभिन्न टिप्पणियां की गईं।
इसी कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की। उन्होंने मोदी को ‘महान व्यक्ति’ और ‘अच्छा दोस्त’ बताया, जिसकी चर्चा भी सोशल मीडिया पर देखने को मिली।
हालांकि, इस घटना को लेकर पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेताओं की बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार अक्सर कूटनीतिक संदेशों के रूप में भी देखा जाता है।
मुख्य बिंदु:
• बोर्ड ऑफ पीस समिट के दौरान ट्रम्प के कहने पर खड़े हुए पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ
• वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
• ट्रम्प ने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा की
























