AIN NEWS 1: संसद के बजट सत्र की शुरुआत से ठीक पहले आयोजित हुई सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बैठक का उद्देश्य जहां आगामी सत्र को सुचारू रूप से चलाने पर सहमति बनाना था, वहीं यह बैठक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और असंतोष का मंच बनकर रह गई। विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह जानबूझकर अहम विधायी कार्यों और नीतिगत फैसलों को छुपा रही है, ताकि संसद में खुली बहस से बचा जा सके।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने बजट सत्र से पहले न तो एजेंडा स्पष्ट किया और न ही यह बताया कि किन महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश किया जाना है। इसे लेकर विपक्षी नेताओं ने सरकार की रणनीति को ‘सस्पेंस एंड स्टन’ करार दिया — यानी आखिरी वक्त तक जानकारी छुपाना और अचानक फैसले थोप देना।
बैठक में क्यों बढ़ा तनाव
सूत्रों के अनुसार, बैठक की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण रहा। विपक्षी दलों का कहना था कि सरकार संसद को केवल औपचारिकता के तौर पर इस्तेमाल कर रही है, जबकि असल फैसले बिना चर्चा के लिए जा रहे हैं। कई नेताओं ने यह भी कहा कि बीते सत्रों में विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों और मुद्दों को या तो नजरअंदाज किया गया या चर्चा की अनुमति ही नहीं दी गई।
विपक्षी सांसदों ने यह मुद्दा भी उठाया कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यदि वहां बहस को सीमित किया जाएगा, तो जनता की आवाज दबेगी।
कौन-कौन से मुद्दे उठाए गए
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने साफ संकेत दे दिए कि बजट सत्र के दौरान वह सरकार को कई मोर्चों पर घेरने की तैयारी में है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
विदेश नीति: विपक्ष ने हालिया वैश्विक घटनाक्रमों और भारत की कूटनीतिक भूमिका पर चर्चा की मांग की।
मनरेगा: ग्रामीण इलाकों में रोजगार संकट, भुगतान में देरी और बजट कटौती के आरोपों को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया।
ओडिशा के किसान: फसल समर्थन मूल्य, नुकसान की भरपाई और कृषि नीतियों को लेकर विशेष चर्चा की मांग उठी।
महंगाई और बेरोजगारी: आम जनता से जुड़े इन मुद्दों को भी विपक्ष ने सत्र के केंद्र में रखने की रणनीति बनाई है।
विपक्षी दलों का कहना है कि ये मुद्दे केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनता के जीवन से जुड़े हुए हैं और इन पर खुली बहस जरूरी है।
‘सस्पेंस एंड स्टन’ रणनीति पर क्या बोला विपक्ष
बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार संसद को चौंकाने की नीति पर काम कर रही है। उनका कहना था कि आखिरी समय में विधेयक लाकर, सीमित समय में पास कराने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
एक विपक्षी नेता ने कहा,
“सरकार पहले सस्पेंस बनाती है और फिर अचानक ऐसे फैसले ले आती है, जिन पर चर्चा का मौका ही नहीं मिलता। यह संसद की गरिमा के खिलाफ है।”
सरकार का पक्ष
हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया। सत्ता पक्ष के नेताओं ने कहा कि बजट सत्र के दौरान सभी जरूरी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है और विपक्ष बेवजह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
सरकारी पक्ष का तर्क है कि विधायी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार चलती है और विपक्ष को संसद के भीतर मुद्दे उठाने का पूरा अवसर मिलेगा। साथ ही यह भी कहा गया कि सर्वदलीय बैठक का मकसद सहयोग और सहमति बनाना है, न कि राजनीतिक टकराव।
बजट सत्र पर मंडराता टकराव का साया
सर्वदलीय बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि आगामी बजट सत्र हंगामेदार रहने वाला है। विपक्ष ने जहां सरकार को आक्रामक तरीके से घेरने का मन बना लिया है, वहीं सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार दिख रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद की कमी रही, तो संसद का समय हंगामे की भेंट चढ़ सकता है, जिसका सीधा नुकसान विधायी कार्य और जनता से जुड़े मुद्दों को होगा।
लोकतंत्र के लिए क्यों अहम है यह सत्र
बजट सत्र को संसद का सबसे महत्वपूर्ण सत्र माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान सरकार अपनी आर्थिक प्राथमिकताएं देश के सामने रखती है। ऐसे में इस सत्र का सुचारू रूप से चलना न केवल सरकार, बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
विपक्ष की मांग है कि सरकार पारदर्शिता बरते, समय रहते विधायी एजेंडा साझा करे और सभी मुद्दों पर खुली चर्चा की अनुमति दे। अब देखना होगा कि बजट सत्र की कार्यवाही सहयोग के रास्ते पर चलती है या टकराव के।
Ahead of the Budget Session, the all party meeting witnessed strong opposition protests as leaders accused the government of adopting a “suspense and stun” strategy to hide its legislative agenda. The opposition raised concerns over key issues such as foreign policy, MGNREGA, farmers’ problems in Odisha, inflation and unemployment, demanding detailed discussions in Parliament. The heated exchange has indicated a stormy Budget Session with intense political confrontation expected.


















