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राज्यसभा चुनाव 2025: बीजेपी ने घोषित किए जम्मू-कश्मीर के तीन उम्मीदवार, गुलाम मोहम्मद मीर भी मैदान में

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AIN NEWS 1 | जम्मू-कश्मीर की राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आखिरकार अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में तीन नाम शामिल हैं: गुलाम मोहम्मद मीर, राकेश महाजन और सतपाल शर्मा। विशेष रूप से ध्यान खींच रहा है कि सूची में एक मुस्लिम नेता गुलाम मोहम्मद मीर को शामिल किया गया है, जो कश्मीर घाटी में पार्टी की पकड़ बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि BJP का यह कदम घाटी में मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। पार्टी ने उम्मीदवारों का चयन करते समय जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक और सामाजिक संरचना को ध्यान में रखा है। जहां गुलाम मोहम्मद मीर कश्मीर घाटी का प्रतिनिधित्व करेंगे, वहीं राकेश महाजन और सतपाल शर्मा जम्मू क्षेत्र की ओर से चुनाव में उतरेंगे।

गुलाम मोहम्मद मीर कौन हैं?

गुलाम मोहम्मद मीर जम्मू-कश्मीर के एक प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक नेता हैं। वह लंबे समय से सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और घाटी में कई विकास परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उनका राज्यसभा उम्मीदवार बनने का चुनाव बीजेपी की नई रणनीति का संकेत देता है।

विश्लेषकों का मानना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद बीजेपी घाटी में अपने कदम मजबूत कर रही है। अब पार्टी का उद्देश्य स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाकर मुस्लिम समुदाय के बीच सकारात्मक माहौल बनाना है। मीर की पहचान एक अनुभवी और भरोसेमंद नेता के रूप में है, जो पार्टी के एजेंडे को घाटी में सही ढंग से लागू कर सकते हैं।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और रणनीति

बीजेपी का यह कदम जम्मू-कश्मीर की सियासत में बदलाव की ओर इशारा करता है। पार्टी ने उम्मीदवारों का चयन करते समय सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया है। कश्मीर से गुलाम मोहम्मद मीर और जम्मू से राकेश महाजन व सतपाल शर्मा को मैदान में उतारकर बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि वह हर समुदाय और क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने के लिए गंभीर है।

विश्लेषकों के अनुसार, यह रणनीति न केवल घाटी में पार्टी की पहुंच बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी BJP को राजनीतिक लाभ दे सकती है।

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि

राज्यसभा चुनाव 2025 के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर 2025 निर्धारित की गई है। सभी राजनीतिक दल इस तिथि तक अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। बीजेपी ने शनिवार को देर रात ही तीन उम्मीदवारों की घोषणा की। इसके साथ ही पार्टी ने अपने सभी 28 विधायकों को श्रीनगर बुलाया, जहां उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल किए जाएंगे।

राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों की सूची जारी करने का यह समय राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने से पहले क्षेत्रीय नेताओं और विधायकों से सलाह-मशविरा भी किया है।

मतदान और चुनाव प्रक्रिया

जम्मू-कश्मीर की इन तीन राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 24 अक्टूबर 2025 को होना है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, अगर किसी सीट पर मुकाबला तय होता है, तो उसी दिन मतगणना भी की जाएगी।

विपक्षी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने पहले ही अपने तीन उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। NC ने कहा है कि वह इन सीटों पर पूरी ताकत से मुकाबला करेगी और विपक्षी एकता बनाए रखेगी। ऐसे में राज्यसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक तनातनी और बढ़ने की संभावना है।

बीजेपी की रणनीति का राजनीतिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी का यह कदम घाटी में स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि मजबूत करने का प्रयास है। गुलाम मोहम्मद मीर जैसे नेता को मैदान में उतारकर पार्टी यह दिखाना चाहती है कि वह सभी समुदायों को महत्व देती है और जम्मू-कश्मीर में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर रही है।

राज्यसभा की ये सीटें केवल राजनीतिक सत्ता का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि इनका क्षेत्रीय विकास, सामाजिक संतुलन और समुदायों के बीच राजनीतिक संवाद पर भी प्रभाव पड़ता है। गुलाम मोहम्मद मीर के उम्मीदवार बनने से पार्टी को घाटी में अपने विकास और नीतिगत एजेंडे को मजबूत तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।

जम्मू-कश्मीर के राज्यसभा चुनाव 2025 में बीजेपी ने तीन उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर अपनी राजनीतिक रणनीति और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखा है। गुलाम मोहम्मद मीर का नाम पार्टी की मुस्लिम समुदाय तक पहुंच बनाने की योजना का प्रतीक है। 24 अक्टूबर को होने वाले मतदान के बाद राजनीतिक माहौल और भी स्पष्ट हो जाएगा कि किस दल ने इस चुनाव में अधिक प्रभावशाली रणनीति अपनाई।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह चुनाव केवल राजनीतिक सीटों के लिए नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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