Sambhal Masjid Survey Clash: City Magistrate to Lead Ongoing Magisterial Inquiry
संभल मस्जिद सर्वे बवाल: अब सिटी मजिस्ट्रेट करेंगे मजिस्ट्रियल जांच, डिप्टी कलेक्टर का तबादला
AIN NEWS 1: संभल जिले में पिछले साल नवंबर में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल की मजिस्ट्रियल जांच अब एक नए अधिकारी की देखरेख में आगे बढ़ेगी। डिप्टी कलेक्टर दीपक चौधरी, जो इस जांच की ज़िम्मेदारी संभाल रहे थे, का हाल ही में तबादला हो गया है। उनकी जगह अब सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार को यह जांच सौंपी गई है।
जांच की शुरुआत और अब तक की प्रगति
24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्जिद में किए गए सर्वे के दौरान भारी बवाल हुआ था। इस घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी जबकि 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मौके पर भीड़ ने जमकर तोड़फोड़ की, वाहनों को आग के हवाले किया और पूरे इलाके में दहशत फैला दी। इस हिंसा को गंभीरता से लेते हुए संभल के जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे।
इस जांच के लिए डिप्टी कलेक्टर दीपक चौधरी को नामित किया गया था। उन्होंने लगभग सात महीनों तक कई अहम अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए, जिनमें एसडीएम संभल, क्षेत्राधिकारी (CO), नखासा और संभल कोतवाली के प्रभारी शामिल थे।
लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही डिप्टी कलेक्टर का तबादला हो गया। इसके चलते जांच अधूरी रह गई और प्रशासन को नए अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपनी पड़ी।
अब सिटी मजिस्ट्रेट संभालेंगे जिम्मेदारी
अब संभल के एडीएम प्रदीप वर्मा ने यह जांच सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार को सौंपी है। सुधीर कुमार अब इस पूरे प्रकरण की आगे की जांच करेंगे और जिन हिस्सों पर अब तक कार्य नहीं हो पाया था, उसे पूरा करेंगे।
जांच के अगले चरण में आम जनता से भी गवाही और साक्ष्य मांगे गए थे। लोगों को बुलावा भेजकर बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया था, लेकिन आम नागरिकों की तरफ से किसी ने भी आगे आकर बयान दर्ज नहीं कराया।
यह प्रशासन के लिए चिंता का विषय है क्योंकि बिना प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और साक्ष्य के जांच को निष्पक्ष अंजाम तक पहुंचाना कठिन हो सकता है।
न्यायिक जांच आयोग भी कर रहा है जांच
इस पूरे मामले की केवल मजिस्ट्रियल ही नहीं बल्कि न्यायिक जांच भी चल रही है। एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग इस हिंसा और उसके कारणों की गहराई से समीक्षा कर रहा है। आयोग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बवाल की स्थिति क्यों बनी और किसकी लापरवाही या साजिश इसके पीछे रही।
बवाल के पीछे साजिश रचने के आरोप भी सामने आए हैं। संभल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क और जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष ज़फ़र अली एडवोकेट के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं। दावा किया गया है कि इन दोनों ने मिलकर इस बवाल की साजिश रची थी।
प्रशासन की चुनौतियां और भविष्य की राह
जांच में विलंब और तबादलों के चलते यह पूरा मामला प्रशासन के लिए एक चुनौती बना हुआ है। कई महीने बीत जाने के बाद भी जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आ पाया है। अब जब सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार को यह जिम्मेदारी दी गई है, तो उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे इस जांच को जल्द और निष्पक्ष तरीके से पूरा करेंगे।
सवाल यह भी है कि क्या आम लोग आगे आकर साक्ष्य और गवाही देने को तैयार होंगे, जिससे जांच में पारदर्शिता बनी रहे। इसके अलावा, क्या न्यायिक आयोग की रिपोर्ट प्रशासन को नए दिशा-निर्देश दे पाएगी, यह भी देखना होगा।
राजनैतिक रंग और संवेदनशीलता
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय राजनीति को भी गरमा दिया है। मस्जिद, धर्म और स्थानीय नेताओं के जुड़ाव के चलते यह मुद्दा बेहद संवेदनशील बन गया है। पुलिस और प्रशासन के लिए यह सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है कि किसी निर्दोष को परेशान न किया जाए, लेकिन दोषी भी बच न पाए।
राजनैतिक दबाव और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को बेहद सतर्क होकर कार्य करना होगा, ताकि सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे और कानून का राज स्थापित हो।
संभल जामा मस्जिद सर्वे बवाल एक ऐसी घटना है जिसने प्रशासन, पुलिस और आम जनता सभी को झकझोर कर रख दिया। सात महीने की जांच के बावजूद नतीजे सामने नहीं आए हैं, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हो रही है। अब सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार पर सबकी नजरें हैं कि वे इस जांच को कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता से पूरा कर पाते हैं।
अगर आप इस मामले से संबंधित कोई जानकारी या साक्ष्य साझा करना चाहते हैं, तो स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। आपकी एक गवाही किसी के लिए न्याय का रास्ता बन सकती है।
The ongoing magisterial inquiry into the Sambhal Jama Masjid survey clash has seen a major administrative change as City Magistrate Sudhir Kumar replaces Deputy Collector Deepak Chaudhary, who was transferred mid-investigation. The survey incident led to severe violence, causing five civilian deaths and injuring 29 police officers. Accusations of conspiracy involve MP Ziaur Rahman Bark and Masjid Committee President Zafar Ali Advocate. The inquiry aims to identify accountability in the unrest that broke out during the controversial mosque survey.


















