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गन्ना मूल्य बढ़ोतरी पर बोले राकेश टिकैत – “रेट 400 तो हुआ, लेकिन पार नहीं हुआ”!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025–26 के लिए गन्ने का समर्थन मूल्य 30 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के किसानों में राहत और खुशी की लहर जरूर दिखी, लेकिन भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने इसे “अधूरा कदम” बताया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने गन्ने का रेट 400 रुपये प्रति क्विंटल तक तो पहुंचा दिया, लेकिन “400 पार” नहीं कराया। अगर यह रेट 400 रुपये से ऊपर होता, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “पूरी बधाई” दी जाती।

टिकैत बोले – महंगाई के दौर में यह बढ़ोतरी नाकाफी

राकेश टिकैत ने कहा कि जिस तरह देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है, किसानों के लिए यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, “खाद, डीज़ल और कीटनाशकों के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में सिर्फ 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किसानों की लागत को कवर नहीं कर सकती।”

उन्होंने जोड़ा कि हर बार सरकार केवल छोटी बढ़ोतरी करके किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। “अगर सरकार सच में किसानों की चिंता करती है, तो उसे गन्ने की लागत और बाजार की स्थिति दोनों को ध्यान में रखना चाहिए,” टिकैत ने कहा।

हरियाणा से तुलना: यूपी के किसानों को अब भी नुकसान

भाकियू प्रवक्ता ने कहा कि गन्ने के रेट को लेकर उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच हमेशा प्रतिस्पर्धा रहती है, लेकिन इस बार भी हरियाणा आगे निकल गया है।

“हरियाणा में अर्ली वैरायटी का रेट पहले ही 400 रुपये है, जबकि सामान्य प्रजाति का 390 रुपये प्रति क्विंटल। यूपी सरकार ने भी अर्ली वैरायटी को 400 रुपये का रेट दिया है, लेकिन सामान्य गन्ने के लिए यह रेट अब भी 390 रुपये ही है। यह असमानता किसानों के साथ अन्याय है,” टिकैत ने कहा।

उन्होंने कहा कि शुगर मिलें अब भी कई गन्ना किस्मों को ‘रिजेक्ट’ करती हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। “सरकार को यह व्यवस्था बदलनी चाहिए ताकि हर किसान का गन्ना खरीदा जा सके,” उन्होंने जोड़ा।

 “400 पार होता तो योगी जी को देते पूरी बधाई”

राकेश टिकैत ने हंसते हुए कहा, “अगर गन्ने का रेट 400 पार होता, तो हम मुख्यमंत्री योगी जी को दिल से बधाई देते। लेकिन सरकार हर बार ‘पार’ करने से पहले रुक जाती है।”

उन्होंने कहा कि किसानों की कई सालों से यह मांग रही है कि गन्ने का रेट 400 रुपये से ऊपर होना चाहिए, लेकिन सरकार ने अब तक इस मांग को पूरी तरह नहीं माना। “पहले भी कई बार घोषणा हुई, लेकिन कभी अमल नहीं हुआ,” टिकैत ने याद दिलाया।

किसानों के आंदोलन का श्रेय

भाकियू नेता ने कहा कि यह बढ़ोतरी किसानों के दबाव का नतीजा है।

“हमने हर जिले में आंदोलन किए, धरने दिए, और सरकार पर दबाव बनाया। यही वजह है कि आज सरकार को गन्ना मूल्य बढ़ाना पड़ा,” उन्होंने कहा।

टिकैत ने प्रदेश के सभी भाकियू पदाधिकारियों और किसानों का धन्यवाद किया और कहा कि यह जीत पूरी तरह किसानों की एकजुटता की वजह से संभव हुई है।

धान किसानों की स्थिति पर भी चिंता

राकेश टिकैत ने सरकार से धान खरीद को लेकर गंभीरता दिखाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसानों से धान बहुत सस्ते दामों पर खरीदा जा रहा है, जिससे उन्हें घाटा हो रहा है।

“कई किसान अच्छे दाम की उम्मीद में हरियाणा में धान बेचने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें वहां जाने से रोका जाता है। अगर प्रधानमंत्री ने कहा है कि किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं, तो फिर यूपी के किसानों को क्यों रोका जा रहा है?” टिकैत ने सवाल किया।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अन्य फसलों जैसे गेहूं, धान और दलहन पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि किसान हर फसल से उचित लाभ कमा सकें।

किसानों की उम्मीदें अभी भी बाकी

टिकैत ने कहा कि गन्ने का रेट बढ़ने से किसानों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की लागत, जल संकट, बिजली दरों और खेती के अन्य खर्चों पर भी ध्यान देना होगा।

“किसान सिर्फ गन्ने से नहीं जी सकता। सरकार को कृषि की पूरी व्यवस्था पर नजर डालनी चाहिए ताकि आने वाले समय में किसान आत्मनिर्भर बन सके,” उन्होंने कहा।

राकेश टिकैत के बयान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि गन्ने का मुद्दा सिर्फ दाम का नहीं, बल्कि किसान की सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है।

भले ही सरकार ने 30 रुपये की बढ़ोतरी की हो, लेकिन किसानों के दिल में यह सवाल अब भी बाकी है — “क्या यह बढ़ोतरी पर्याप्त है?”

BKU leader Rakesh Tikait has reacted to the Uttar Pradesh government’s sugarcane price hike of ₹30 per quintal for the 2025–26 crushing season. He said the sugarcane rate reached ₹400 but didn’t cross the mark, calling the increase inadequate amid rising inflation and fertilizer costs. Tikait also compared UP’s rate with Haryana’s higher sugarcane prices, crediting the BKU protests for forcing the government’s decision. He urged CM Yogi Adityanath to ensure fair prices for other crops like paddy and wheat, emphasizing the farmers’ right to sell their produce anywhere in India.

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