AIN NEWS 1 | बिहार में वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन के सांसद सोमवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर मार्च कर रहे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोककर हिरासत में ले लिया।
इस घटना पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है और यह साबित करता है कि सरकार सच छुपाने की कोशिश कर रही है।
“बीजेपी चोरी छुपाना चाहती है” — उद्धव ठाकरे
मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा,
“राहुल गांधी ने जो मुद्दे उठाए हैं, उन्हें गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। लेकिन केंद्र सरकार और बीजेपी इसे नजरअंदाज कर रही हैं। प्रधानमंत्री खुद कभी सामने नहीं आते, और सरकार की तरफ से सिर्फ दो-चार मंत्री बयान देकर मामले को टाल देते हैं। अगर वे विपक्ष के साथ बैठकर चर्चा करते, तो कोई रास्ता निकल सकता था। लेकिन यहां तो चोरी छिपाने का खेल चल रहा है।”
दो मोर्चों पर आंदोलन
उद्धव ठाकरे ने सोमवार के घटनाक्रम को दो बड़े जनआंदोलनों से जोड़ा।
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महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन — उद्धव ने बताया कि उनकी पार्टी शिवसेना (UBT) ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।
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उन्होंने कहा, “मैं सभी शिवसैनिकों और आम जनता का आभार व्यक्त करता हूं जो बड़ी संख्या में हमारे आंदोलन में शामिल हुए। पिछले सत्र में हमने ठोस सबूतों के साथ राज्य सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर किया था और राज्यपाल से भी मुलाकात की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए आज हमें सड़क पर उतरना पड़ा।”
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दिल्ली में INDIA गठबंधन का मार्च — दिल्ली में INDIA गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया और थाने ले गई। उद्धव ने सवाल किया, “हमारा विरोध तो चुनाव आयोग के खिलाफ है, फिर बीच में सरकार और बीजेपी क्यों आ रही है?”
“चोरी करने वालों को बचा रही है सरकार”
पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर चुनावी गड़बड़ियों को छुपाने की कोशिश कर रही है।
“यह साफ संकेत है कि जो चोरी उन्होंने की है, उसे छुपाना चाहते हैं। जो लोग चोर हैं, उन्हें बचाने के लिए ही यह कार्रवाई की जा रही है।”
लोकतंत्र और विपक्ष की भूमिका
उद्धव ठाकरे ने कहा कि मौजूदा हालात में विपक्षी दलों को और मजबूती से एकजुट होना होगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा,
“हम देशद्रोही तो नहीं हैं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को चुनौतियां हैं, ऐसे समय में प्रधानमंत्री को विपक्ष को साथ लेकर देश का हित सोचना चाहिए। लेकिन मौजूदा रवैया लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।”
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर सवाल
उद्धव ने बिहार की वोटर लिस्ट में अचानक वोटरों की संख्या बढ़ने पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
“लोकसभा चुनाव के नतीजों के बिल्कुल उलट विधानसभा चुनाव में परिणाम आए। इन दोनों चुनावों के बीच सिर्फ पांच-छह महीने का अंतर था। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में वोटर कैसे बढ़ गए? ये लोग कहां से आए?”
उनका मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और चुनाव आयोग को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अगले कुछ महीनों में देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार इन आरोपों को बेबुनियाद बता रही है।
उद्धव ठाकरे के बयान और INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन से यह साफ है कि आने वाले चुनावों में वोटर लिस्ट की पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाला है।
उद्धव ठाकरे का यह बयान न केवल केंद्र सरकार और बीजेपी के खिलाफ तीखा राजनीतिक हमला है, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है।
चुनाव आयोग की भूमिका, वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता और विपक्ष के अधिकार — ये सभी मुद्दे अब देश की राजनीति में और गर्मी ला सकते हैं।
Uddhav Thackeray, leader of Shiv Sena (UBT) and former Maharashtra Chief Minister, has accused the BJP of hiding alleged voter list manipulation in Bihar. Supporting Rahul Gandhi’s concerns, Thackeray criticized the detention of INDIA alliance MPs who were marching to the Election Commission to protest against vote theft. He questioned the sudden rise in voters between the Lok Sabha and Assembly elections, demanding transparency from the Election Commission of India. The incident highlights growing political tensions ahead of upcoming state polls and raises serious concerns over the fairness of India’s democratic process.


















