नवरात्र का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, महत्व और जरूरी नियम
AIN NEWS 1: नवरात्र का तीसरा दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। यह दिन विशेष रूप से शक्ति, साहस और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मां चंद्रघंटा को उनके माथे पर अर्धचंद्र के कारण यह नाम मिला है, जो घंटी के आकार जैसा दिखता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
आज के इस लेख में हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि तीसरे नवरात्र को कैसे मनाएं, पूजा की सही विधि क्या है, क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत दिव्य और शक्तिशाली माना जाता है। उनका वाहन सिंह है और उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र होते हैं। यह स्वरूप शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है, लेकिन साथ ही यह भक्तों को शांति और सुरक्षा भी प्रदान करता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन मां की सच्चे मन से पूजा करता है, उसे भय, तनाव और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। साथ ही, आत्मविश्वास और साहस में भी वृद्धि होती है।
तीसरे नवरात्र की पूजा विधि
अगर आप चाहते हैं कि आपकी पूजा पूर्ण फलदायी हो, तो नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करें:
1. सुबह की शुरुआत
तीसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना शुभ माना जाता है। उठने के बाद स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इस दिन पीले या सुनहरे रंग के कपड़े पहनना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
2. पूजा स्थान की तैयारी
घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। मां चंद्रघंटा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें और गंगाजल से स्थान को शुद्ध करें।
3. दीप और धूप जलाना
पूजा शुरू करने से पहले दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती लगाएं। इससे वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बनता है।
4. देवी को अर्पण
मां को पीले फूल अर्पित करें, खासतौर पर गेंदे के फूल। इसके अलावा फल, मिठाई और दूध से बनी चीजें जैसे खीर का भोग लगाएं। पंचामृत भी अर्पित करना शुभ माना जाता है।
5. मंत्र जाप
“ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
6. आरती और प्रार्थना
पूजा के अंत में मां की आरती करें और अपने मन की इच्छा उनके सामने रखें। सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर सुनी जाती है।
क्या करें (Do’s)
इस दिन व्रत रखना शुभ माना जाता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या निर्जला व्रत रख सकते हैं।
पीले रंग के वस्त्र पहनें, यह दिन के लिए शुभ रंग माना जाता है।
घर में साफ-सफाई और सकारात्मक माहौल बनाए रखें।
मां दुर्गा के भजन, दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करें।
जरूरतमंद लोगों को दान करें, जैसे दूध, चावल या मिठाई।
❌ क्या न करें (Don’ts)
इस दिन मांसाहार और शराब का सेवन बिल्कुल न करें।
किसी से झगड़ा या विवाद करने से बचें।
झूठ बोलना, गुस्सा करना और नकारात्मक सोच रखना अशुभ माना जाता है।
पूजा स्थान और घर को गंदा न रखें।
व्रत के दौरान लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
आध्यात्मिक दृष्टि से महत्व
तीसरे नवरात्र का संबंध शरीर के मणिपुर चक्र से जोड़ा जाता है। यह चक्र आत्मबल, ऊर्जा और आत्मविश्वास का केंद्र माना जाता है। जब यह चक्र संतुलित होता है, तो व्यक्ति अपने जीवन में बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होता है और मानसिक रूप से मजबूत बनता है।
मां चंद्रघंटा की पूजा करने से इस चक्र को जाग्रत करने में मदद मिलती है, जिससे जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता आती है।
कुछ उपयोगी सुझाव
अगर आप पूरा व्रत नहीं रख सकते, तो फलाहार करके भी पूजा कर सकते हैं।
शाम के समय परिवार के साथ मिलकर भजन-कीर्तन करें।
पूजा करते समय मन को शांत और एकाग्र रखें।
किसी भी कार्य को श्रद्धा और विश्वास के साथ करें, यही सबसे महत्वपूर्ण है।
नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर होता है। अगर इस दिन आप नियमों का पालन करते हुए पूजा करते हैं, तो न केवल आपको मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि जीवन की परेशानियां भी धीरे-धीरे कम होने लगेंगी।
सच्ची भक्ति, सकारात्मक सोच और अच्छे कर्म ही इस दिन का असली संदेश हैं।
Navratri Day 3 is dedicated to Maa Chandraghanta, a powerful form of Goddess Durga known for courage and peace. Devotees perform Chandraghanta puja vidhi, chant mantras, and follow Navratri rituals to gain spiritual strength and remove negativity. This day is highly significant for those observing Navratri fasting, as it focuses on discipline, devotion, and positivity. Understanding the proper do’s and don’ts of Navratri Day 3 helps devotees perform the पूजा correctly and receive divine blessings.


















