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संभल हिंसा में बड़ा खुलासा: सांसद बर्क और जफर अली की कॉल डिटेल्स से खुली दंगे की साजिश?

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Sambhal Violence: MP Ziaurrehman Bark’s Call Details Reveal Conspiracy to Incite Mob

संभल हिंसा में बड़ा खुलासा: भीड़ इकट्ठा कर दंगा फैलाने की साजिश, कॉल डिटेल्स से हुआ पर्दाफाश

AIN NEWS 1: संभल हिंसा मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस द्वारा की गई जांच में यह सामने आया है कि यह हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसकी बाकायदा योजना बनाई गई थी। इस साजिश में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क और शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली का नाम सामने आया है।

कॉल डिटेल्स से हुआ खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया है कि 24 नवंबर 2024 की रात को जफर अली और सांसद जियाउर्रहमान बर्क के बीच कई बार बातचीत हुई। कॉल रिकॉर्ड्स में स्पष्ट हुआ है कि सांसद ने जफर अली को सर्वे रोकने और भीड़ जुटाने के लिए कहा था। ये कॉल्स मोबाइल और व्हाट्सएप दोनों माध्यमों से की गई थीं।

पहली कॉल रात 10:01 बजे जफर अली ने की, इसके बाद 12:32 बजे सांसद बर्क ने व्हाट्सएप कॉल की। इसके बाद भी सुबह तक बातचीत होती रही।

“भीड़ इकट्ठा करिए, मस्जिद हमारी रहेगी”

व्हाट्सएप कॉल में सांसद बर्क ने स्पष्ट रूप से कहा, “भीड़ इकट्ठा करिए, किसी भी हालत में सर्वे न होने दीजिए, मस्जिद हमारी रहेगी।” इसके बाद अगले दिन सुबह जब हिंसा हुई, तब भी दोनों के बीच कॉल पर बात होती रही।

हिंसा के बाद मीडिया को गुमराह करने की कोशिश

हिंसा के बाद भी सांसद ने जफर अली को कहा कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) करिए और लोगों को बताइए कि जो लोग मरे हैं, उनकी मौत पुलिस की गोली से हुई है। इसका उद्देश्य भीड़ को और भड़काना और पुलिस को बदनाम करना था।

पुलिस ने सभी कॉल डिटेल्स केस डायरी में शामिल की

पुलिस ने इन कॉल्स की पूरी टाइमलाइन केस डायरी में शामिल कर ली है। कॉल डिटेल्स में यह भी सामने आया है कि सांसद बर्क ने सिर्फ जफर अली से ही नहीं, बल्कि भीड़ में मौजूद अन्य लोगों से भी बातचीत की थी। ये सभी तथ्य अब जांच का हिस्सा हैं।

जफर अली ने पूछताछ में साजिश कबूली

पूछताछ के दौरान जफर अली ने माना कि हिंसा से पहले, हिंसा के दौरान और बाद में भी उनकी सांसद से बातचीत होती रही। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हिंसा के लिए लोगों को उकसाया गया था और यह एक सोची-समझी रणनीति थी।

जफर अली की गिरफ्तारी और कोर्ट से झटका

इस मामले में बीते महीने जफर अली को गिरफ्तार किया गया था। उस पर हिंसा भड़काने और अफवाह फैलाने का आरोप है। 25 नवंबर को पहले उसे हिरासत में लिया गया था, लेकिन 2 घंटे की पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। बाद में जब सबूत मिले तो उसे दोबारा गिरफ्तार किया गया।

हाल ही में जफर अली ने कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी, लेकिन एडीजे-2 निर्भय नारायण राय की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। दो दिन पहले केस डायरी की गैरमौजूदगी के चलते सुनवाई टाल दी गई थी, लेकिन अब सबूतों के आधार पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

क्या है अगला कदम?

पुलिस अब सांसद जियाउर्रहमान बर्क की भूमिका की जांच में जुटी है। कॉल डिटेल्स और अन्य सबूतों के आधार पर उनकी भूमिका पर भी जल्द कार्रवाई की संभावना है। अगर जांच में पुष्टि होती है कि उन्होंने हिंसा भड़काने में सीधा योगदान दिया, तो उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया जा सकता है।

In a shocking turn in the Sambhal violence case, call details between MP Ziaurrehman Bark and Zafar Ali, the president of Jama Masjid, have exposed a pre-planned conspiracy to incite mob violence. The conversations allegedly aimed to stop the mosque survey, mobilize a crowd, and later claim that police firing caused deaths. These WhatsApp call records, now part of the police case diary, reveal direct involvement of political and religious leaders in orchestrating unrest. This case has intensified public and legal scrutiny of the Sambhal MP and mosque officials.

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