नमस्कार,
कल की बड़ी खबर उत्तराखंड में बादल फटने से जुड़ी रही। 34 सेकेंड में एक गांव तबाह हो गया। दूसरी बड़ी खबर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकी को लेकर रही।
आज के प्रमुख इवेंट्स:
1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर बने कर्तव्य भवन का उद्घाटन करेंगे।
2. 2018 में अमित शाह पर कथित टिप्पणी मामले में राहुल गांधी झारखंड के चाईबासा कोर्ट में पेश होंगे।
3. सुप्रीम कोर्ट में ED की शक्ति संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई होगी।
कल की बड़ी खबरें:
उत्तराखंड: धराली में बादल फटने से 34 सेकेंड में तबाही, 4 की मौत, 50 से ज्यादा लोग लापता
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उत्तरकाशी के धराली गांव में मंगलवार दोपहर बादल फटने से भारी तबाही
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घटना के वीडियो में दिखा 34 सेकेंड में गांव मलबे में समाया
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सेना के 8 से 10 जवान भी हर्षिल क्षेत्र में लापता होने की खबर
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में मंगलवार दोपहर करीब 1:45 बजे बादल फटने की घटना हुई, जिससे पूरे गांव में भारी तबाही मच गई। इस हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 50 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
घटना के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें साफ देखा जा सकता है कि पहाड़ियों से बारिश का तेज बहाव और मलबा गांव की ओर आया और महज 34 सेकेंड के भीतर पूरा गांव इसकी चपेट में आ गया। लोग इधर-उधर भागते दिखे, अफरा-तफरी मच गई। वीडियो में कुछ लोग दूर खड़े होकर चिल्लाते हुए लोगों को जान बचाने की चेतावनी देते नजर आए।
धराली गांव में आपदा के बाद करीब 30 फीट तक मलबा जमा हो गया है। बाजार की कई दुकानें और आसपास के कई मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं। गांव में चीख-पुकार का माहौल बना हुआ है।
इसके अलावा, हर्षिल और सुक्की गांवों में भी बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। हर्षिल क्षेत्र में सेना के 8 से 10 जवानों के लापता होने की भी खबर है, जिनकी तलाश जारी है।
धराली गांव का परिचय:
धराली, उत्तरकाशी जिले का एक छोटा पहाड़ी गांव है जो भागीरथी नदी के किनारे, हर्षिल घाटी के पास स्थित है। यह गांव गंगोत्री धाम से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और गंगोत्री यात्रा के प्रमुख पड़ावों में से एक माना जाता है।
सच्चा भारतीय कौन? प्रियंका गांधी बोलीं– जज तय नहीं करेंगे, सरकार से सवाल पूछना विपक्ष का हक
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सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा था– “सच्चा भारतीय ऐसा नहीं कहेगा”
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प्रियंका गांधी ने कहा– “सेना का राहुल सम्मान करते हैं, उनकी बात को गलत समझा गया”
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राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान चीन को लेकर विवादित बयान दिया था
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ‘‘सच्चा भारतीय कौन है, यह तय करना जजों का काम नहीं है।’’ प्रियंका ने यह बयान उस टिप्पणी के जवाब में दिया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि “सच्चा भारतीय ऐसा नहीं कहेगा।”
प्रियंका ने कहा, “हम न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन विपक्ष का कर्तव्य है कि वह सरकार से सवाल पूछे। मेरा भाई यानी राहुल गांधी कभी भी सेना के खिलाफ नहीं बोल सकते, वह सेना का हमेशा सम्मान करते हैं। उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया है।”
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को राहुल गांधी के बयान पर सुनवाई के दौरान कहा था कि उन्हें कैसे पता चला कि चीन ने भारत की 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है। कोर्ट ने कहा, “सच्चा भारतीय ऐसा बयान नहीं देगा।”
यह पूरा विवाद राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा है जो उन्होंने 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिया था। राहुल ने कहा था कि “भारत जोड़ो यात्रा पर तो सब सवाल कर रहे हैं, लेकिन इस पर कोई बात नहीं कर रहा कि चीन ने 2000 वर्ग किमी भारतीय जमीन कब्जा ली है, 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए, और अरुणाचल में हमारे जवानों को पीटा जा रहा है।”
प्रियंका गांधी ने साफ किया कि राहुल की नीयत पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए, क्योंकि वह देश और सेना के सच्चे हितैषी हैं।
PM मोदी का तंज: विपक्ष अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारता है, ऑपरेशन सिंदूर पर बहस मांग कर कर ली बड़ी गलती
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NDA की बैठक में PM मोदी ने कहा– विपक्ष को बहस की मांग करके नुकसान हुआ
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ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव की सफलता पर PM मोदी का हुआ सम्मान
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PM बोले– हम चर्चा में माहिर हैं, विपक्ष रोज बहस कराए तो अच्छा है
दिल्ली के संसद भवन परिसर में बुधवार को एनडीए (NDA) संसदीय दल की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव की सफलता के लिए सम्मानित किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री को माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। बैठक के दौरान सांसदों ने “हर-हर महादेव” और “भारत माता की जय” के नारे भी लगाए।
विपक्ष पर PM मोदी का कटाक्ष:
बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि “संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस की मांग करके विपक्ष ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। इसमें उनकी ही फजीहत हो गई।”
मोदी ने आगे कहा कि, “विपक्ष रोज इस तरह की चर्चा कराए तो बेहतर है, क्योंकि हम इस क्षेत्र में माहिर हैं। विपक्ष को समझना चाहिए कि रणनीति के बिना ऐसे मुद्दों को उठाना उन्हें ही भारी पड़ता है।”
ऑपरेशन सिंदूर और महादेव क्या हैं?
हाल ही में भारतीय एजेंसियों ने विदेश में छिपे भारत-विरोधी आतंकी नेटवर्क के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ऑपरेशन महादेव’ को अंजाम दिया, जिसमें कई बड़ी कामयाबियां मिलीं। सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी उपलब्धि मान रही है।
कुबेरेश्वर धाम में भगदड़: 2 श्रद्धालुओं की मौत, कांवड़ यात्रा में उमड़ी भीड़ बेकाबू हुई
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कुबेरेश्वर धाम में भीड़ के दबाव से दो श्रद्धालुओं की मौत
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पंडित प्रदीप मिश्रा की कांवड़ यात्रा से पहले भारी संख्या में जुटे भक्त
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घायलों को अस्पताल पहुंचाने में लगा डेढ़ घंटा, दो की हालत गंभीर
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित कुबेरेश्वर धाम में मंगलवार को भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। इस हादसे में दो श्रद्धालुओं की दबने से मौत हो गई, जबकि 8 से 10 लोग चक्कर और घबराहट की शिकायत के बाद अस्पताल पहुंचाए गए। इनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।
यह भगदड़ प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा आयोजित कांवड़ यात्रा से पहले हुई। प्रदीप मिश्रा आज कुबेरेश्वर धाम से चितावलिया हेमा गांव तक कांवड़ यात्रा निकालने वाले थे। इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए एक दिन पहले ही हजारों श्रद्धालु पहुंच गए थे।
व्यवस्था चरमराई, अस्पताल पहुंचने में लगा डेढ़ घंटा:
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ठहरने और दर्शन के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, स्थिति बेकाबू होती गई। भगदड़ के बाद घायलों को जिला अस्पताल स्थित ट्रॉमा सेंटर तक ले जाने में करीब डेढ़ घंटे का समय लग गया, क्योंकि रास्ते और परिसर में भारी भीड़ जमा थी।
प्रशासनिक स्तर पर भीड़ प्रबंधन और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, आर्टिकल 370 हटने के समय थे पद पर
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सत्यपाल मलिक का 5 अगस्त 2025 को दिल्ली में हुआ निधन
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लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे, 11 मई से अस्पताल में भर्ती थे
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आर्टिकल 370 हटने के समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे
जम्मू-कश्मीर, बिहार, गोवा और मेघालय के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे और लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें 11 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को हुआ था। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। 2018 में उन्हें जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक कार्य किया।
आर्टिकल 370 हटाने के समय निभाई अहम भूमिका:
उनके कार्यकाल के दौरान ही 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया था, जिसने राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया।
इसके अलावा, सत्यपाल मलिक ने 2018 में ओडिशा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था। अपने कार्यकाल के दौरान वे अक्सर अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों के लिए चर्चा में रहे।
उनके निधन से राजनीतिक और प्रशासनिक जगत में शोक की लहर है। देश के कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है और उनके योगदान को याद किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार नेमरा गांव में, बेटे हेमंत सोरेन ने दी मुखाग्नि
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शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में हुआ निधन, लंबे समय से बीमार थे
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हेमंत सोरेन ने दी मुखाग्नि, राहुल गांधी और खड़गे भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए
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19 जून से अस्पताल में भर्ती थे, इलाज के दौरान ब्रेन स्ट्रोक और पैरालिसिस हुआ
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन का सोमवार सुबह 8:56 बजे निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। अंतिम संस्कार के समय उनके बेटे और झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें मुखाग्नि दी।
राजनीतिक हस्तियां भी रहीं मौजूद:
अंतिम संस्कार में कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति रही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी अंतिम विदाई देने पहुंचे।
लंबे समय से बीमार थे शिबू सोरेन:
शिबू सोरेन 81 वर्ष के थे और कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्हें 19 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उन्हें ब्रेन स्ट्रोक और पैरालिसिस अटैक हुआ, जिसके बाद उनकी हालत और बिगड़ गई। वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे।
शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन झारखंड की पहचान से जुड़ा रहा है। उन्होंने लंबे समय तक आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ी और झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। उनके निधन से राज्य और देश की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।
























