RSS की नई संरचना: समझिए क्या बदल रहा है और क्यों
AIN NEWS 1: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी आंतरिक संगठनात्मक संरचना में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। यह बदलाव संघ के काम‑काज को और अधिक सरल, सुसंगठित और सामूहिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। संघ की शीर्ष बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में इसपर अंतिम निर्णय लिया जाएगा और इसे 15 मार्च 2026 से लागू किए जाने की संभावित रूपरेखा तैयार है।
इस बदलाव के साथ संघ के पुराने पदनाम और संगठनात्मक शब्दों में परिवर्तन होगा। उदाहरण के तौर पर, अब “प्रांत” की जगह “संभाग” और “क्षेत्र” की जगह “राज्य” शब्द का प्रयोग होगा। साथ ही पदों के नाम भी बदलकर उनके कार्यों के अनुसार नया रूप दिया जाएगा। ऐसे बदलाव संघ के शताब्दी वर्ष में हो रहे हैं ताकि संगठन अपनी जड़ें और अधिक मजबूत कर सके।
पुरानी संरचना से नई संरचना तक — क्या बदल रहा है
संघ की मौजूदा संरचना में “प्रांत” और “क्षेत्र” जैसे शब्द लंबे समय से प्रचलित रहे हैं। ये शब्द संघ के विभाजन, प्रबंधन और कार्य संचालन के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं। लेकिन अब यह महसूस किया गया है कि प्रांत और क्षेत्र शब्द थोड़े सामान्य और अस्पष्ट प्रतीत होते हैं, जबकि “संभाग” और “राज्य” जैसे शब्द संगठन के विस्तार, भौगोलिक पहचान और अनुशासन में अधिक स्पष्टता प्रदान करेंगे।
अब तक किसी प्रांत के अंतर्गत कई क्षेत्र आते थे, और प्रत्येक क्षेत्र का नेतृत्व एक क्षेत्र प्रचारक करता था। वहीं प्रांत का नेतृत्व प्रांत प्रचारक के हाथों में होता था। ऐसे पदों के नाम अब बदले जाएंगे:
प्रांत प्रचारक → संभाग प्रचारक
क्षेत्र प्रचारक → राज्य प्रचारक
इस परिवर्तन के पीछे संघ का उद्देश्य यह है कि स्थानिक इकाइयों को और अधिक स्पष्ट पहचान दी जाए, ताकि संगठन की गतिविधियों और सामूहिक कार्यों को बेहतर तरीके से संरचित किया जा सके।
कानपुर प्रांत का उदाहरण: बदलाव कैसे होगा
अगर हम उदाहरण के रूप में कानपुर प्रांत को लें तो उसकी संरचना में भी बदलाव होगा। पहले कानपुर प्रांत में कई इलाकों का समावेश होता था, जिनमें झाँसी इलाका भी शामिल था। परंतु प्रस्तावित बदलाव के अनुसार इसे दो अलग‑अलग इकाइयों में विभाजित किया जाएगा — एक कानपुर संभाग और दूसरा झाँसी संभाग।
पहले कानपुर प्रांत में तीन क्षेत्र इकाइयाँ थीं — पूर्वी क्षेत्र, पश्चिमी क्षेत्र और उत्तराखंड क्षेत्र। इन सभी को मिलाकर अब एक ही राज्य इकाई बनाए जाने की योजना है। इस नई राज्य इकाई का नेतृत्व एक राज्य प्रचारक करेगा, जो इन तीनों क्षेत्रों की निगरानी एवं मार्गदर्शन करेगा। इससे निर्णय‑लेने और जमीन पर काम को एक ही दिशा में लाना आसान होगा।
इस तरह की संरचना से यह फायदा होगा कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को संगठनात्मक रूप से स्पष्ट रूपरेखा मिलेगी और प्रदेश के भीतर कार्य संचालन का एक स्पष्ट लक्षित दृष्टिकोण तैयार होगा।
प्रतिनिधि सभा की भूमिका और बैठक का महत्व
15 मार्च से लागू प्रस्तावित बदलाव का निर्णय संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में लिया जाएगा। यह सभा 13 मार्च 2026 से हरियाणा में आयोजित होगी और इसे संघ के शीर्ष नेतृत्व द्वारा संचालित किया जाएगा। इस सभा में संघ के विभिन्न प्रांत और क्षेत्र स्तरीय अधिकारियों को बुलाया गया है ताकि संगठन के हर हिस्से से प्रतिनिधि शामिल हो सकें।
कानपुर से भी संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी बैठक में भाग लेने हरियाणा के लिए रवाना हुए हैं। इनमें प्रांत प्रचारक, प्रांत संघ चालक, सह‑प्रांत प्रचारक और अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारी शामिल हैं। संघ की केंद्रीय टीम इस बैठक में विस्तार से समीक्षा करेगी कि क्या बदलाव आवश्यक है, और यदि आवश्यक है, तो उसे कैसे लागू किया जाए।
बैठक में दो दिनों तक सत्र चलेंगे, जिनमें पदाधिकारियों के कार्यों की समीक्षा के साथ साथ स्थानांतरण, पदानुक्रम परिवर्तन और नई जिम्मेदारियों के बारे में भी निर्णय लिया जाएगा। यह बदलाव संघ के लिए एक बड़ी संरचनात्मक तैयारी मानी जा रही है, जिसे कई वर्षों के बाद इतनी व्यापकता से किया जा रहा है।
संरचना बदलाव का उद्देश्य और संभावित प्रभाव
संघ के नेतृत्व का मानना है कि यह बदलाव संघ को और अधिक गतिशील तथा प्रभावी बनाएगा। आधुनिक चुनौतियों और कार्य क्षेत्र के बढ़ते दायरे के अनुसार संघ को अधिक चुस्त और स्पष्ट पहचान बनानी होगी। नए नाम और पदों के उपयोग से कार्यों का वर्गीकरण आसान होगा और पदाधिकारियों के बीच समन्वय में भी सुधार आएगा।
इसके अलावा, संघ और उससे जुड़े संगठनों के बीच तालमेल और प्रभाव को भी इस बदलाव से मजबूती मिलेगी। संघ का यह कदम नई पीढ़ी के स्वयंसेवकों को बेहतर ढंग से जोड़ने और मार्गदर्शन देने की दिशा में भी एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।
भाजपा और संघ के संतुलन में बदलाव की भूमिका
देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी भाजपा भी संघ के सामाजिक‑राजनीतिक ढाँचे से जुड़ी हुई है। भाजपा के अपने संगठनात्मक रूप में बदलाव पहले से ही चल रहे हैं, लेकिन संघ ने अपनी संरचना में बदलाव की प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि भाजपा के जिला इकाइयों के लिए भी नई कार्यकारिणी और पर्यवेक्षकों की सूची तैयार है, लेकिन उसे संघ की बैठक के बाद जारी किया जाएगा, क्योंकि कई पदाधिकारी संघ से जुड़े होने के कारण बैठक में शामिल होंगे। ऐसे में भाजपा और संघ के तालमेल को देखते हुए भी यह बदलाव एक संगठित रूपरेखा तैयार करने की दिशा में कदम के रूप में देखा जा रहा है।
RSS की ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
यह बदलाव संघ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। संघ अपनी शताब्दी वर्ष में इस तरह के संरचनात्मक बदलाव कर रहा है ताकि संगठन अधिक व्यापक, सुव्यवस्थित और सुसंगठित बन सके। यह बदलाव न केवल पदनामों और इकाइयों के नाम बदलने तक सीमित है, बल्कि कार्य संचालन, कर्तव्य‑दायित्व और समन्वय की प्रक्रिया को भी सशक्त बनाएगा।
आने वाले समय में 15 मार्च के बाद संघ की नई संरचना के साथ संगठनात्मक दिशा और संचालन में स्पष्टता और मजबूती आएगी तथा स्वयंसेवकों के समर्पण और संगठन के लक्ष्यों को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी।
The RSS organizational restructuring plan, effective from March 15, 2026, aims to replace traditional terms like provinces and regions with divisions and states, updating hierarchical designations such as province pracharak to division pracharak and region pracharak to state pracharak, which is expected to strengthen grassroots outreach, improve coordination across the Sangh network, and reflect a modern hierarchical change in the RSS hierarchy and organizational structure.


















