AIN NEWS 1: अमेरिका में दवाओं की बढ़ती कीमतें लंबे समय से आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई हैं। इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक नए सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘TrumpRx’ को लॉन्च करने की तैयारी की है। इस प्लेटफॉर्म का मकसद मरीजों को सीधे दवा कंपनियों से जोड़ना है, ताकि वे बिना बिचौलियों के कम कीमत पर जरूरी दवाएं खरीद सकें।
सरकार का दावा है कि TrumpRx के जरिए अमेरिकी नागरिकों को महंगी प्रिस्क्रिप्शन दवाओं पर बड़ी राहत मिलेगी और उनका मासिक मेडिकल खर्च काफी हद तक कम हो सकेगा।
TrumpRx कैसे करेगा काम?
TrumpRx को एक सरकारी वेबसाइट के रूप में तैयार किया जा रहा है, जहां मरीज:
अपनी डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं की जानकारी अपलोड कर सकेंगे
अलग-अलग दवा कंपनियों द्वारा दी जा रही कीमतों की तुलना कर सकेंगे
सीधे फार्मास्युटिकल कंपनियों से दवाएं ऑर्डर कर सकेंगे
थोक या रियायती दरों पर दवाएं प्राप्त कर सकेंगे
इस मॉडल में पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स और फार्मेसी चेन की भूमिका काफी हद तक सीमित हो जाएगी। यही वजह है कि यह प्लेटफॉर्म लॉन्च से पहले ही दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर्स के लिए चिंता का कारण बन गया है।
सरकार का दावा: आम जनता को होगा बड़ा फायदा
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका में दवाओं की कीमतें दुनिया के कई देशों की तुलना में कहीं ज्यादा हैं। इसकी बड़ी वजह है—बीच में मौजूद कई स्तरों वाले बिचौलिये, जिनमें फार्मेसी बेनेफिट मैनेजर्स (PBMs), रिटेल स्टोर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स शामिल हैं।
TrumpRx इन सभी परतों को हटाकर मरीज और निर्माता के बीच सीधा संपर्क स्थापित करेगा। सरकार के मुताबिक इससे:
दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता आएगी
प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
मरीजों को सस्ती और समय पर दवाएं मिलेंगी
हेल्थकेयर सिस्टम पर आर्थिक दबाव कम होगा
मेडिकल स्टोर्स और फार्मा कंपनियां क्यों हैं परेशान?
TrumpRx के प्रस्ताव ने अमेरिकी फार्मा इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। खासकर:
रिटेल मेडिकल स्टोर्स को डर है कि उनका कारोबार सीधा प्रभावित होगा
फार्मेसी चेन को ग्राहकों की संख्या घटने की आशंका है
PBMs की भूमिका लगभग खत्म हो सकती है
कई दवा कंपनियों का मानना है कि सरकारी प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे बिक्री करने से उन्हें कीमतें कम करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ेगा।
डेमोक्रेट सांसदों के गंभीर सवाल
जहां एक तरफ ट्रंप प्रशासन TrumpRx को आम जनता के लिए फायदेमंद बता रहा है, वहीं डेमोक्रेट पार्टी के कई सांसदों ने इस योजना पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
उनके मुख्य सवाल हैं:
क्या इससे डॉक्टरों पर किसी खास कंपनी की दवा लिखने का दबाव बढ़ेगा?
क्या यह हितों के टकराव (Conflict of Interest) को जन्म देगा?
क्या दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से समझौता होगा?
क्या सरकार खुद एक व्यावसायिक खिलाड़ी बन रही है?
डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि अगर सही रेगुलेशन नहीं हुआ तो TrumpRx मरीजों की बजाय बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का जरिया बन सकता है।
इलाज की गुणवत्ता पर उठे सवाल
एक और बड़ा मुद्दा यह है कि अगर मरीज सस्ती दवा के लालच में बिना पूरी मेडिकल सलाह के खरीदारी करने लगें, तो इससे इलाज की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। आलोचकों का मानना है कि:
मरीज खुद दवा बदलने की कोशिश कर सकते हैं
डॉक्टर-मरीज संबंध कमजोर हो सकता है
गलत या अनावश्यक दवाएं लिखे जाने का खतरा बढ़ सकता है
हालांकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर सिर्फ वैध प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
TrumpRx: सुधार या सियासी दांव?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, TrumpRx सिर्फ एक हेल्थकेयर सुधार नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। अमेरिका में दवाओं की कीमतें हमेशा से चुनावी मुद्दा रही हैं और ट्रंप इसे आम जनता के हित में उठाए गए कदम के तौर पर पेश कर रहे हैं।
अगर यह योजना सफल होती है, तो यह अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकती है। वहीं अगर इसमें खामियां रहीं, तो यह प्रशासन के लिए विवाद का कारण भी बन सकती है।
TrumpRx एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसने लॉन्च से पहले ही अमेरिका की फार्मा इंडस्ट्री, मेडिकल स्टोर्स और राजनीति—तीनों में हलचल पैदा कर दी है। एक ओर यह आम मरीजों के लिए राहत की उम्मीद जगाता है, तो दूसरी ओर इसके संभावित जोखिमों को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि TrumpRx वास्तव में दवा कीमतों को कम करने में कितना सफल होता है और क्या यह अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में एक स्थायी बदलाव ला पाता है या नहीं।
TrumpRx is a proposed US government healthcare platform designed to reduce prescription drug costs by enabling patients to purchase medicines directly from pharmaceutical companies. Introduced under the Trump administration, the initiative aims to increase price transparency, eliminate middlemen, and lower healthcare expenses, while raising concerns about drug safety, conflicts of interest, and the future of retail pharmacies in the United States.


















