AIN NEWS 1: पटना दौरे पर आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने तीखा हमला बोला है। तेजस्वी ने सवाल किया कि जब देश में आतंकी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं, ऐसे में केंद्र सरकार ने सीजफायर क्यों किया? उन्होंने यह भी पूछा कि बेरोजगारी की समस्या का हल कब निकलेगा।
तेजस्वी ने कहा, “अमित शाह जी को देश की जनता को बताना चाहिए कि सीजफायर किस कारण से किया गया? इस फैसले से किसे फायदा हुआ और देश की सुरक्षा पर इसका क्या असर पड़ा? इसके साथ ही उन्हें यह भी बताना चाहिए कि युवाओं को रोजगार कब मिलेगा? देश में करोड़ों युवा आज बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस योजना दिखाई नहीं दे रही है।”
बेरोजगारी को लेकर बढ़ते सवाल
तेजस्वी यादव लंबे समय से बेरोजगारी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। उन्होंने बार-बार कहा है कि युवाओं को केवल वादे मिलते हैं, रोजगार नहीं। इस बार भी उन्होंने अमित शाह से सीधा सवाल पूछते हुए कहा कि यदि वे वाकई बिहार के विकास के लिए गंभीर हैं, तो बेरोजगारी पर खुलकर बात करें।
उन्होंने कहा, “केवल रैलियों और नारों से विकास नहीं होता। युवाओं को नौकरी चाहिए, स्थिर भविष्य चाहिए। बिहार के युवा आज पलायन के लिए मजबूर हैं। केंद्र सरकार को इस पर जवाब देना होगा।”
मंदिर सौंदर्यीकरण को लेकर भी उठाया सवाल
तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा अब उनके योजनाओं की नकल कर रही है। उन्होंने बताया कि राजद सरकार ने सीतामढ़ी के पूनौरा धाम स्थित माता सीता मंदिर के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए बजट तय किया है।
उन्होंने कहा, “हमने माता सीता मंदिर के विकास को प्राथमिकता दी है। अब भाजपा भी उसी योजना को दोहराने का प्रयास कर रही है, जबकि पहले उन्होंने इस स्थल की उपेक्षा की थी। हमें खुशी है कि हमारी पहल को देखकर वे भी मंदिरों के संरक्षण की दिशा में सोचने लगे हैं, लेकिन उन्हें यह स्वीकार करना चाहिए कि यह पहल सबसे पहले हमने की थी।”
भाजपा की “राजनीतिक कॉपी” पर तंज
तेजस्वी ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि जब विपक्ष कुछ नया करता है, तब भाजपा उसे अपनाकर अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करने की कोशिश करती है।
उन्होंने कहा, “हमने जब रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के विकास पर काम शुरू किया, तब भाजपा ने हमारी आलोचना की। लेकिन अब वही योजनाएं ये लोग अपनाकर खुद को विकासशील बताते हैं। यह जनता को गुमराह करने की राजनीति है।”
अमित शाह की बिहार यात्रा की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिन के दौरे पर बिहार पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने कई राजनीतिक बैठकें कीं और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अमित शाह का यह दौरा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है और शाह का दौरा इसी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि सिर्फ दौरे और भाषणों से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता, उन्हें नतीजे चाहिए।
राजद का जनसमर्थन और रणनीति
राजद की ओर से लगातार यह कोशिश की जा रही है कि वह जनता के बीच अपने कार्यों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाए। तेजस्वी यादव खुद युवाओं, किसानों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाकर भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हमने जिन मुद्दों को उठाया, वही आज देशव्यापी बहस बन गए हैं। इसका मतलब है कि हमारी सोच जनता की जरूरतों के अनुसार है, और भाजपा को अब हमारी योजनाओं की कॉपी करनी है “
मुद्दों से हटकर राजनीति नहीं
तेजस्वी यादव का यह बयान न सिर्फ अमित शाह पर व्यक्तिगत हमला था, बल्कि पूरे राजनीतिक विमर्श को एक दिशा देने की कोशिश भी थी।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अब राजनीति केवल धर्म या जाति के नाम पर नहीं चलेगी, अब जनता विकास, रोजगार, शिक्षा, और स्वास्थ्य जैसे असल मुद्दों पर जवाब मांगती है। और यदि भाजपा इन सवालों का जवाब नहीं देती, तो जनता खुद तय करेगी कि अगला नेतृत्व किसके हाथ में होना चाहिए।
तेजस्वी यादव ने अमित शाह से सीजफायर और बेरोजगारी पर जवाब मांगा
माता सीता मंदिर की योजना को लेकर भाजपा पर “कॉपी” का आरोप
भाजपा की योजनाओं को “विपक्ष की नकल” बताया
बिहार की जनता से असल मुद्दों पर बात करने की अपील
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीति तेज
During Union Home Minister Amit Shah’s recent visit to Patna, RJD leader Tejashwi Yadav raised critical questions, focusing on the ceasefire issue and the unresolved problem of unemployment in India. He also accused the BJP of copying RJD’s developmental plans, particularly the initiative to beautify the Mata Sita Temple at Punaura Dham in Sitamarhi. This confrontation reflects the rising political tension ahead of Bihar elections 2025.



















