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यूपी में मतदाता सूची का SIR बना बीजेपी की चिंता, केंद्रीय नेतृत्व ने संभाला मोर्चा!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की चिंता बढ़ा दी है। शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने की खबरों के बाद पार्टी ने इसे सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा मानते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।

बीजेपी को आशंका है कि अगर समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अब यह मामला सीधे केंद्रीय नेतृत्व के हाथों में ले लिया गया है और इसे मिशन मोड में निपटाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

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शहरी इलाकों में नाम कटने से बढ़ी परेशानी

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यूपी के कई बड़े शहरों और कस्बों में मतदाता सूची से नाम हटने की संख्या अपेक्षा से कहीं ज्यादा सामने आई है। खासतौर पर वे इलाके प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां बीजेपी को परंपरागत रूप से अच्छा समर्थन मिलता रहा है।

बीजेपी नेताओं का मानना है कि बड़ी संख्या में नाम कटने से न सिर्फ वोट प्रतिशत घट सकता है, बल्कि इससे मतदाताओं में नाराजगी और भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है। कई जगहों से शिकायतें मिली हैं कि लोग नियमित रूप से मतदान करते रहे हैं, इसके बावजूद उनका नाम सूची से गायब है।

केंद्रीय नेतृत्व हुआ सक्रिय

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस पूरे अभियान की सीधी निगरानी शुरू कर दी है। पार्टी ने ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद के. लक्ष्मण को इस अहम जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया है।

के. लक्ष्मण को निर्देश दिए गए हैं कि वे राज्य स्तर पर संगठन और चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

फॉर्म-6 अभियान पर खास जोर

बीजेपी ने नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए फॉर्म-6 अभियान को पूरी ताकत से चलाने का फैसला किया है। पार्टी संगठन को साफ निर्देश दिए गए हैं कि:

हर बूथ स्तर पर नए मतदाताओं और हटाए गए नामों की पहचान की जाए

फॉर्म-6 भरवाने में लोगों की पूरी मदद की जाए

रोजाना की प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाए

सबसे अहम बात यह है कि अब हर दिन की बूथ-वार रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी, ताकि जमीनी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके।

मिशन मोड में बीजेपी संगठन

बीजेपी इसे सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं मान रही, बल्कि इसे राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा मानकर आगे बढ़ रही है। पार्टी ने अपने बूथ अध्यक्षों, मंडल प्रभारी और जिला स्तर के नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे:

घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करें

लोगों को SIR प्रक्रिया के बारे में समझाएं

नाम कटने की स्थिति में तुरंत समाधान दिलवाएं

पार्टी का मानना है कि अगर मतदाता को समय पर जानकारी और सहयोग मिले, तो नाराजगी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

विपक्ष भी कर रहा सवाल

विपक्षी दल पहले ही SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि शहरी और अल्पसंख्यक इलाकों में नाम कटने की संख्या ज्यादा है। ऐसे में बीजेपी किसी भी तरह का राजनीतिक नुकसान उठाने के मूड में नहीं है और हर कदम बेहद सतर्कता से उठा रही है।

चुनावी नजरिए से क्यों अहम है SIR?

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी जीत का गणित मतदाता सूची की सटीकता पर काफी हद तक निर्भर करता है। अगर लाखों योग्य मतदाता वोट डालने से वंचित रह जाते हैं, तो इसका सीधा असर नतीजों पर पड़ सकता है।

इसी वजह से बीजेपी इस पूरी प्रक्रिया को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन की सक्रियता ही इस चुनौती से निपटने का सबसे बड़ा हथियार है।

आने वाले दिनों में बढ़ेगी गतिविधि

सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बीजेपी के वरिष्ठ नेता जिलों का दौरा कर सकते हैं। संगठन स्तर पर बैठकें तेज होंगी और चुनाव आयोग से लगातार संवाद बनाए रखा जाएगा।

पार्टी का साफ संदेश है—हर योग्य मतदाता का नाम सूची में होना चाहिए, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

The Special Intensive Revision (SIR) of the voter list in Uttar Pradesh has emerged as a critical political issue ahead of upcoming elections. The BJP has taken swift action after reports of large-scale voter name deletions in urban areas. With central leadership directly monitoring the process and a focused Form 6 campaign underway, the party aims to ensure voter inclusion, protect its support base, and strengthen its election strategy in Uttar Pradesh.

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