SIR सूची में सबसे ज्यादा वोट कटने वाले 5 जिले: पूरी रिपोर्ट!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में हाल ही में जारी की गई SIR (Supplementary Integrated Roll) मतदाता सूची को लेकर बड़े बदलाव सामने आए हैं। इस सूची के तहत राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। खासतौर पर पांच ऐसे जिले हैं, जहां वोट कटने का प्रतिशत सबसे ज्यादा दर्ज किया गया है। यह आंकड़े चुनावी दृष्टिकोण से काफी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इनका असर आने वाले चुनावों पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।

मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया कई कारणों से की जाती है। इसमें डुप्लीकेट नाम, स्थायी रूप से बाहर चले गए लोग, मृत मतदाता या गलत पते पर दर्ज नाम शामिल होते हैं। लेकिन जिस तरह से SIR में बड़ी संख्या में वोट काटे गए हैं, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। आम जनता भी इन बदलावों को लेकर सवाल पूछ रही है।

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सबसे ज्यादा वोट कटने वाले 5 जिले

आइए जानते हैं उन पांच जिलों के बारे में, जहां SIR सूची में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए—

1. लखनऊ – सबसे ऊपर

राजधानी लखनऊ इस सूची में पहले स्थान पर है। यहां कुल 12,00,138 वोट काटे गए हैं, जो जिले की कुल मतदाता संख्या का 30.04 प्रतिशत है। यह अपने आप में बहुत बड़ा आंकड़ा है। लखनऊ जैसे बड़े और शहरी जिले में इतने बड़े स्तर पर नाम हटाए जाना प्रशासनिक प्रक्रिया की गंभीरता को दिखाता है।

लखनऊ में वोट कटने के पीछे प्रमुख वजहें बताई जा रही हैं—लगातार बदलते पते, बाहर काम करने गए लोग और पुराने रिकॉर्ड का अपडेट न होना। चुनाव आयोग द्वारा किए गए सत्यापन अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम चिन्हित किए गए, जो अब जिले में मौजूद ही नहीं थे।

2. गाजियाबाद – दूसरा स्थान

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ा जिला गाजियाबाद इस सूची में दूसरे नंबर पर है। यहां 8,18,139 वोट हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का 28.83 प्रतिशत है। गाजियाबाद तेजी से विकसित हो रहा जिला है, जहां आबादी का बड़ा हिस्सा प्रवासी लोगों का है। ऐसे में मतदाता सूची का बार-बार संशोधन होना स्वाभाविक माना जाता है।

इस जिले में खासतौर पर किराये पर रहने वाले लोगों के नामों में गड़बड़ियां पाई गईं। कई लोग दूसरे शहरों में शिफ्ट हो चुके थे, लेकिन उनके नाम पुराने पते पर ही दर्ज थे। इसी कारण इतने बड़े पैमाने पर वोट काटने की जरूरत पड़ी।

3. बलरामपुर – चौंकाने वाले आंकड़े

तीसरे स्थान पर है पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिला बलरामपुर। यहां कुल 4,11,200 वोट काटे गए हैं, जो मतदाता संख्या का 25.98 प्रतिशत है। यह जिला ग्रामीण बहुल है, जहां रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया अक्सर धीमी रहती है।

बलरामपुर में नाम हटाए जाने का मुख्य कारण पुराने डेटा का संशोधन और फील्ड स्तर पर की गई जांच रही। चुनाव आयोग ने घर-घर जाकर सत्यापन कराया, जिसके बाद कई अवैध या अनुपयोगी नाम सूची से बाहर किए गए।

4. कानपुर नगर – चौथा स्थान

औद्योगिक नगरी कानपुर नगर में भी बड़े बदलाव दर्ज किए गए हैं। यहां 9,02,148 वोट काटे गए, जो कुल मतदाताओं का 25.50 प्रतिशत है। कानपुर नगर जनसंख्या के लिहाज से राज्य के सबसे बड़े जिलों में शामिल है, इसलिए यहां इतनी संख्या में वोट कटना स्वाभाविक भी है और महत्वपूर्ण भी।

कानपुर में वोट कटने की प्रक्रिया मुख्य रूप से डुप्लीकेट नामों और गलत जानकारी के कारण हुई। कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के नाम अलग-अलग जगह दर्ज थे, जिन्हें संशोधन के दौरान हटाया गया।

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5. मेरठ – पांचवा प्रमुख जिला

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिला मेरठ इस सूची में पांचवें नंबर पर है। यहां कुल 6,65,635 वोट काटे गए हैं, जो मतदाता संख्या का 24.65 प्रतिशत है। मेरठ में भी प्रवासी आबादी और बार-बार पते बदलने की समस्या सबसे बड़ी वजह रही।

मेरठ के कई इलाकों में सत्यापन के दौरान ऐसे मतदाता मिले, जिनके नाम वर्षों से दर्ज थे, लेकिन वे अब जिले में रहते ही नहीं थे। इसी कारण प्रशासन ने व्यापक संशोधन अभियान चलाकर सूची को साफ-सुथरा बनाने की कोशिश की।

वोट कटने का चुनावों पर असर

इन पांच जिलों में बड़ी संख्या में वोट कटना आने वाले चुनावों के समीकरण बदल सकता है। शहरी जिलों में जहां नाम हटाए गए हैं, वहां राजनीतिक दल अपनी रणनीति दोबारा तैयार करेंगे। ग्रामीण जिलों में भी नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया तेज की जा सकती है।

चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के तहत हुई है। इसका उद्देश्य केवल सही और वास्तविक मतदाताओं को सूची में रखना है। फिर भी विपक्षी दलों ने इन आंकड़ों को लेकर चिंता जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

आम मतदाताओं के लिए जरूरी जानकारी

अगर आपका नाम भी SIR सूची में कट गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप दोबारा आवेदन देकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

चुनाव आयोग ने हेल्पलाइन नंबर और पोर्टल भी जारी किए हैं, जहां जाकर लोग अपने नाम की स्थिति जांच सकते हैं। हर मतदाता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका रिकॉर्ड सही ढंग से दर्ज हो।

कुल मिलाकर SIR सूची में किए गए ये बदलाव मतदाता डेटा को दुरुस्त करने की एक बड़ी पहल मानी जा रही है। लखनऊ, गाजियाबाद, बलरामपुर, कानपुर नगर और मेरठ जैसे जिलों में हुए संशोधन यह बताते हैं कि मतदाता सूची को अपडेट रखना कितना जरूरी है। सही मतदाता ही लोकतंत्र की असली ताकत होते हैं, इसलिए यह प्रक्रिया चुनाव व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

The Uttar Pradesh voter verification drive under the SIR list revisions has resulted in significant voter name deletions across key districts. This detailed report focuses on Uttar Pradesh voter list updates and highlights important election commission actions in Lucknow voter cuts, Ghaziabad voter list corrections, Balrampur verification changes, Kanpur Nagar voter deletions, and Meerut voter revisions, making it crucial for understanding UP election transparency and voter data management.

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