AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित हाईकोर्ट परिसर उस वक्त विवाद का केंद्र बन गया, जब गो तस्करी के एक मामले में आरोपी महिला को पकड़ने के लिए पुलिसकर्मी सीधे एक अधिवक्ता के चैंबर में जा घुसे। इस कार्रवाई को लेकर वकीलों में भारी आक्रोश फैल गया और देखते ही देखते हाईकोर्ट परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देनी पड़ी और अंततः दूसरे थाने की पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग ने भी सख्त रुख अपनाया। मामले में शामिल दो दरोगा और एक सिपाही के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और तीनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, यह मामला 14 जनवरी को काकोरी थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। अमीनाबाद निवासी मो. वासिफ के खिलाफ उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने आमिना खातून नाम की महिला को भी इस मामले में आरोपी बनाया।
सोमवार दोपहर को काकोरी थाने में तैनात दरोगा उस्मान खान, लखन सिंह और सिपाही पुष्पेंद्र सिंह को सूचना मिली कि आरोपी महिला आमिना खातून हाईकोर्ट परिसर में अपने रिश्तेदार और अधिवक्ता गुफरान सिद्दीकी से मिलने पहुंची है।
सूचना मिलते ही तीनों पुलिसकर्मी हाईकोर्ट पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने परिसर में प्रवेश के लिए यह कहकर पर्ची बनवाई कि उन्हें एडवोकेट जनरल या सीएससी कार्यालय जाना है।
वकील के चैंबर में पुलिस की एंट्री
हाईकोर्ट परिसर में दाखिल होने के बाद तीनों पुलिसकर्मी सीधे एडवोकेट जनरल या सीएससी कार्यालय न जाकर अधिवक्ता गुफरान सिद्दीकी के चैंबर में पहुंच गए। वहीं पर आमिना खातून मौजूद थी।
जैसे ही पुलिसकर्मियों ने महिला को पकड़ने की कोशिश की, वहां मौजूद वकीलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते अन्य अधिवक्ता भी मौके पर जमा हो गए और पुलिसकर्मियों को चारों ओर से घेर लिया।
वकीलों का कहना था कि हाईकोर्ट परिसर में बिना अनुमति इस तरह की दबिश न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह न्यायालय की गरिमा के भी खिलाफ है।
हाईकोर्ट परिसर में हंगामा
पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज़ वकीलों ने जमकर हंगामा किया। माहौल तनावपूर्ण हो गया और स्थिति हाथ से निकलती नजर आने लगी। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई।
कुछ ही देर में विभूतिखंड थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हालात को संभाला। तीनों पुलिसकर्मियों को वकीलों के घेरे से बाहर निकाला गया और स्थिति को शांत किया गया।
पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर
इस पूरे मामले को लेकर अधिवक्ता सज्जाद हुसैन और हाईकोर्ट के निबंधक (सुरक्षा) शैलेंद्र कुमार ने गंभीर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश किया और एक अधिवक्ता के चैंबर में आपराधिक अतिचार किया।
शिकायत के आधार पर दरोगा उस्मान खान, दरोगा लखन सिंह और सिपाही पुष्पेंद्र सिंह के खिलाफ झूठी सूचना देने, धोखाधड़ी, आपराधिक अतिचार और धमकी देने जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।
तीनों पुलिसकर्मी निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग की ओर से यह साफ किया गया है कि हाईकोर्ट जैसे संवेदनशील परिसर में नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश के नियम
कानूनी जानकारों के मुताबिक, हाईकोर्ट परिसर में पुलिस का प्रवेश पूरी तरह से नियमों के तहत होता है। किसी भी तरह की तलाशी, गिरफ्तारी या दबिश के लिए संबंधित अदालत के रजिस्ट्रार या न्यायिक अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
हाईकोर्ट एक संवेदनशील न्यायिक संस्थान है, जहां आम नागरिकों के साथ-साथ न्यायाधीश और अधिवक्ता भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में बिना अनुमति की गई कोई भी कार्रवाई न केवल अवैध मानी जाती है, बल्कि न्यायालय की स्वतंत्रता और गरिमा पर भी सवाल खड़े करती है।
वकीलों में नाराज़गी
इस घटना के बाद अधिवक्ताओं में गहरी नाराज़गी देखने को मिली। वकीलों का कहना है कि अगर पुलिस को किसी आरोपी की गिरफ्तारी करनी थी, तो उसे कानून के दायरे में रहकर और अदालत की अनुमति लेकर कार्रवाई करनी चाहिए थी।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि भविष्य में अगर इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं, तो वे और कड़ा विरोध करेंगे।
An incident inside the Allahabad High Court premises triggered major controversy after Uttar Pradesh police officials entered a lawyer’s chamber to arrest a woman accused in a cow smuggling case. The unauthorized police raid led to strong protests by advocates, resulting in chaos within the court complex. Following the incident, an FIR was registered against two police inspectors and one constable, and all three were suspended for violating High Court security protocols. The case has raised serious questions about police conduct and judicial premises security in Uttar Pradesh.


















