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प्रश्नपत्र में आरएसएस को लेकर विवाद: प्रोफेसर पर परीक्षा कार्यों से आजीवन प्रतिबंध!

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प्रश्नपत्र में आरएसएस को लेकर विवाद: प्रोफेसर पर परीक्षा कार्यों से आजीवन प्रतिबंध

Uttar Pradesh: Professor Banned for Life Over RSS Questions in University Exam

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) ने मेरठ कॉलेज की राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर डॉ. सीमा पवार को परीक्षा कार्यों से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया है। यह फैसला एक विवादित प्रश्नपत्र को लेकर लिया गया है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े दो सवालों पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा ऐतराज जताया था।

विवाद की शुरुआत

यह विवाद 2 अप्रैल को आयोजित एमए राजनीति विज्ञान के अंतिम वर्ष की परीक्षा से शुरू हुआ। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र में दो ऐसे सवाल शामिल थे, जिनमें आरएसएस को नकारात्मक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया था।

पहला सवाल, सवाल 87, इस प्रकार था:

“निम्न में से किसे परमाणु समूह नहीं माना जाता है?”

विकल्पों में शामिल थे:

(A) दल खालसा

(B) नक्सली समूह

(C) जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट

(D) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

इस सवाल में आरएसएस को एक ऐसा संगठन बताया गया था जो समाज से अलग-थलग है, जिसे एबीवीपी ने अपमानजनक बताया।

दूसरा सवाल, सवाल 93, एक मिलान-करो (Match the Following) प्रश्न था, जिसमें विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों को संगठनों से जोड़ा गया था:

A. पिछड़ा वर्ग राजनीति का उदय – मंडल आयोग

B. दलित राजनीति का उदय – बीएसपी

C. धार्मिक और जातिगत पहचान की राजनीति का उदय – आरएसएस

D. क्षेत्रीय पहचान की राजनीति का उदय – शिवसेना

एबीवीपी ने आपत्ति जताई कि आरएसएस को “धार्मिक और जातिगत पहचान की राजनीति” से जोड़ना अनुचित है और इससे संगठन की छवि धूमिल होती है।

एबीवीपी का विरोध और ज्ञापन

एबीवीपी ने इस प्रश्नपत्र को राष्ट्रविरोधी विचारधारा से प्रेरित बताया और आरोप लगाया कि प्रोफेसर की मानसिकता भारत-विरोधी है। संगठन ने कहा कि आरएसएस पिछले 100 वर्षों से एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन के रूप में काम कर रहा है और छात्रों के बीच उसकी नकारात्मक छवि बनाना गलत है।

मेरठ विंग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।

विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद को गंभीरता से लेते हुए, विश्वविद्यालय के कुलपति ने एक जांच समिति गठित की। समिति ने पाया कि छात्रों द्वारा ‘आपत्तिजनक’ बताए गए प्रश्न वाकई विवादास्पद थे। इसके बाद प्रोफेसर डॉ. सीमा पवार से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया।

प्रोफेसर पवार ने अपनी गलती स्वीकार की और बताया कि उनकी मंशा किसी संगठन को बदनाम करने की नहीं थी। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि यह प्रश्न पाठ्यक्रम में शामिल एक अध्याय के आधार पर तैयार किए गए थे।

प्रोफेसर पर कार्रवाई

हालांकि उन्होंने खेद जताया और माफी भी मांगी, विश्वविद्यालय ने उन्हें परीक्षा से संबंधित सभी कार्यों — जैसे प्रश्नपत्र बनाना, मूल्यांकन करना आदि — से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने जानकारी दी कि 5 अप्रैल को इस संबंध में निर्णय लिया गया और आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, क्योंकि प्रोफेसर ने अपनी गलती मान ली है और माफी मांग ली है।

A major controversy erupted in Uttar Pradesh after a political science exam at Chaudhary Charan Singh University included controversial questions about the RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh). Dr. Seema Pawar, the professor who prepared the question paper, faced criticism from ABVP and was accused of promoting an anti-national ideology. As a result, she has been permanently banned from all examination-related duties. This incident highlights growing tensions in educational institutions over political content in academics and draws attention to academic freedom, RSS controversy, professor banned, and education news from Uttar Pradesh.

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