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“सरकारी संपत्ति पर कब्जा नहीं अधिकार”: सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी को सुनाई कड़ी फटकार

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AIN NEWS 1 नई दिल्ली | समाजवादी पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। यूपी के पीलीभीत जिले में सरकारी भवन पर कब्जा बनाए रखने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि सत्ता में रहते हुए यह सरकारी संपत्ति पर धोखाधड़ी से कब्जा था, और अब जब उसे खाली कराया जा रहा है, तो नियम-कानून की बातें याद आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला?

साल 2005 में, जब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, उस वक्त पीलीभीत नगर पालिका परिषद के अधिशासी अभियंता का सरकारी आवास नाममात्र किराए (महज ₹115) पर समाजवादी पार्टी को दे दिया गया। पार्टी ने इस इमारत को जिला कार्यालय बना लिया और वर्षों तक वहीं से कामकाज चलता रहा।

बाद में 12 नवंबर 2020 को नगर पालिका परिषद ने यह आवंटन निरस्त कर दिया, यह कहते हुए कि यह नियमों के खिलाफ है। लेकिन इसके बावजूद, पार्टी ने जगह खाली नहीं की। प्रशासन द्वारा अब इमारत खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिस पर समाजवादी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने समाजवादी पार्टी की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की:

“क्या आपने कभी सुना है कि शहर के बीचों-बीच स्थित सरकारी इमारत का किराया सिर्फ 115 रुपये हो सकता है? आप चाहते हैं कि हम इसपर भरोसा कर लें?”

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे आवंटन को ‘अवैध और धोखाधड़ी से कब्जा’ बताया और कहा कि पार्टी अब इस पर सिविल कोर्ट में जाकर दलील दे।

कोर्ट की चेतावनी: अब नियम याद आ रहे हैं?

कोर्ट ने यह भी कहा कि जब आप सत्ता में थे, तब नियमों की धज्जियां उड़ाईं और अब जब सरकार ने कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की है, तब न्याय की दुहाई दी जा रही है

सुनवाई के दौरान, समाजवादी पार्टी के वकील ने तर्क दिया कि पूरे किराए का भुगतान किया गया है, लेकिन कोर्ट ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि “यह सिर्फ कागज पर दिखावे के लिए था, असल में यह सत्ता का दुरुपयोग है।”

हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

बता दें कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी समाजवादी पार्टी की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष को पीलीभीत स्थित कार्यालय से बेदखल करने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा था कि पार्टी कोई भी रिट याचिका दायर नहीं कर सकती। इसके खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने भी जून में खारिज कर दिया था।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह मामला सिर्फ एक कार्यालय की जमीन का नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे राजनीतिक दल सत्ता में रहते हुए सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय राजनीतिक नैतिकता और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक मजबूत संदेश है।

कानून सबके लिए बराबर

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यह भी दर्शाता है कि चाहे कोई भी पार्टी हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है।
सरकारी संपत्ति पर निजी कब्जा किसी भी सूरत में जायज़ नहीं ठहराया जा सकता, चाहे वह नाममात्र किराया हो या राजनीतिक दबाव।

The Supreme Court of India has harshly criticized the Samajwadi Party for fraudulently occupying a government building in Pilibhit, Uttar Pradesh. The court refused to entertain the party’s plea and stated that the property was obtained through deception during its time in power. This case highlights the misuse of government resources by political parties and sets a legal precedent for similar disputes.

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