AIN NEWS 1 | प्रयागराज शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हर महीने चार हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। यह समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि नगर निगम और प्रशासन ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। पहली बार कोई कुत्ता इंसान को काटता है तो उस पर निगरानी रखी जाएगी और माइक्रोचिप लगाई जाएगी, लेकिन अगर वही कुत्ता दोबारा हमला करता है तो उसके लिए ‘उम्रकैद’ जैसी सजा तय की गई है।
प्रशासन का नया फैसला
प्रयागराज प्रशासन ने डॉग बाइट (Dog Bite) की घटनाओं को रोकने के लिए नया नियम लागू किया है।
पहली बार काटने पर कार्रवाई: जिस कुत्ते ने किसी इंसान को पहली बार काटा, उसे तुरंत पकड़कर 10 दिन तक एबीसी (Animal Birth Control) सेंटर में रखा जाएगा। इस दौरान डॉक्टर उसकी सेहत और व्यवहार की जांच करेंगे। खासकर यह देखा जाएगा कि कहीं उसे रेबीज या अन्य संक्रामक बीमारी तो नहीं है। इसके बाद उसकी पहचान के लिए माइक्रोचिप लगाई जाएगी और फिर उसी इलाके में वापस छोड़ा जाएगा।
दोबारा काटने पर कार्रवाई: यदि वही कुत्ता दोबारा किसी इंसान को काटता है तो उसे दोबारा सड़क पर नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसे कुत्तों को जीवनभर के लिए शेल्टर हाउस (ABC सेंटर का आश्रय स्थल) में रखा जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह नियम लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
लोगों का कहना है कि अब शायद उन्हें राहत मिलेगी।
रमेश गुप्ता (व्यापारी, प्रयागराज): “हमारी गली में रोज कई आवारा कुत्ते मंडराते रहते हैं। पिछले महीने मेरे बेटे को भी कुत्ते ने काटा था। यह नियम अच्छा है, कम से कम डर थोड़ा कम होगा।”
सीमा मिश्रा (गृहणी, अल्फ्रेड पार्क क्षेत्र): “सिर्फ पकड़कर रखना काफी नहीं है। इन कुत्तों को समय-समय पर टीका भी लगना चाहिए। तभी असली फायदा होगा।”
विशेषज्ञों की राय
डॉक्टर और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स इस फैसले को सही दिशा में उठाया गया कदम मान रहे हैं।
डॉ. अनुज पांडेय (सीनियर पशु चिकित्सक): “माइक्रोचिप तकनीक से हर कुत्ते की पहचान करना आसान होगा। बार-बार हमला करने वाले कुत्तों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। इससे इंसान और जानवर दोनों सुरक्षित रहेंगे।”
डॉ. कविता श्रीवास्तव (पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट): “रेबीज अब भी भारत में मौतों का एक बड़ा कारण है। प्रयागराज का यह कदम पब्लिक हेल्थ की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। सही तरीके से लागू हुआ तो डॉग बाइट के मामलों में कमी जरूर आएगी।”
प्रशासन की सफाई
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया:
“हर महीने हजारों लोग कुत्तों के काटने से अस्पताल पहुंचते हैं। अब तक हमारे पास पहचान का कोई स्थायी तरीका नहीं था। माइक्रोचिप लगने से यह समस्या हल हो जाएगी। हां, हमें शेल्टर हाउस की क्षमता बढ़ानी होगी क्योंकि शहर में करीब 50 हजार आवारा कुत्ते मौजूद हैं।”
चुनौतियाँ सामने
हालांकि यह कदम सराहनीय है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा।
प्रयागराज जैसे बड़े शहर में हजारों कुत्ते हैं।
हर कुत्ते को पकड़ना, उसकी जांच करना और माइक्रोचिप लगाना कठिन होगा।
शेल्टर हाउस की क्षमता अभी सीमित है।
नियमित टीकाकरण और नसबंदी अभियान चलाना भी आवश्यक होगा।
पशु प्रेमियों का पक्ष
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है।
रीना वर्मा (एनजीओ वर्कर): “कुत्तों को उम्रकैद देना सही समाधान नहीं है। असली समस्या है उनकी बढ़ती संख्या और समय पर नसबंदी व टीकाकरण न होना। अगर ये सब पहले किया जाता, तो हालात बिगड़ते ही नहीं।”
आगे की योजना
प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में बड़े पैमाने पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही, नगर निगम ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी इलाके में आक्रामक कुत्ते हों तो तुरंत सूचना दें।
प्रयागराज प्रशासन का यह फैसला वाकई ऐतिहासिक है। माइक्रोचिप और सख्त नियमों से न केवल लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि आवारा कुत्तों पर नियंत्रण भी आसान होगा। हालांकि, चुनौतियाँ कम नहीं हैं – बड़ी संख्या, सीमित संसाधन और विरोधी आवाज़ें। अब देखना यह है कि यह योजना जमीनी स्तर पर कितनी सफल हो पाती है।



















