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राष्ट्रीय चिन्ह के अपमान पर सत्य सनातन युवा वाहिनी ने की कड़ी कार्रवाई की मांग, मोहन लाल गौड़ बोले- “यह राष्ट्र का अपमान है”?

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AIN NEWS 1: भारत का राष्ट्रीय चिन्ह “अशोक स्तंभ” केवल एक कलात्मक धरोहर नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यता, संविधान और गौरव का प्रतीक है। हाल ही में इसके अपमान का मामला सामने आया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। इस घटना पर सत्य सनातन युवा वाहिनी के संस्थापक अध्यक्ष मोहन लाल गौड़ ने प्रधानमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा की अपील की है।

इंटरव्यू-स्टाइल बयान

प्रश्न: राष्ट्रीय चिन्ह के अपमान को आप किस नजरिए से देखते हैं?

👉 मोहन लाल गौड़: “मेरे लिए यह केवल एक प्रतीक का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का अपमान है। अशोक स्तंभ और सत्यमेव जयते हमारे संविधान और आत्मा का हिस्सा हैं। इसका अपमान हर भारतीय की भावनाओं को आहत करता है।”

प्रश्न: आपकी मांग क्या है?

👉 मोहन लाल गौड़: “हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री जी दोषियों पर ऐसी कार्रवाई करें, जिससे भविष्य में कोई भी राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान की हिम्मत न कर सके। कानून मौजूद है, बस उसे कठोरता से लागू करने की ज़रूरत है।”

प्रश्न: युवाओं और समाज को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

👉 मोहन लाल गौड़: “राष्ट्र का सम्मान सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। अगर आप कहीं राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान होते देखें, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें और सामाजिक रूप से भी इसका विरोध करें।”

राष्ट्रीय चिन्ह का महत्व

भारत का राष्ट्रीय चिन्ह “अशोक स्तंभ” 1950 में अपनाया गया। इसमें चार शेर शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और गर्व का प्रतीक हैं। इसके नीचे अंकित “सत्यमेव जयते” हमारी न्याय और सत्यनिष्ठा की मूल भावना को दर्शाता है।

यह चिन्ह सरकारी दस्तावेज़ों, न्यायालयों, मुद्रा और संवैधानिक संस्थाओं में उपयोग होता है। इसलिए इसका सम्मान करना हर नागरिक का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है।

कानून और सजा के प्रावधान

राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान केवल नैतिक अपराध नहीं, बल्कि यह कानूनन सख्त अपराध है। भारत में इसके लिए कई प्रावधान मौजूद हैं:

1. राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971)

इस अधिनियम के तहत यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करता है, तो उसे 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

2. भारतीय दंड संहिता (IPC)

धारा 124A (राजद्रोह): यदि किसी प्रतीक का अपमान राष्ट्रविरोधी गतिविधि के रूप में किया जाए तो आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

धारा 153A: सांप्रदायिक या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के इरादे से किया गया अपमान अपराध माना जाएगा।

धारा 505: ऐसे बयान या कार्य जो समाज में नफरत या अशांति फैलाएँ, उन पर सजा का प्रावधान है।

3. संविधान का अनुच्छेद 51(A)

हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है कि वह राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करे। इसका उल्लंघन नैतिक और कानूनी अपराध दोनों है।

क्यों जरूरी है सख्त कार्रवाई?

कानून स्पष्ट है, लेकिन कई बार लापरवाही और नरमी से दोषी बच निकलते हैं। यही कारण है कि सत्य सनातन युवा वाहिनी ने प्रधानमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मोहन लाल गौड़ का कहना है:

“अगर इस मामले में कठोर सजा दी जाती है, तो यह भविष्य के लिए एक संदेश होगा कि भारत में राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”

युवाओं और समाज की भूमिका

समाज तभी मजबूत बनता है जब लोग अपने राष्ट्र और प्रतीकों का सम्मान करते हैं। युवाओं को चाहिए कि वे सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाएँ और ऐसे मामलों का खुलकर विरोध करें।

सत्य सनातन युवा वाहिनी ने यह भी अपील की है कि स्कूल-कॉलेजों में बच्चों को राष्ट्रीय प्रतीकों का महत्व पढ़ाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ी इस जिम्मेदारी को गहराई से समझ सके।

राष्ट्रीय चिन्ह का अपमान केवल कानून तोड़ना नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की गरिमा पर चोट है। सत्य सनातन युवा वाहिनी और इसके संस्थापक अध्यक्ष मोहन लाल गौड़ की यह मांग उस जिम्मेदारी को दर्शाती है, जो हर भारतीय नागरिक को निभानी चाहिए।

अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करती है और क्या दोषियों को सख्त सजा मिल पाती है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा समाज में जागरूकता और राष्ट्रप्रेम को और गहरा कर रहा है।

The insult of India’s national emblem has raised serious concerns across the country. Mohan Lal Gaur, founder of the Saty Sanatan Yuva Vahini, has urged the Prime Minister to take strict action against the culprits under the Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 and relevant IPC sections like 124A and 153A. According to him, the Ashoka Pillar and the motto Satyameva Jayate symbolize the soul of the Indian Constitution, and any disrespect is a direct attack on the nation’s dignity. Strict punishment, he believes, will ensure that no one dares to insult national symbols again.

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