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पहलगाम वीरान: आतंकी हमले की बरसी पर सन्नाटा, सैलानियों की संख्या शून्य के करीब!

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AIN NEWS 1: पहलगाम, जो कभी कश्मीर का सबसे प्रसिद्ध और व्यस्त पर्यटक स्थल हुआ करता था, आज वीरानी और सन्नाटे का प्रतीक बन गया है। अप्रैल महीने की यह तारीख, स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए गहरे घावों की याद लेकर आती है। आज ही के दिन, कुछ साल पहले, इस्लामी आतंकियों ने एक भयावह घटना को अंजाम दिया था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।

इस हमले की बरसी पर पहलगाम में अब सन्नाटा पसरा है। आमतौर पर जहां अप्रैल में बड़ी संख्या में सैलानी घाटी की खूबसूरती का आनंद लेने आते थे, इस बार पर्यटकों की संख्या नगण्य है। होटल खाली पड़े हैं, टैक्सी स्टैंड सुनसान हैं, और बाजारों में भी रौनक गायब है।

क्या हुआ था उस दिन?

उस भयानक दिन की शुरुआत एक सामान्य सुबह की तरह हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते आतंक का मंजर पूरे पहलगाम में फैल गया। आतंकियों ने अचानक हमला बोल दिया और निहत्थे नागरिकों पर गोलियों की बौछार कर दी। कुछ लोग घटनास्थल पर ही मारे गए, जबकि कुछ ने अस्पतालों में दम तोड़ दिया।

इस हमले के बाद स्थानीय लोगों में गहरा डर बैठ गया। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनकी पीड़ा आज भी वैसी की वैसी है। इस घटना ने पहलगाम की छवि को भी गहरा नुकसान पहुँचाया है।

पर्यटन पर असर

पहलगाम हमेशा से ही एक लोकप्रिय हिल स्टेशन रहा है, जहां देश-विदेश से पर्यटक गर्मियों में उमड़ते हैं। लेकिन इस आतंकी हमले के बाद से स्थिति लगातार बिगड़ती गई। स्थानीय होटल मालिकों का कहना है कि पहले जहां अप्रैल-मई के महीने में लगभग 80-90% ऑक्युपेंसी रहती थी, अब वह 10% से भी नीचे आ चुकी है।

ट्रैवल एजेंसियों ने भी पहलगाम को अपने पैकेज से बाहर करना शुरू कर दिया है। ऐसे में स्थानीय व्यापारियों, गाइड्स, टैक्सी चालकों और होटल उद्योग से जुड़े लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और अब पहलगाम पूरी तरह सुरक्षित है। सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें नियमित गश्त करती हैं। बावजूद इसके, पर्यटकों का विश्वास फिर से हासिल करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

स्थानीय लोग भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार पहलगाम के पर्यटन को दोबारा से जीवित करने के लिए कोई ठोस योजना बनाएगी। फिलहाल, यहां का वातावरण भय और शोक से घिरा हुआ है।

स्थानीयों की पीड़ा

घटना के पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें आज तक न तो न्याय मिला है और न ही सरकार की ओर से समुचित सहायता। कई परिवार आज भी मानसिक और आर्थिक रूप से उस सदमे से बाहर नहीं निकल पाए हैं।

एक स्थानीय निवासी गुलाम रसूल बताते हैं, “हमने अपने भाई को खोया, उस दिन के बाद हमारा जीवन ही बदल गया। पहलगाम अब पहले जैसा नहीं रहा।”

क्या फिर से लौटेगा पहलगाम का गौरव?

यह सवाल आज भी हर किसी के मन में है। पहलगाम की प्राकृतिक सुंदरता आज भी वैसी ही है, लेकिन भय का साया उसे ढक चुका है। अगर सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर पर्यटकों का भरोसा दोबारा जीतने की दिशा में प्रयास करें, तो एक बार फिर यह क्षेत्र गुलजार हो सकता है।

Pahalgam, once a bustling tourist hotspot in Kashmir, now stands empty as the anniversary of a deadly Islamic terror attack that killed 26 innocent people casts a shadow over the region. The April massacre has severely affected Kashmir tourism, with Pahalgam receiving nearly zero visitors this year. Security forces have increased their presence, but tourists remain wary, causing a sharp decline in travel and hotel occupancy. This tragic event continues to impact the local economy and the perception of safety in Kashmir, making it crucial to rebuild trust and restore peace.

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