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गाजा प्लान पर पाकिस्तान का यू-टर्न! ट्रंप को किया था 100% सपोर्ट का वादा, अब जनता के दबाव में पलटा फैसला

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AIN NEWS 1 | अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गाज़ा को लेकर हाल ही में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति बहाल करने के लिए एक 20-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश किया था। पाकिस्तान ने शुरू में इस प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया और ट्रंप ने भी दावा किया कि पाकिस्तान इस योजना को 100% समर्थन देगा।

लेकिन अब हालात बदलते नज़र आ रहे हैं। पाकिस्तान की जनता ने इस फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की सरकार इस मुद्दे पर पलटी खाती दिखाई दे रही है।

ट्रंप का दावा – पाकिस्तान पूरी तरह साथ है

डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा शांति प्रस्ताव पेश करते हुए कहा था कि पाकिस्तान इस योजना का दृढ़ समर्थक है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस प्रक्रिया में बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ट्रंप ने दोनों नेताओं को उन अंतरराष्ट्रीय नेताओं की सूची में शामिल किया, जिन्होंने गाज़ा संकट को सुलझाने के लिए सक्रियता दिखाई।

ट्रंप ने यहां तक कहा कि “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख शुरू से ही हमारे साथ खड़े हैं, यह वाकई अविश्वसनीय है।”

जनता के विरोध के बाद बदला पाकिस्तान का रुख

शुरुआत में ट्रंप की योजना को सही ठहराने वाले शहबाज शरीफ अब अपनी ही जनता के दबाव में घिर गए हैं। पाकिस्तान के आम लोग गाज़ा के मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन करने को लेकर नाराज़ हैं। उनका मानना है कि इस तरह का समर्थन फिलिस्तीन की असल आवाज़ को कमजोर कर देगा।

जनता के बढ़ते विरोध के बाद सरकार का रुख बदलने लगा और अब यह साफ दिख रहा है कि पाकिस्तान ट्रंप के प्रस्ताव से धीरे-धीरे पीछे हट रहा है।

विदेश मंत्री इशाक डार का बयान

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने साफ कहा कि ट्रंप का 20-सूत्रीय शांति प्रस्ताव असल में अमेरिका का दस्तावेज है, न कि पाकिस्तान का। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हमने जो सुझाव भेजे थे, वे इस दस्तावेज में शामिल नहीं हैं। जिन बातों को हमने जोड़ा था, अगर वे शामिल नहीं की गईं, तो हमें इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।”

इशाक डार ने संकेत दिया कि पाकिस्तान इस प्रस्ताव का हिस्सा तभी बनेगा, जब उसकी शर्तों और चिंताओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

गाज़ा पर ट्रंप की योजना क्या है?

ट्रंप की इस योजना में कुछ बड़े बिंदु शामिल हैं—

  1. गाज़ा में एक स्वतंत्र और तकनीकी विशेषज्ञों (टेक्नोक्रेट्स) द्वारा संचालित नई फिलिस्तीनी सरकार की स्थापना।

  2. इस सरकार की निगरानी एक अंतरराष्ट्रीय निकाय करेगा, जिसमें अधिकतर फिलिस्तीनी लोग ही होंगे।

  3. गाज़ा में स्थायी युद्धविराम और क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करना।

  4. सुरक्षा और मानवीय सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना।

ट्रंप का मानना है कि अगर इस योजना पर अमल हुआ, तो गाज़ा में लंबे समय से चल रहा संघर्ष खत्म हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ट्रंप की इस योजना को कई देशों ने सराहा है। भारत, चीन, रूस समेत आठ अरब और मुस्लिम बहुल देशों ने इस शांति प्रस्ताव का समर्थन किया। लेकिन पाकिस्तान का यू-टर्न इस पूरे समीकरण को बदल सकता है।

जहां भारत और चीन जैसे बड़े देश प्रस्ताव के समर्थन में खड़े हैं, वहीं पाकिस्तान का पीछे हटना इस योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है।

गाज़ा में पाकिस्तानी सैनिक भेजने पर सवाल

गाज़ा में पाकिस्तानी सैनिक भेजने की संभावना पर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व को करना होगा। यानी सरकार इस मुद्दे पर अभी साफ स्थिति में नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान सैनिक भेजने का बड़ा जोखिम नहीं उठाएगा, क्योंकि इससे उसकी आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर गहरा असर पड़ सकता है।

शहबाज और मुनीर के लिए मुश्किलें

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने शुरू में अमेरिका के साथ खड़े होकर ट्रंप को समर्थन दिया था। लेकिन जनता का बढ़ता दबाव और विपक्षी दलों की आलोचना अब उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं।

अगर पाकिस्तान पूरी तरह से ट्रंप की योजना से पीछे हटता है, तो यह अमेरिका के साथ रिश्तों को ठंडा कर सकता है। वहीं अगर वह योजना का हिस्सा बना रहता है, तो उसे अपनी जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।

गाज़ा शांति योजना पर पाकिस्तान का यू-टर्न अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मोड़ है। एक ओर ट्रंप का दावा है कि पाकिस्तान उनके साथ है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसे अमेरिका का दस्तावेज बता रहे हैं।

इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान इस समय जनता की नाराज़गी और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच फंसा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान किस ओर झुकता है—जनता की भावनाओं की तरफ या अमेरिका की कूटनीतिक मजबूती की तरफ।

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