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Morning News Brief: चार-धाम में ‘गैर हिंदुओं’ पर बैन की तैयारी; दावा- भारत के खिलाफ वर्ल्डकप मैच नहीं खेलेगा PAK; अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में अफसर का इस्तीफा

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Date:

नमस्कार,
कल की बड़ी खबर चार धाम से जुड़ी है। मंदिर कमेटी ने गैर हिंदुओं पर बैन लगाने की तैयारी कर ली है। दूसरी खबर अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में अफसर के इस्तीफे की है।

आज के प्रमुख इवेंट्स:

1. देशभर में बैंकों की हड़ताल, 5डे वर्किंग की मांग को लेकर एक दिन कामकाज बंद रखेंगे।
2. PM मोदी शाम 4.30 बजे दिल्ली के करिअप्पा परेड ग्राउंड में वार्षिक एनसीसी रैली को संबोधित करेंगे।

कल की बड़ी खबरें:

शंकराचार्य के अपमान से आहत यूपी अधिकारी का इस्तीफा, UGC कानून और साधु-संतों पर कार्रवाई से जताई नाराज़गी

UGC Controversy & Shankaracharya Disrespect: SDM Alankar Agnihotri Resigns,  Slams BJP MPs | UGC से खफा...'शंकराचार्य का अपमान! SDM ने की खुली बगावत,  BJP सांसदों को बताया 'कॉरपोरेट नौकर ...

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले ने प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा को तेज कर दिया है। अधिकारी ने अपने इस्तीफे में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट और UGC के नए कानून को अपनी नाराज़गी का प्रमुख कारण बताया है।

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने त्यागपत्र में लिखा कि हाल की घटनाओं से उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के शिष्यों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे ब्राह्मण समाज और सनातन परंपरा का अपमान है। ऐसी घटनाएं किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को भीतर तक झकझोर देती हैं।

अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार का रवैया ब्राह्मण समाज तथा साधु-संतों के प्रति सम्मानजनक नहीं दिखाई देता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ऐसे माहौल में कार्य नहीं कर सकते, जहां धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सम्मान की अनदेखी की जा रही हो।

इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि शंकराचार्य पद का सम्मान किसी सरकारी व्यवस्था से नहीं, बल्कि सनातन प्रेमियों के हृदय में गहराई से स्थापित है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अपने फैसलों और उनके परिणामों का अनुमान स्वयं लगा लेना चाहिए।

यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और इसे धार्मिक भावनाओं, प्रशासनिक निर्णयों और सामाजिक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

मुख्य बिंदु:

  • बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर दिया इस्तीफा

  • UGC के नए कानून और शंकराचार्य के शिष्यों की पिटाई को बताया कारण

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- सम्मान जनता के हृदय में होता है, सरकार परिणाम समझे

 

 

 

 

अविमुक्तेश्वरानंद को तीनों शंकराचार्यों का समर्थन, बोले— अब लड़ाई असली और नकली हिंदू के बीच

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर जारी विवाद के बीच देश के तीनों शंकराचार्यों का खुला समर्थन सामने आया है। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने स्पष्ट कहा कि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ खड़े हैं और प्रशासन को उनसे किसी भी प्रकार का प्रमाण या सर्टिफिकेट मांगने का कोई अधिकार नहीं है।

स्वामी सदानंद सरस्वती ने यह बयान मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित नर्मदा जन्मोत्सव कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्दोष ब्राह्मणों के साथ जिस तरह से कठोरता और मारपीट की गई, वह अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे सनातन परंपरा के विरुद्ध बताया।

इधर प्रयागराज के माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन्होंने धरना स्थल पर तिरंगा फहराया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें कार्यक्रम स्थल में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है और लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

अविमुक्तेश्वरानंद ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का नाम लेते हुए कहा कि यदि उनके हाथ में पूरा अधिकार होता तो वे उन्हें जबरन स्नान कराकर वहां से हटा चुके होते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार डांटा जा रहा है और धार्मिक गतिविधियों में बाधा पहुंचाई जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अब यह संघर्ष केवल प्रशासन से नहीं, बल्कि असली और नकली हिंदू की पहचान की लड़ाई बन चुका है।

मुख्य बिंदु:

  • तीनों शंकराचार्यों ने अविमुक्तेश्वरानंद को दिया खुला समर्थन

  • स्वामी सदानंद सरस्वती बोले— प्रशासन को सर्टिफिकेट मांगने का कोई अधिकार नहीं

  • माघ मेले में धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद, प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

 

 

चारधाम समेत 50 मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर लग सकता है प्रतिबंध, सिख-बौद्ध-जैन रहेंगे बाहर नहीं

सिर्फ बदरीनाथ-केदारनाथ ही नहीं, इन 48 मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं की एंट्री  रोकने की तैयारी, देखें लिस्ट - Badrinath Kedarnath Mandir Non Hindus Entry  Ban Tourist Place CM ...

उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सहित राज्य के लगभग 50 मंदिरों में जल्द ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इस संबंध में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC), गंगोत्री धाम मंदिर समिति और यमुनोत्री धाम मंदिर समिति द्वारा सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था, जिस पर अब सहमति बनती नजर आ रही है।

मंदिर समितियों का कहना है कि यह निर्णय धार्मिक मर्यादा, परंपरा और आस्था की रक्षा के उद्देश्य से लिया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार यह प्रतिबंध सभी धर्मों पर समान रूप से लागू नहीं होगा।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि गैर-हिंदू से आशय उन लोगों से है, जिनकी सनातन धर्म में आस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु सनातन परंपराओं में विश्वास रखते हैं, उनके लिए चारधाम के द्वार खुले रहेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि सिख, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि इन धर्मों की आस्थाएं और परंपराएं सनातन संस्कृति से जुड़ी मानी जाती हैं।

सरकार स्तर पर सहमति बनने के बाद अब इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह निर्णय धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • चारधाम समेत उत्तराखंड के 50 मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर विचार

  • सिख, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों पर प्रतिबंध नहीं होगा

  • गैर-हिंदू की परिभाषा: जिनकी सनातन धर्म में आस्था नहीं

टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाक मैच पर संकट, पाकिस्तान कर सकता है मुकाबले का बहिष्कार

भारत बनाम पाकिस्तान मैच पर संकट, आईसीसी के खिलाफ पीसीबी का बड़ा कदम- IPL

टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान भारत के खिलाफ होने वाला मैच बॉयकॉट कर सकता है। यह मुकाबला 15 फरवरी को श्रीलंका के कोलंबो में खेला जाना तय है।

पाकिस्तान के प्रमुख न्यूज चैनल जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले में बांग्लादेश का समर्थन करेगा और भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो टूर्नामेंट के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक रद्द होने की स्थिति बन सकती है।

इस मुद्दे पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने सोमवार को प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से मुलाकात की। बैठक में पाकिस्तान की वर्ल्ड कप में भागीदारी और भारत के खिलाफ मैच खेलने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

मोहसिन नकवी ने बताया कि इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला अगले 5 से 7 दिनों के भीतर लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि निर्णय सरकार से सलाह-मशविरा के बाद ही लिया जाएगा।

क्रिकेट जानकारों के मुताबिक यदि पाकिस्तान भारत के खिलाफ ग्रुप स्टेज का मैच नहीं खेलता है, तो इसका सीधा नुकसान खुद पाकिस्तान को उठाना पड़ सकता है। नियमों के अनुसार मैच नहीं खेलने की स्थिति में पाकिस्तान को सीधे 2 अंक गंवाने पड़ सकते हैं, जिससे उनकी सेमीफाइनल की राह मुश्किल हो जाएगी।

मुख्य बिंदु:

  • 15 फरवरी को कोलंबो में होना है भारत-पाक मुकाबला

  • जियो न्यूज का दावा— पाकिस्तान मैच का बहिष्कार कर सकता है

  • बॉयकॉट की स्थिति में पाकिस्तान को 2 अंकों का नुकसान संभव

 

 

 

 

कर्तव्य पथ पर भव्य गणतंत्र दिवस परेड, 29 लड़ाकू विमानों ने सिंदूर और वज्रांग फॉर्मेशन से दिखाया शौर्य

Republic Day flypast to feature 29 aircraft, new Sindoor fighter formation|  India News

दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भव्य राष्ट्रीय परेड का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तिरंगा फहराया, जिसके बाद राष्ट्रगान हुआ और परंपरा के अनुसार 21 तोपों की सलामी दी गई। पूरे देश ने इस ऐतिहासिक क्षण को गर्व और सम्मान के साथ देखा।

समारोह के दौरान ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके अद्वितीय साहस, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए प्रदान किया गया।

इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में एक विशेष पहल देखने को मिली। पहली बार दो अंतरराष्ट्रीय अतिथि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने परेड में भाग लिया।

करीब 90 मिनट तक चली परेड में देश की सांस्कृतिक विविधता और विकास यात्रा को दर्शाती 30 झांकियां प्रस्तुत की गईं। इनमें विभिन्न राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां शामिल रहीं, जिन्होंने विकसित भारत की झलक दिखाई।

परेड का सबसे आकर्षक दृश्य वायुसेना का फ्लाईपास्ट रहा। भारतीय वायुसेना के 29 लड़ाकू विमानों ने आकाश में शक्ति और समन्वय का अद्भुत प्रदर्शन किया। राफेल, जगुआर, मिग-29 और सुखोई जैसे अत्याधुनिक विमानों ने सिंदूर, वज्रांग, अर्जन और प्रहार फॉर्मेशन बनाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

तीनों सेनाओं के इस संयुक्त प्रदर्शन ने भारत की सैन्य ताकत, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाया।

मुख्य बिंदु:

  • कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस की भव्य परेड आयोजित

  • 29 लड़ाकू विमानों ने सिंदूर, वज्रांग, अर्जन और प्रहार फॉर्मेशन बनाए

  • पहली बार दो विदेशी नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए

 

 

 

 

चीनी जनरल पर अमेरिका को परमाणु रहस्य लीक करने का आरोप, पद से हटाए जाने का दावा

China Nuclear Secret Leak: Chinese military purge | Xi Jinping Takhtapalat  | General Zhang Youxia | China US Relations- - News18 हिंदी

चीन की सेना से जुड़ा एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के वाइस चेयरमैन जनरल झांग यूक्सिया पर चीन के परमाणु हथियारों से संबंधित गोपनीय जानकारी अमेरिका को लीक करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें 24 जनवरी को उनके पद से हटा दिया गया है और उनके खिलाफ आंतरिक जांच भी शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक यह मामला चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा माना जा रहा है, इसलिए सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है। हालांकि, सत्ता के गलियारों में इसे बीजिंग की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई में से एक माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि जनरल झांग यूक्सिया ने वर्ष 2023 में शी जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति बनाए जाने में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय वे राष्ट्रपति शी के बेहद करीबी माने जाते थे, लेकिन बाद के महीनों में दोनों के बीच मतभेद गहराते चले गए।

जानकारी के अनुसार, लंबे समय तक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में बड़े फैसले जनरल झांग ही लेते रहे थे। लेकिन हाल के समय में उनकी गतिविधियां अचानक सीमित हो गईं और वे कई महत्वपूर्ण कम्युनिस्ट पार्टी बैठकों में नजर नहीं आए।

इसी तरह CMC से जुड़े एक अन्य वरिष्ठ जनरल लियू भी पिछले कई महीनों से सार्वजनिक कार्यक्रमों और बैठकों से गायब बताए जा रहे हैं। चीन में किसी वरिष्ठ अधिकारी का इस तरह अचानक गायब होना आमतौर पर इस बात का संकेत माना जाता है कि उसे पद से हटाने या जांच के दायरे में लाने की प्रक्रिया चल रही है।

इस पूरे घटनाक्रम को चीन की सैन्य और राजनीतिक संरचना में बड़े अंदरूनी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्य बिंदु:

  • CMC के वाइस चेयरमैन झांग यूक्सिया पर परमाणु जानकारी लीक करने का आरोप

  • 24 जनवरी को पद से हटाए जाने और जांच शुरू होने का दावा

  • शी जिनपिंग से नजदीकी के बाद बढ़े मतभेद, बैठकों से गायब रहे

 

 

 

 

 

‘वंदे मातरम्’ पर भी लागू हो सकता है राष्ट्रीय प्रोटोकॉल, 150 वर्ष पूरे होने पर सरकार कर रही विचार

Vande Mataram Protocol: Govt Considers Making Standing Mandatory | India  News

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। केंद्र सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि जिस तरह राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समय खड़े होना अनिवार्य होता है, उसी तरह भविष्य में ‘वंदे मातरम्’ के लिए भी एक आधिकारिक प्रोटोकॉल लागू किया जाए।

यह विचार ऐसे समय पर सामने आया है, जब ‘वंदे मातरम्’ की रचना को 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। सरकार मानती है कि यह अवसर देश की स्वतंत्रता चेतना, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का है।

‘वंदे मातरम्’ को वर्ष 1950 में भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया था। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जन-जन में जोश और चेतना जगाने का माध्यम बना।

यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित है और उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ का हिस्सा है। मूल रूप से यह एक भजन के रूप में लिखा गया था, जिसमें राष्ट्र को मां के रूप में नमन किया गया है। ‘वंदे मातरम्’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका अर्थ है— मां को प्रणाम।

स्वतंत्रता आंदोलन के समय संन्यासियों और क्रांतिकारियों का यही प्रमुख नारा था। पंडित भवानीचरण पाठक, देवू रानी चौधरी और मजनू शाह जैसे नेताओं के नेतृत्व में यह नारा देशभर में गूंजा। ये संन्यासी भारत की धरती को ही अपनी मां मानते थे, इसी भावना ने इस गीत को अत्यंत लोकप्रिय बना दिया।

इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण 1896 का रहा, जब कांग्रेस पार्टी के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ सार्वजनिक रूप से गाया गया। इसे गाने वाले थे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर। उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष रहमतुल्लाह सयानी थे।

अब सरकार इस बात पर मंथन कर रही है कि क्या राष्ट्रीय गीत के सम्मान को और अधिक औपचारिक रूप दिया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इसके महत्व और गरिमा को गहराई से समझ सकें।

मुख्य बिंदु:

  • ‘वंदे मातरम्’ के लिए भी राष्ट्रीय गान जैसा प्रोटोकॉल लागू करने पर विचार

  • रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सरकार कर रही मंथन

  • 1950 में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला

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