AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के जौनपुर से सामने आई यह घटना न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। नीट (NEET) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में चयन पाने के लिए एक युवक ने हदें पार कर दीं। एमबीबीएस में दाखिला पाने के लिए दिव्यांग कोटे का लाभ उठाने की चाह में उसने ऐसा कदम उठाया, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है।
कौन है सूरज भास्कर?
जौनपुर का रहने वाला सूरज भास्कर एक नीट अभ्यर्थी था। वह कई वर्षों से मेडिकल कॉलेज में दाखिले की तैयारी कर रहा था। बताया जा रहा है कि नीट 2026 की परीक्षा में बेहतर रैंक हासिल न कर पाने की आशंका के चलते वह मानसिक दबाव में था। इसी दबाव ने उसे एक खतरनाक और गैरकानूनी रास्ता चुनने के लिए मजबूर कर दिया।
दिव्यांग कोटा पाने की खतरनाक योजना
मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान है, ताकि वास्तविक रूप से शारीरिक रूप से अक्षम प्रतिभाशाली छात्रों को अवसर मिल सके। लेकिन सूरज ने इसी व्यवस्था का दुरुपयोग करने की योजना बना डाली।
पुलिस जांच में सामने आया कि सूरज ने खुद को स्थायी रूप से दिव्यांग साबित करने के लिए अपना ही पैर काटने की साजिश रची। इसके लिए उसने पहले एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लिया, ताकि दर्द का अहसास कम हो सके। इसके बाद उसने अपने पैर का पंजा काट लिया।
मारपीट की झूठी कहानी
इतना ही नहीं, घटना को हादसा दिखाने के लिए सूरज ने एक झूठी कहानी भी तैयार की। उसने दावा किया कि कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की, जिसमें उसका पैर गंभीर रूप से घायल हो गया। इसी आधार पर वह दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाना चाहता था, ताकि एमबीबीएस में दिव्यांग कोटे के तहत दाखिला मिल सके।
गर्लफ्रेंड ने खोली पोल
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब सूरज की गर्लफ्रेंड ने पुलिस को सच्चाई बता दी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवती को सूरज की योजना की जानकारी थी और बाद में उसने पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दे दी।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मेडिकल रिपोर्ट की जांच में भी सूरज की कहानी झूठी साबित हुई। पुलिस को ऐसे कोई सबूत नहीं मिले, जो बाहरी हमले या मारपीट की पुष्टि करते हों।
पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि:
चोट किसी हमले की नहीं, बल्कि खुद से की गई थी
एनेस्थीसिया के इंजेक्शन के संकेत मिले
घटनास्थल पर संघर्ष के कोई निशान नहीं थे
कॉल रिकॉर्ड से पूरी योजना की पुष्टि हुई
इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने सूरज की कहानी को फर्जी करार दिया।
कानून और नैतिकता पर सवाल
यह मामला केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, प्रतिस्पर्धा के दबाव और नैतिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करता है। दिव्यांग कोटा उन छात्रों के लिए बनाया गया है, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। इस तरह की घटनाएं न सिर्फ व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि वास्तविक दिव्यांग उम्मीदवारों के अधिकारों का भी हनन करती हैं।
मेडिकल प्रवेश प्रणाली पर असर
नीट जैसी परीक्षा में पहले ही जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। हर साल लाखों छात्र सीमित सीटों के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में जब कोई उम्मीदवार धोखाधड़ी के रास्ते दाखिला पाने की कोशिश करता है, तो यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर चोट करता है।
मानसिक दबाव बना बड़ी वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों के पीछे अक्सर अत्यधिक मानसिक दबाव, असफलता का डर और सामाजिक अपेक्षाएं होती हैं। एमबीबीएस को भारत में सफलता की गारंटी माना जाता है, जिसके चलते कई युवा किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की कानूनी जांच कर रही है। सूरज भास्कर पर धोखाधड़ी, झूठी सूचना देने और सरकारी प्रक्रिया को गुमराह करने जैसे गंभीर आरोप लग सकते हैं। साथ ही मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।
A shocking incident from Jaunpur has exposed a serious loophole in the medical admission system. NEET aspirant Suraj Bhaskar allegedly amputated his own foot to obtain a fake disability certificate and secure MBBS admission under the disability quota. The MBBS admission scam came to light after police investigation and call detail records confirmed that the injury was self-inflicted. This Jaunpur NEET case has sparked nationwide debate on the misuse of disability quota and the extreme pressure faced by NEET aspirants in India.


















