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उत्तर प्रदेश में जीरो फेटालिटी मॉडल को मजबूत करने के लिए 3-दिवसीय प्रशिक्षण: 20 जिलों के अधिकारियों ने लिया हिस्सा!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य की ओर ले जाने के लक्ष्य के साथ प्रदेश सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। इसी दिशा में, डीजीपी उत्तर प्रदेश के निर्देश और एडीजी ट्रैफिक के मार्गदर्शन में पुलिस मुख्यालय (PHQ) लखनऊ में “जीरो फेटालिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD)” विषय पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में प्रदेश के उन 20 जिलों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए, जिन्हें सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए चिन्हित किया गया है।

ZFD यानी सड़क दुर्घटनाओं में शून्य मृत्यु का लक्ष्य

“जीरो फेटालिटी डिस्ट्रिक्ट” योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि हर जिले में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को कम करके ‘शून्य’ की स्थिति तक लाया जा सके। यह मॉडल उन जिलों पर फोकस करता है जहाँ सड़क दुर्घटनाओं के मामले अधिक हैं, लेकिन सही प्रयास किए जाएँ तो इन घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों को इस मॉडल की तकनीकी समझ के साथ-साथ जमीन पर लागू करने के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। यह बताया गया कि कैसे छोटे-छोटे बदलाव और बेहतर समन्वय के जरिए सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी कमी लाई जा सकती है।

प्रशिक्षण में शामिल विभागों ने साझा किए अनुभव

इस तीन दिवसीय ट्रेनिंग में केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य सेवाएँ, नगर निकाय, फायर सर्विस, और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी भी शामिल रहे। सभी विभागों ने सड़क सुरक्षा के अपने-अपने अनुभव और चुनौतियों को साझा किया।

इन विभागों का संयुक्त प्रयास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी सड़क दुर्घटना की रोकथाम से लेकर घायल व्यक्ति को समय पर इलाज उपलब्ध कराने तक, हर चरण में इनके बीच समन्वय अनिवार्य होता है।

ट्रेनिंग में किन-किन बिंदुओं पर फोकस किया गया?

1. ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार

– जिन स्थानों पर बार-बार सड़क हादसे होते हैं, उन्हें ‘ब्लैक स्पॉट’ कहा जाता है।

– प्रशिक्षण में ऐसे ब्लैक स्पॉट्स को पहचानने, चिह्नित करने और तकनीकी टीम की मदद से सुधरवाने की प्रक्रिया समझाई गई।

2. ट्रैफिक मैनेजमेंट और सिग्नलिंग सिस्टम

– आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट तकनीकों और स्मार्ट सिग्नलिंग सिस्टम के उपयोग पर जोर दिया गया।

– जिलों को सलाह दी गई कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार ट्रैफिक सिस्टम को मजबूत किया जाए।

3. स्पीड कंट्रोल और हेलमेट-सीटबेल्ट अनुपालन

– दुर्घटनाओं में स्पीड का बड़ा योगदान होता है।

– प्रशिक्षण में बताया गया कि कैसे स्पीड कंट्रोल अभियान और जागरूकता कार्यक्रम प्रभावी हो सकते हैं।

4. इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम (Golden Hour Management)

– हादसा होने के बाद पहले एक घंटे को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है।

– इस दौरान सही उपचार मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।

– जिलों को यह निर्देश दिए गए कि एंबुलेंस सेवाओं, अस्पतालों और पुलिस के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन बनाया जाए।

5. जन-जागरूकता कार्यक्रम

– सड़क सुरक्षा को लेकर जनता को जागरूक करना बेहद जरूरी है।

– प्रतिभागियों को बताया गया कि स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों और गांवों में व्यापक जागरूकता अभियान कैसे चलाए जा सकते हैं।

ADG Traffic का दिशा-निर्देश और नेतृत्व

प्रशिक्षण के दौरान एडीजी ट्रैफिक द्वारा लगातार समीक्षा और मार्गदर्शन किया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “जिलों में सड़क सुरक्षा तभी मजबूत होगी, जब सभी विभाग मिलकर काम करेंगे। सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों को रोकना सिर्फ पुलिस का काम नहीं है, बल्कि हर विभाग और हर नागरिक की जिम्मेदारी है।”

उन्होंने अधिकारियों को उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस तरह कुछ जिलों में छोटे प्रयासों ने बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने उन जिलों की सफलता कहानियाँ भी साझा कीं, जहाँ सड़क दुर्घटनाओं में 30-40% तक कमी दर्ज हुई है।

20 चिन्हित जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना

ट्रेनिंग के दौरान 20 जिलों के लिए अलग-अलग एक्शन प्लान तैयार किए गए। हर जिले की चुनौतियाँ अलग हैं — कहीं भारी ट्रैफिक है, कहीं हाईवे की समस्या, तो कहीं लापरवाही से वाहन चलाने की आदतें।

इसलिए हर जिले को ‘कस्टम प्लान’ देने का निर्णय लिया गया।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि

नियमित रूप से सड़क सुरक्षा ऑडिट कराएँ

हर महीने प्रगति रिपोर्ट भेजें

ब्लैक स्पॉट्स पर तत्काल सुधार कराएँ

हेलमेट और सीटबेल्ट के नियमों का कड़ाई से पालन करवाएँ

स्कूलों और बाजारों में जागरूकता अभियान चलाएँ

लोगों की भागीदारी को सबसे जरूरी बताया

प्रशिक्षण का एक मुख्य संदेश यह रहा कि दुर्घटनाएँ शत-प्रतिशत रोकी नहीं जा सकतीं, लेकिन मौतों को कम किया जा सकता है। यह तभी होगा जब लोग खुद सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे।

इसके लिए पुलिस और प्रशासन को लोगों के साथ सॉफ्ट अप्रोच अपनाने की सलाह दी गई ताकि वे नियमों को ‘दंड’ नहीं, ‘सुरक्षा’ के रूप में समझें।

यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सिर्फ औपचारिकता नहीं था, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर अलग-अलग विभागों के बीच एक मजबूत कड़ी बनाने का प्रयास था। पूरे प्रशिक्षण का निचोड़ यही रहा कि “जीरो फेटालिटी डिस्ट्रिक्ट कोई सपना नहीं, बल्कि एक हासिल किया जा सकने वाला लक्ष्य है — बस सभी विभाग और जनता मिलकर काम करें।”

इस कार्यक्रम से जुड़ी सीख अब सीधे जिलों में लागू की जाएगी जिससे प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के प्रयास और तेज होंगे।

Uttar Pradesh has launched an extensive 3-day training program on the Zero Fatality District (ZFD) model at the UP Police Headquarters in Lucknow under the guidance of the ADG Traffic. Officers from 20 high-risk districts and officials from multiple departments participated to develop strategies for road accident reduction, traffic safety improvement, and black spot management. This initiative aims to strengthen road safety policies in Uttar Pradesh and move toward the goal of achieving zero road accident fatalities across identified districts.

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