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मेरठ में वसूलीबाज पुलिसकर्मियों का गिरोह बेनकाब, झूठी सूचनाएं देकर खुद करते थे कार्रवाई और वसूली!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस विभाग की छवि को झटका देने वाला मामला सामने आया है। यहां डायल 112 पर तैनात पांच पुलिसकर्मियों के एक गिरोह का खुलासा हुआ है, जो बेहद चालाकी से अवैध वसूली कर रहे थे। ये पुलिसकर्मी खुद ही कंट्रोल रूम में झूठी सूचनाएं भेजते थे और फिर उसी घटना स्थल पर जाकर कार्रवाई के नाम पर पैसे वसूलते थे। हैरानी की बात यह है कि वसूली के बाद ये लोग कंट्रोल रूम में फोन कर शिकायत को “फर्जी” बताकर क्लोज भी करा देते थे।

मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब एक फीडबैक कॉल के दौरान कंट्रोल रूम को यह पता चला कि शिकायत करने वाला नंबर तो किसी आम व्यक्ति का था, लेकिन कॉल पुलिसकर्मियों ने खुद की थी। जांच आगे बढ़ी तो पूरा खेल सामने आ गया।

 कैसे करते थे यह खेल?

एसएसपी मेरठ विपिन ताडा के अनुसार, यह पूरा गिरोह परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र में डायल 112 की पीआरबी (पुलिस रिस्पांस वाहन) पर दो शिफ्टों में गश्त करता था। ड्यूटी के दौरान ये पुलिसकर्मी किसी राहगीर से फोन मांगकर खुद ही कंट्रोल रूम में कॉल करते और किसी अपराध, जैसे—शराब बेचने या झगड़े की झूठी सूचना देते।

क्योंकि ये उसी क्षेत्र में गश्त कर रहे होते थे, इसलिए कंट्रोल रूम से घटना की लोकेशन देखकर इन्हें ही उस इवेंट पर भेज दिया जाता था। मौके पर पहुंचकर ये “कार्रवाई” के नाम पर इलाके के दुकानदारों या शराब बेचने वालों से पैसे वसूलते और फिर कंट्रोल रूम में कॉल कर देते कि “सूचना फर्जी थी”। इसके बाद शिकायत को क्लोज करा देते थे।

ऐसे हुआ खुलासा

इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब कंट्रोल रूम से फीडबैक के लिए फोन किया गया। जिस नंबर से शिकायत आई थी, उस नंबर के मालिक ने बताया कि उसने कोई कॉल नहीं की थी — बल्कि पुलिस वालों ने उसका फोन लेकर खुद ही कॉल किया था। यह सुनकर कंट्रोल रूम अधिकारियों को संदेह हुआ। मामला तुरंत एसएसपी मेरठ को रिपोर्ट किया गया।

एसएसपी विपिन ताडा ने जांच के आदेश दिए। तकनीकी और आंतरिक जांच में साफ हुआ कि पांचों पुलिसकर्मी झूठी सूचनाएं देकर खुद ही वसूली करते थे। जांच में ये पुलिसकर्मी दोषी पाए गए, जिसके बाद सभी को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

कौन-कौन थे इस गिरोह में शामिल?

पुलिस जांच में सामने आया कि वसूली करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान हेड कांस्टेबल यशपाल सिंह, प्रमोद कुमार, जितेंद्र कुमार, चालक राजन और होमगार्ड सुशील कुमार के रूप में हुई है। ये सभी पुलिसकर्मी परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र की पीआरवी UP32DG 6343 पर तैनात थे।

एसएसपी ने बताया कि इन पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है। वहीं, होमगार्ड सुशील कुमार के खिलाफ रिपोर्ट उसके विभागीय कमांडेंट को भेज दी गई है ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

मेरठ पुलिस ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी और अनुशासनहीनता का मुकदमा दर्ज किया है। एसएसपी ने कहा कि इस तरह का कृत्य न केवल कानून का मजाक उड़ाने वाला है, बल्कि पुलिस विभाग की छवि को भी धूमिल करता है।

उन्होंने कहा कि विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी पुलिसकर्मी ऐसी हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।

लोगों में गुस्सा और सवाल

यह मामला सामने आने के बाद मेरठ के आम नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर वही पुलिस जो सुरक्षा देने के लिए है, खुद अवैध वसूली करने लगे तो जनता भरोसा किस पर करे? कई नागरिक संगठनों ने इस मामले में आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

सोशल मीडिया पर भी यह खबर वायरल हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अन्य जिलों में भी ऐसी गिरोहबाजियां चल रही हैं? क्या सरकार को अब पुलिस सुधारों पर दोबारा ध्यान नहीं देना चाहिए?

एसएसपी का सख्त रुख

एसएसपी विपिन ताडा ने कहा है कि “मेरठ पुलिस का हर अधिकारी और जवान जनता की सेवा के लिए है, न कि व्यक्तिगत लाभ के लिए। अगर कोई पुलिसकर्मी इस मर्यादा को तोड़ता है तो वह यूनिफॉर्म का अपमान करता है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि सभी थानों और डायल 112 की यूनिट्स में रैंडम जांच की जाएगी ताकि ऐसी गतिविधियों को रोका जा सके।

मेरठ का यह मामला केवल कुछ पुलिसकर्मियों की गलती नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद उन कमजोरियों की ओर इशारा करता है जिनका फायदा भ्रष्ट लोग उठा लेते हैं। पुलिस का काम कानून और जनता की रक्षा करना है, लेकिन जब यही पुलिसकर्मी गलत रास्ता अपनाते हैं, तो समाज का भरोसा डगमगा जाता है।

फिलहाल इन पांचों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई जारी है। मेरठ पुलिस प्रशासन का कहना है कि ऐसी घटनाओं को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

In a shocking case from Meerut, Uttar Pradesh, a group of five Dial 112 policemen were caught running an extortion racket by making fake emergency calls to the control room and responding to them themselves. The accused — including Head Constable Yashpal Singh, Pramod Kumar, Jitendra Kumar, driver Rajan, and Homeguard Sushil Kumar — were suspended by SSP Vipin Tada after a detailed investigation exposed their bribery and fraud. The case highlights the urgent need for reforms to prevent police corruption in UP and restore public trust in law enforcement.

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