AIN NEWS 1 | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने अंदाज़ में वैश्विक व्यापार पर बयान देते हुए कई देशों को चेतावनी दी है। इस बार उन्होंने जापान के साथ हुई एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते को उदाहरण बनाकर उन देशों को घेरा है जिनके साथ अभी तक अमेरिका का व्यापार समझौता नहीं हो पाया है। ट्रंप का साफ कहना है कि जब तक कोई देश अमेरिका के लिए अपने बाजार नहीं खोलता, तब तक टैरिफ (शुल्क) में कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
जापान के साथ हुआ ऐतिहासिक समझौता
डोनाल्ड ट्रंप ने जापान के साथ हुई एक बड़ी डील की घोषणा करते हुए बताया कि यह अब तक की सबसे बड़ी अमेरिका-जापान ट्रेड डील है। इस डील में 550 अरब डॉलर का निवेश शामिल है। ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि पहली बार जापान अमेरिका के लिए अपने बाजार को पूरी तरह खोलने जा रहा है।
उनके अनुसार, इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी और अमेरिका को इसका सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि इस व्यापारिक सहयोग से लाखों नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे, जो अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है।
‘टैरिफ तभी घटेगा जब बाजार खुलेंगे’
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर लिखा,
“मैं टैरिफ (आयात शुल्क) तभी घटाऊंगा, जब कोई देश अपने बाजार को अमेरिका के लिए खोलने को तैयार होगा। अगर कोई देश ऐसा नहीं करता, तो हम उस पर और भी ज्यादा टैरिफ लागू करेंगे।”
उन्होंने इसे “टैरिफ डिप्लोमेसी” का नाम देते हुए कहा कि टैरिफ उनकी सबसे बड़ी ताकत है। इसके बिना, किसी भी देश को अपने बाजार खोलने के लिए राजी करना लगभग असंभव है। ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि “अमेरिका के लिए हमेशा लक्ष्य है — शून्य टैरिफ, लेकिन पहले बाजार खुलने चाहिए।”
जापान से अमेरिका को होगा 90% लाभ: ट्रंप
ट्रंप के अनुसार, इस व्यापार समझौते का 90 प्रतिशत लाभ अमेरिका को मिलेगा। उन्होंने कहा कि जापान ने इस डील में 15 प्रतिशत ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (परस्पर शुल्क) लगाने पर सहमति जताई है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलित रहेगा, लेकिन अमेरिका की स्थिति कहीं अधिक मजबूत होगी।
ट्रंप का यह बयान साफ संकेत देता है कि वे अन्य देशों को भी इसी तरह की शर्तों पर डील करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।
फिलीपींस और इंडोनेशिया पर भी टैरिफ का दबाव
जापान के अलावा ट्रंप ने फिलीपींस और इंडोनेशिया के साथ भी व्यापार समझौतों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन देशों से आयात किए जाने वाले उत्पादों पर अब 19 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। इससे इन देशों पर अमेरिका के साथ बेहतर शर्तों पर समझौता करने का दबाव बढ़ेगा।
भारत के साथ डील को लेकर स्थिति अस्पष्ट
जहां जापान, फिलीपींस और इंडोनेशिया के साथ अमेरिका की दिशा स्पष्ट नजर आ रही है, वहीं भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
हाल ही में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका दौरे पर गया था, लेकिन डील को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई। अब अगस्त के दूसरे सप्ताह में अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल भारत आने वाला है, जिसके बाद शायद बातचीत में कोई दिशा मिल सके।
ट्रंप की रणनीति: अमेरिका फर्स्ट
डोनाल्ड ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ सिद्धांत इस बयानबाजी में भी झलकता है। वे साफ कह रहे हैं कि अमेरिका अपने हितों के लिए टैरिफ का इस्तेमाल एक रणनीतिक हथियार की तरह करेगा। बाजार खोलो — तो रियायत मिलेगी, नहीं खोलो — तो टैरिफ झेलो।
उनके मुताबिक, टैरिफ एक ऐसा जरिया है जिसके माध्यम से अमेरिका बाकी देशों को अपने हितों के अनुसार समझौता करने के लिए तैयार कर सकता है।
ट्रंप की यह नीति एक बार फिर वैश्विक व्यापार में शक्ति संतुलन की दिशा बदलने का संकेत देती है। जहां एक ओर वे व्यापार को बढ़ावा देने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी भाषा और शर्तें एक स्पष्ट चेतावनी देती हैं कि अमेरिका अब पुराने तरीके से व्यापार नहीं करेगा।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत सहित बाकी देश ट्रंप की इस नई ‘टैरिफ पॉलिसी’ पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।
Donald Trump has reignited global trade debates by warning countries that tariffs will only be reduced if they open their markets to US goods. Using the recent Japan trade deal worth $550 billion as a model, Trump emphasized that nations like India, Philippines, and Indonesia must follow suit or face higher import duties. His America First policy and use of tariffs as leverage underline a more aggressive and transactional approach to international trade.


















