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पश्चिम बंगाल हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर उठे सवाल: मनन कुमार मिश्रा का आरोप!

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Why Is Supreme Court Silent on Bengal Violence? Manan Kumar Mishra Raises Serious Questions

बंगाल हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर उठे सवाल: मनन कुमार मिश्रा ने जताई चिंता

AIN NEWS 1: बंगाल में हो रही हिंसा पर देशभर में चिंता जताई जा रही है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील मनन कुमार मिश्रा ने इस मुद्दे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि जब मणिपुर में हिंसा हुई थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया था, लेकिन पश्चिम बंगाल में जब हिंसा फैली हुई है, तब सुप्रीम कोर्ट खामोश क्यों है?

बंगाल में हिंसा की स्थिति

हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल के कई जिलों में हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। खासकर मुर्शिदाबाद, बीरभूम, हावड़ा और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। कई जगहों पर समुदायों के बीच टकराव, आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की खबरें आई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरें इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि हालात सामान्य नहीं हैं।

मनन कुमार मिश्रा का बयान

मनन कुमार मिश्रा ने कहा, “आज मुर्शिदाबाद समेत पूरा बंगाल जल रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी समझ से परे है। जब मणिपुर में हिंसा हुई थी, तब कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई की थी। आखिर बंगाल में हो रही हिंसा पर वही तत्परता क्यों नहीं दिखाई जा रही?”

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और सक्रियता लोकतंत्र की पहचान होती है। अगर कोर्ट किसी राज्य विशेष में तुरंत एक्शन लेता है और किसी अन्य राज्य में खामोश रहता है, तो इससे न्याय व्यवस्था की साख पर सवाल उठते हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज

मनन कुमार मिश्रा का बयान आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर कोर्ट और सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब किसी राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ जाती है, तो सर्वोच्च न्यायालय की जिम्मेदारी बनती है कि वह हस्तक्षेप करे और लोगों के अधिकारों की रक्षा करे।

मणिपुर और बंगाल की तुलना

मणिपुर में हुई हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कई निर्देश दिए थे। वहाँ महिलाओं पर हुए अत्याचारों के मामलों पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन बंगाल में हो रही हिंसा, जिसमें सार्वजनिक संपत्तियों का नुकसान, आम लोगों की सुरक्षा खतरे में और सांप्रदायिक तनाव बढ़ता जा रहा है, उस पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर चर्चा

सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी न्यायिक संस्था है और उसकी भूमिका कानून और संविधान की रक्षा करना है। ऐसे में जब किसी राज्य में व्यापक हिंसा और अशांति हो, तो कोर्ट का चुप रहना जनता के बीच कई प्रकार की शंकाएं उत्पन्न करता है। मनन कुमार मिश्रा का कहना है कि कोर्ट को निष्पक्ष रूप से सभी राज्यों में समान रूप से संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

मीडिया और सोशल मीडिया का प्रभाव

सोशल मीडिया पर बंगाल में हो रही घटनाओं को लेकर बड़ी संख्या में लोग सवाल पूछ रहे हैं। हैशटैग्स जैसे #BengalBurning, #SupremeCourtSilent ट्रेंड कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट को इस पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि राज्य सरकार स्थिति संभालने में विफल नजर आ रही है।

बंगाल में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर देशभर में चिंता जताई जा रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी को लेकर अब देश के वरिष्ठ वकील और सांसद भी सवाल उठा रहे हैं। यह मुद्दा अब सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता और सक्रियता पर बहस का विषय बन चुका है।

आम जनता और बुद्धिजीवी वर्ग की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट को निष्पक्ष और समान व्यवहार दिखाते हुए बंगाल में हो रही हिंसा पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए, ताकि कानून का राज बना रहे और लोगों का न्यायपालिका में विश्वास कायम रह सके।

The recent Bengal violence has sparked nationwide concerns, and many are questioning the Supreme Court’s silence on Bengal riots. Senior advocate and Rajya Sabha MP Manan Kumar Mishra compared the court’s prompt action during Manipur violence to its current inaction in West Bengal. With areas like Murshidabad and Birbhum witnessing unrest, the judiciary’s neutrality and responsiveness are being debated. This issue highlights the growing demand for equal treatment by the Indian judiciary in cases of communal violence and law-and-order breakdowns.

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