AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए राज्य में बड़े स्तर पर तबादले किए हैं। शुक्रवार को जारी आदेश में 7 आईपीएस और 7 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल दी गईं। इन तबादलों में सबसे ज्यादा चर्चा बदायूं जिले की है, जहां हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के दो अधिकारियों की दिनदहाड़े हत्या के बाद वहां के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. बृजेश कुमार सिंह को पद से हटा दिया गया।
सरकार ने उन्हें साइडलाइन करते हुए लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय के लॉजिस्टिक्स विभाग में पुलिस अधीक्षक के पद पर भेज दिया है। वहीं कासगंज में तैनात आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा को प्रमोशन देते हुए बदायूं का नया पुलिस कप्तान नियुक्त किया गया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब बदायूं में हुई दोहरी हत्या के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे थे।
HPCL के दो अधिकारियों की हत्या से मचा हड़कंप
बदायूं में गुरुवार को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के दो अधिकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी।
मारे गए अधिकारियों में
सुधीर गुप्ता (55) – डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM)
हर्षित मिश्रा (35) – असिस्टेंट मैनेजर
बताया गया कि आरोपी अजय प्रताप सिंह ने प्लांट के बाहर दोनों अधिकारियों पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और शुक्रवार सुबह उसका हाफ एनकाउंटर कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
धमकियों की जानकारी होने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी अजय प्रताप सिंह पहले प्लांट से जुड़ा हुआ था। वह आउटसोर्स कर्मचारी था और पराली सप्लाई का ठेका संभालता था। लेकिन बाद में कंपनी ने उसकी फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया था।
इसके बाद से वह अधिकारियों से नाराज चल रहा था और लगातार उन्हें धमकियां दे रहा था।
जानकारी के मुताबिक, सुधीर गुप्ता ने 4 फरवरी को मुसाझाग थाने में अजय प्रताप सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने कहा था कि आरोपी लगातार उनका पीछा कर रहा है और जान से मारने की धमकी दे रहा है।
इसके बावजूद पुलिस ने समय रहते कोई सख्त कदम नहीं उठाया। इसी लापरवाही को लेकर पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डर के कारण अधिकारी ने लिया था VRS
हत्या के बाद सामने आए तथ्यों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया गया कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण सुधीर गुप्ता काफी डरे हुए थे।
उन्होंने अपनी नौकरी से 5 साल पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन दे दिया था। यह आवेदन मंजूर भी हो चुका था और उनकी नौकरी का आखिरी दिन 31 मार्च तय किया गया था।
दूसरी ओर, असिस्टेंट मैनेजर हर्षित मिश्रा ने भी सुरक्षा कारणों से ट्रांसफर के लिए आवेदन दिया था। लेकिन उससे पहले ही दोनों की हत्या कर दी गई।
बदायूं SSP को हटाने का फैसला
इस पूरे मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई की।
बदायूं के SSP डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जो 24 जून 2024 से जिले में तैनात थे, उन्हें हटा दिया गया। लगभग डेढ़ साल से अधिक समय तक जिले की कमान संभालने के बाद अब उन्हें लखनऊ में लॉजिस्टिक्स विभाग में भेज दिया गया है।
उनकी जगह कासगंज की SP अंकिता शर्मा को बदायूं का नया पुलिस कप्तान बनाया गया है। अंकिता शर्मा को तेज-तर्रार अधिकारी माना जाता है और सरकार ने उन्हें बड़े जिले की जिम्मेदारी दी है।
फतेहपुर SP भी हटाए गए
बदायूं के साथ-साथ फतेहपुर जिले में भी पुलिस प्रशासन में बदलाव किया गया है।
फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार सिंह को हटाकर पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय में अटैच कर दिया गया है।
उनकी जगह भदोही के SP अभिमन्यु मांगलिक को फतेहपुर का नया पुलिस कप्तान बनाया गया है।
फतेहपुर में तीन मौतों का मामला बना वजह
फतेहपुर में हाल ही में एक परिवार के तीन सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया था। यह घटना 10 मार्च को चौफेरवा गांव में हुई थी।
मौके से मिले सुसाइड नोट में आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग उन्हें एससी-एसटी एक्ट के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे थे। परिवार के बेटे ने कर्ज और धमकियों से परेशान होकर यह कदम उठाने की बात लिखी थी।
इस मामले में पुलिस ने दो वकीलों सहित पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था।
लेकिन जब वकीलों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस कोर्ट परिसर पहुंची तो वहां भारी विरोध और हंगामा हो गया। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठे और आखिरकार SP का तबादला कर दिया गया।
अन्य IPS अधिकारियों के भी तबादले
राज्य सरकार ने इसी आदेश में कई अन्य आईपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी बदली हैं।
ओम प्रकाश सिंह (2018 बैच) को कासगंज का नया SP बनाया गया है।
अभिनव त्यागी (2019 बैच) को भदोही का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।
निमिष दशरथ पाटिल (2020 बैच) को गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट से हटाकर गोरखपुर में अपर पुलिस अधीक्षक नगर बनाया गया है।
इन तबादलों को प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
7 वरिष्ठ IAS अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी बदलीं
आईपीएस अधिकारियों के साथ-साथ राज्य सरकार ने 7 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभागों में भी बदलाव किया है।
इसमें प्रमुख बदलाव लोक निर्माण विभाग और गृह विभाग में हुआ है।
प्रकाश बिंदु को लोक निर्माण विभाग से हटाकर गृह विभाग का सचिव बनाया गया।
डॉ. लोकेश एम को सचिव, लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई।
महेंद्र प्रसाद को उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय विभाग में विशेष सचिव बनाया गया।
नीना शर्मा को मिला अतिरिक्त प्रभार
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नीना शर्मा को सार्वजनिक उद्यम विभाग की प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें महानिदेशक, सार्वजनिक उद्यम का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
वहीं संजय कुमार को उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी का निदेशक बनाया गया है।
इसके अलावा
रघुवीर को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में विशेष सचिव बनाया गया
आशीष कुमार को धर्मार्थ कार्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया
प्रशासनिक बदलाव का उद्देश्य
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए यह कदम उठाया है। बदायूं हत्याकांड और फतेहपुर की घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
ऐसे में बड़े पैमाने पर किए गए ये तबादले सरकार के उस संदेश को दिखाते हैं कि कानून-व्यवस्था के मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
The Uttar Pradesh government carried out a major administrative reshuffle by transferring seven IPS and seven senior IAS officers. The move came after the shocking murder of two HPCL officials in Badaun, which raised serious concerns about police negligence. Badaun SSP Brajesh Kumar Singh was removed and shifted to the logistics department, while Kasganj SP Ankita Sharma was promoted and appointed as the new police chief of Badaun. The transfer list also included changes in Fatehpur, Bhadohi, and other districts, highlighting the state government’s focus on strengthening law and order and ensuring accountability in the police administration.


















