AIN NEWS 1 | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। इसी बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि कोई देश स्थायी रूप से मित्र या दुश्मन नहीं होता। उनके अनुसार, हर स्थिति में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने यह बात NDTV Defence Summit 2025 में कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत को अपने राष्ट्रहित और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया तेजी से बदल रही है और हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चाहे वैश्विक महामारी हो, आतंकवाद या क्षेत्रीय संघर्ष, यह शताब्दी अब तक की सबसे अस्थिर और चुनौतीपूर्ण साबित हुई है।
आत्मनिर्भरता: विकल्प नहीं, आवश्यकता
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज आत्मनिर्भरता केवल लाभ नहीं बल्कि आवश्यकता बन गई है। पहले इसे विशेषाधिकार माना जाता था, लेकिन अब यह देश की प्रगति और अस्तित्व के लिए अनिवार्य हो गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत किसी को दुश्मन के रूप में नहीं देखता, लेकिन देश के किसानों और उद्यमियों के हित सबसे महत्वपूर्ण हैं। बदलती वैश्विक राजनीति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रक्षा क्षेत्र में बाहरी निर्भरता अब विकल्प नहीं है।
राजनाथ सिंह ने भारत के रक्षा क्षेत्र में हुए बदलाव का भी जिक्र किया। 2014 में देश का रक्षा निर्यात मात्र ₹700 करोड़ से भी कम था, जबकि आज यह लगभग ₹24,000 करोड़ तक पहुंच गया है। यह स्पष्ट करता है कि भारत अब सिर्फ रक्षा का खरीदार नहीं, बल्कि उत्पादक और निर्यातक भी बन चुका है।
स्वदेशी उपकरणों की ताकत
राजनाथ सिंह ने सेना की क्षमता और स्वदेशी उपकरणों पर जोर देते हुए कहा कि हमारे बलों ने लक्ष्यों पर सटीक हमले किए हैं। यह दिखाता है कि किसी भी मिशन की सफलता के लिए लंबी तैयारी, रणनीति और समन्वय अनिवार्य हैं।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए बताया कि यह कोई छोटी लड़ाई नहीं थी। इसके पीछे वर्षों की रणनीतिक तैयारी और रक्षा तैयारियों का लंबा इतिहास रहा। मंत्री ने कहा, “जैसे एक खिलाड़ी दौड़ में कुछ सेकंड में जीत हासिल करता है, लेकिन इसके पीछे महीनों और सालों की मेहनत होती है, उसी तरह हमारे बलों ने वर्षों की तैयारी, मेहनत और स्वदेशी उपकरणों के साथ चुने हुए लक्ष्यों पर प्रभावी कार्रवाई की।”
बदलती भू-राजनीति और राष्ट्रीय हित
राजनाथ सिंह ने यह भी बताया कि आज भू-राजनीति तेजी से बदल रही है। ऐसे में किसी भी देश के साथ रिश्ते स्थायी नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, “कोई देश हमेशा दोस्त या दुश्मन नहीं रह सकता। हमें अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के हिसाब से रणनीति बनानी होगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत रक्षा, व्यापार और कृषि में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। भारत अब न केवल आधुनिक हथियारों और उपकरणों का निर्माण कर रहा है, बल्कि उन्हें निर्यात भी कर रहा है। यह देश के लिए आर्थिक और रणनीतिक मजबूती का संकेत है।
वैश्विक चुनौतियों का सामना
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया में हर दिन नई चुनौतियां आती हैं। चाहे वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टैरिफ युद्ध हो, क्षेत्रीय संघर्ष या सैन्य तनाव, इन सभी के लिए सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सबसे जरूरी हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि स्वदेशी उपकरण और तकनीक न केवल सेना की ताकत बढ़ाते हैं, बल्कि इसे किसानों, उद्योगपतियों और आम नागरिकों के हित में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। आत्मनिर्भरता केवल रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के हर क्षेत्र में मजबूती लाती है।
राजनाथ सिंह के बयान से यह साफ है कि भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में अपने राष्ट्रहित और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। चाहे अमेरिका का टैरिफ हो या कोई और वैश्विक चुनौती, भारत हमेशा स्वदेशी उत्पादन, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक तैयारी पर भरोसा करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मिशन या ऑपरेशन की सफलता केवल कुछ घंटों या दिनों की मेहनत नहीं है। इसके पीछे सालों की योजना, रणनीति, तैयारी और समन्वय होता है। यही भारत की रक्षा और वैश्विक स्थिति को मजबूत बनाता है।



















