Powered by : PIDIT KO NYAY ( RNI - UPBIL/25/A1914)

spot_imgspot_img

नए साल के 15 दिनों में दिल्ली से 800 से ज्यादा लोग लापता, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित!

spot_img

Date:

AIN NEWS 1: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर चिंता में है। साल 2026 की शुरुआत होते ही सामने आए लापता लोगों के आंकड़े डराने वाले हैं। दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, नए साल के पहले 15 दिनों में ही 800 से अधिक लोग लापता हो चुके हैं। इन मामलों में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या महिलाओं, लड़कियों और बच्चों की है।

यह आंकड़े केवल नंबर नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सैकड़ों परिवारों की बेचैनी, अनिश्चितता और डर छिपा हुआ है। हर लापता व्यक्ति के साथ एक घर की उम्मीदें, सपने और भरोसा भी कहीं खो जाता है।

📊 क्या कहते हैं पुलिस के आंकड़े?

दिल्ली पुलिस के अनुसार, 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 के बीच कुल 807 लोगों के लापता होने की शिकायतें दर्ज की गईं।

इनमें से:

509 मामले महिलाओं और लड़कियों के हैं

298 पुरुष भी लापता हुए

कुल लापता लोगों में 137 बच्चे शामिल हैं

पुलिस अब तक 235 लोगों को खोजने में सफल रही है, लेकिन 572 लोगों का अभी भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। यानी हर दिन औसतन 30 से ज्यादा लोग दिल्ली से लापता हो रहे हैं।

👧👩 महिलाएं और बच्चे क्यों ज्यादा लापता हो रहे हैं?

आंकड़े साफ बताते हैं कि लापता होने वालों में महिलाओं और बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हो सकते हैं।

कई मामलों में किशोर लड़कियां पारिवारिक तनाव, दबाव या भावनात्मक कारणों से घर छोड़ देती हैं। कुछ मामलों में प्रेम संबंध, ऑनलाइन संपर्क या सोशल मीडिया के जरिए बने रिश्ते भी वजह बनते हैं। वहीं बच्चों के मामलों में बहला-फुसलाकर ले जाना, गुम हो जाना या गलत संगत जैसी आशंकाएं भी सामने आती हैं।

हालांकि, हर मामला ऐसा नहीं होता। कुछ मामलों में गंभीर अपराध, मानव तस्करी या शोषण की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

🚔 पुलिस की कार्रवाई और सीमाएं

दिल्ली पुलिस का कहना है कि हर लापता व्यक्ति की शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाती है और जांच शुरू की जाती है। कई मामलों में तकनीकी निगरानी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया की मदद ली जाती है।

इसके बावजूद, बड़ी संख्या में मामलों का अनसुलझा रहना पुलिस की कार्यप्रणाली और संसाधनों पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी बड़ी आबादी वाले शहर में पुलिस पर दबाव बहुत अधिक है, लेकिन लापता मामलों के लिए अलग और मजबूत तंत्र की जरूरत है।

😟 परिवारों की पीड़ा: हर दिन एक नई उम्मीद

लापता लोगों के परिजनों के लिए हर दिन किसी परीक्षा से कम नहीं होता। कोई थाने के चक्कर लगा रहा है, कोई सोशल मीडिया पर अपने बच्चे या बहन की तस्वीरें साझा कर रहा है, तो कोई हर अनजान फोन कॉल से उम्मीद बांध लेता है।

एक लापता लड़की की मां ने बताया,

“हमें बस इतना पता चले कि वह सुरक्षित है। चाहे जहां हो, बस जिंदा हो।”

ऐसी कहानियां यह साबित करती हैं कि लापता होना सिर्फ एक पुलिस केस नहीं, बल्कि एक भावनात्मक त्रासदी है।

📱 सोशल मीडिया और ऑनलाइन खतरे

पिछले कुछ वर्षों में यह भी देखा गया है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बने रिश्ते कई बार खतरे का कारण बन जाते हैं। फर्जी पहचान, झूठे वादे और भावनात्मक जाल में फंसकर कई युवा गलत फैसले ले लेते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ उनसे खुलकर बातचीत करनी चाहिए, ताकि वे किसी भी परेशानी को साझा कर सकें।

क्या हर लापता मामला अपराध है?

यह समझना जरूरी है कि हर “लापता” मामला अपहरण या अपराध से जुड़ा हो, यह जरूरी नहीं। कई लोग अपनी मर्जी से घर छोड़ते हैं, कुछ काम या निजी कारणों से बिना बताए चले जाते हैं।

लेकिन जब सैकड़ों मामले लंबे समय तक अनसुलझे रहते हैं, तो यह चिंता का विषय जरूर बन जाता है। खासतौर पर तब, जब लापता लोगों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की हो।

🔍 समाधान क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, लापता मामलों से निपटने के लिए:

तेज और तकनीकी रूप से मजबूत जांच

राज्यों के बीच बेहतर समन्वय

बच्चों और महिलाओं के लिए अलग ट्रैकिंग सिस्टम

जागरूकता अभियान

और परिवारों के लिए काउंसलिंग सपोर्ट

जैसे कदम जरूरी हैं।

दिल्ली जैसे महानगर में इतने बड़े पैमाने पर लोगों का लापता होना एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज, परिवार और सिस्टम—तीनों की जिम्मेदारी है।

जब तक हर लापता व्यक्ति सुरक्षित अपने घर नहीं लौटता, तब तक ये आंकड़े सिर्फ खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी बने रहेंगे।

More than 800 people missing in Delhi during the first 15 days of 2026 has raised serious concerns about women safety and missing children in the national capital. According to Delhi police data, women and minors form a major portion of missing persons cases, highlighting the urgent need for stronger tracking systems, public awareness, and effective law enforcement to address the growing issue of missing people in Delhi.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
haze
22.1 ° C
22.1 °
22.1 °
46 %
2.1kmh
0 %
Wed
22 °
Thu
26 °
Fri
26 °
Sat
28 °
Sun
29 °
Video thumbnail
‘बार्डर 2’ देखकर भावुक हुईं अभिनेत्री श्वेता चौहान
02:43
Video thumbnail
Former Uttar Pradesh minister Madan Chauhan escapes assassination attempt in Hapur
06:06
Video thumbnail
मेरठ: धागा कारोबारी से 20 लाख वसूली केस में फंसे 2 दरोगा, 15 लाख
01:50
Video thumbnail
Yogi Adutyanath : क़यामत तक बाबरी मस्जिद नहीं बन पायेगी.बाबरी का सपना कभी पूरा नहीं होने देंगे।
02:42
Video thumbnail
Shadab Jakati FIR News: शादाब जकाती संग रील बनाने वाली चांदनी ने कराई रेप की FIR| Meerut | UP Police
09:58
Video thumbnail
दरगाह विवाद में विधायक बालमुकुंदाचार्य को फोन पर धमकी, मामला गंभीर
01:26
Video thumbnail
Shivam Mishra’s father, KK Mishra, claimed that his son was not driving the luxury car
02:07
Video thumbnail
सदन में Sonia Gandhi के सामने टोका-टाकी कर रहे थे Digvijay, भड़के Amit Shah ने लताड़ भीषण लगा दी!
08:58
Video thumbnail
Hindu Sammelan RSS : हिंदू सम्मेलन में ‘लव जिहाद’ पर सीधा वार, Ghaziabad बना केसरिया सागर
24:42
Video thumbnail
'तेजस्वी यादव नशे की हालत में सदन पहुंचे' BJP ने आरोप लगाया
02:02

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related

‘बार्डर 2’ देखकर भावुक हुईं अभिनेत्री श्वेता चौहान—कहा: यह फिल्म मनोरंजन नहीं, देशभक्ति का जीवंत इतिहास है

गाजियाबाद: देशभक्ति से ओत–प्रोत बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बार्डर 2’ ने...