AIN NEWS 1: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष को अत्यंत पवित्र और आवश्यक माना गया है। यह समय हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आता है। इस वर्ष यानी 2025 में पितृ पक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर तक रहेगा। खास बात यह है कि इस बार श्राद्ध पक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से होगी और इसका समापन सूर्यग्रहण पर होगा।
यह खगोलीय और धार्मिक दोनों दृष्टियों से बेहद अनोखा संयोग है। भारत में चंद्रग्रहण तो दिखाई देगा, पर सूर्यग्रहण नहीं। फिर भी यह संयोग भक्तों और ज्योतिषाचार्यों के लिए विशेष महत्व रखता है।
पितृ पक्ष का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। “महाभारत” और “गरुड़ पुराण” में श्राद्ध के महत्व का विस्तार से वर्णन है।
श्राद्ध कर्म की परंपरा
श्राद्ध काल में जल, तिल, जौ, दूध, दही, घी और अन्न का दान किया जाता है।
ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराना आवश्यक है।
मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की आत्मा प्रसन्न होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
ग्रहण और सूतक का महत्व
धार्मिक दृष्टि
ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता। सूतक लगने पर कोई भी धार्मिक कार्य नहीं किया जाता। इस बार:
7 सितंबर को चंद्रग्रहण होगा और सूतक दोपहर 12:57 से लगेगा।
21 सितंबर को सूर्यग्रहण होगा (भारत में दृश्य नहीं होगा), लेकिन विदेशों में रहने वालों के लिए सूतक मान्य होगा।
वैज्ञानिक दृष्टि
ग्रहण एक खगोलीय घटना है।
चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है।
सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है।
वैज्ञानिक मानते हैं कि ग्रहण के समय पराबैंगनी किरणों का प्रभाव बढ़ता है, इसलिए भोजन और पानी को ढककर रखने की परंपरा एक वैज्ञानिक कारण से भी जुड़ी है।
श्राद्ध तिथियां 2025
7 सितंबर – पूर्णिमा श्राद्ध (सूतक पूर्व)
8 सितंबर – प्रतिपदा
9 सितंबर – द्वितीया
10 सितंबर – तृतीया
11 सितंबर – चतुर्थी
12 सितंबर – पंचमी
13 सितंबर – षष्ठी
14 सितंबर – सप्तमी
15 सितंबर – अष्टमी
16 सितंबर – नवमी
17 सितंबर – दशमी
18 सितंबर – एकादशी
19 सितंबर – द्वादशी
20 सितंबर – त्रयोदशी
21 सितंबर – सर्वपितृ अमावस्या
दान-पुण्य और सामाजिक दृष्टिकोण
श्राद्ध केवल पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि इसमें समाज को जोड़ने का संदेश भी छिपा है।
भोजन का दान – भूखों को भोजन कराना इंसानियत का प्रतीक है।
कपड़े और वस्त्र – गरीबों की मदद करना समाज में समानता का भाव लाता है।
गौ सेवा – भारतीय संस्कृति में गाय की सेवा को पवित्र माना गया है।
बुजुर्गों का सम्मान – पितृ पक्ष हमें जीवित बुजुर्गों की सेवा और आदर करने की भी प्रेरणा देता है।
इतिहास और ग्रंथों में श्राद्ध
“महाभारत” में वर्णन मिलता है कि जब कर्ण मृत्यु के बाद पितृ लोक पहुंचे तो उन्हें अन्न की जगह सोने और रत्न मिले। कारण पूछा गया तो उन्हें बताया गया कि जीवन भर उन्होंने दान तो किया, लेकिन अन्न दान कभी नहीं किया। तब कर्ण ने भगवान से प्रार्थना की और उन्हें पृथ्वी पर श्राद्ध काल का अवसर दिया गया।
यह कथा बताती है कि श्राद्ध और अन्न दान का कितना गहरा महत्व है।
पंडितों और विशेषज्ञों की राय (इंटरव्यू शैली)
पंडित श्यामसुंदर शास्त्री (वाराणसी)
“पितृ पक्ष में तर्पण और दान से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। इस बार ग्रहण का संयोग इसे और भी विशेष बना रहा है। परिवारों को चाहिए कि वे इस अवधि में पवित्रता और नियमों का पालन करें।”
ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय मिश्रा
“ग्रहण का वैज्ञानिक महत्व भी है। भोजन ढककर रखना और सूतक काल में धार्मिक कार्य न करना, दोनों ही स्वास्थ्य और ऊर्जा संतुलन से जुड़े हैं। आधुनिक विज्ञान भी इसे मान्यता देता है।”
आधुनिक समय में श्राद्ध की प्रासंगिकता
आज के व्यस्त जीवन में लोग अक्सर परंपराओं से दूर हो रहे हैं। लेकिन श्राद्ध केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक और सामाजिक अवसर है।
यह हमें पूर्वजों की स्मृति दिलाता है।
यह हमें समाज और परिवार के प्रति जिम्मेदार बनाता है।
यह परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का साधन है।
श्राद्ध पक्ष 2025 धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक – तीनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखता है।
धार्मिक रूप से यह पितरों को तृप्त करने और आशीर्वाद पाने का अवसर है।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं को समझने का समय है।
सामाजिक रूप से यह बुजुर्गों के सम्मान और समाज सेवा का संदेश देता है।
इस प्रकार, श्राद्ध केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, विज्ञान और समाज सेवा का संगम है।
Shradh 2025, or Pitru Paksha, will be observed from September 7 to September 21. It begins with a lunar eclipse and ends with a solar eclipse, making it astrologically significant. During this time, Hindus perform Shradh rituals, Pitru Tarpan, food donations, and charity to honor their ancestors. The significance of Shradh lies not only in religious rituals but also in its scientific explanations and social relevance, making it a unique blend of tradition and modern understanding.


















