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कोडीन कफ सिरप तस्करी पर बड़ा प्रहार: वाराणसी में मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता की संपत्ति कुर्क, नेटवर्क में मचा हड़कंप!

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AIN NEWS 1: कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के खिलाफ सोनभद्र पुलिस ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई करते हुए वाराणसी में बड़ी पहल की है। बहुचर्चित तस्करी मामले के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला जायसवाल की संपत्ति को कोर्ट के आदेश पर कुर्क कर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद न सिर्फ तस्करों के नेटवर्क में अफरा-तफरी मच गई है, बल्कि पुलिस ने साफ कर दिया है कि यह अभियान अभी थमने वाला नहीं है।

🔹 कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई, सुबह-सुबह पहुंची पुलिस टीम

शुक्रवार सुबह सोनभद्र पुलिस की विशेष टीम वाराणसी पहुंची और कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए भोला जायसवाल की संपत्ति को सीज कर दिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह संपत्ति तस्करी से अर्जित अवैध कमाई से बनाई गई थी। लंबे समय से चली आ रही जांच और सबूतों के आधार पर कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद यह निर्णायक कदम उठाया गया।

मेरठ के उजैद कुरैशी का आतंकी कनेक्शन, अलकायदा से जुड़ाव की जांच तेज

अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद सिर्फ एक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरे तस्करी नेटवर्क की आर्थिक रीढ़ तोड़ना है, ताकि अवैध कारोबार को जड़ से खत्म किया जा सके।

🔹 सिर्फ शुरुआत, आगे और भी होंगी कुर्की और गिरफ्तारियां

पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े अन्य आरोपियों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियां उन सभी लोगों की पहचान कर रही हैं, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस काले कारोबार से फायदा उठाया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तस्करी से कमाए गए पैसों को कई जगहों पर निवेश किया गया है—जिसमें रियल एस्टेट, फर्जी कंपनियां और मेडिकल फर्म शामिल हैं।

🔍 नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश

कोडीन युक्त कफ सिरप की यह तस्करी किसी एक जिले या राज्य तक सीमित नहीं थी। जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित गिरोह था, जिसकी शाखाएं उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदेशों तक फैली हुई थीं।

पुलिस की कई टीमें अब अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जांच में जुटी हैं। खासतौर पर बांग्लादेश और खाड़ी देशों तक पहुंची सप्लाई लाइन पर फोकस किया जा रहा है।

🗓️ पहली FIR से खुलने लगी परतें

इस पूरे मामले की शुरुआत 18 अक्टूबर को हुई, जब सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में पहली एफआईआर दर्ज की गई। दीपावली को देखते हुए जिले में वाहनों की सघन चेकिंग चल रही थी।

इसी दौरान एक्साइज विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने रात में एक ट्रक को रोका, जो त्रिपुरा की ओर जा रहा था। ऊपर से ट्रक में नमकीन की बोरियां लदी थीं, लेकिन जब गहन जांच हुई तो बोरियों के बीच कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़ी खेप छिपी मिली।

💰 3.5 करोड़ की बरामदगी, 1.19 लाख शीशियां जब्त

पुलिस ने मौके से करीब 1.19 लाख शीशियां कोडीन युक्त कफ सिरप की बरामद कीं, जिनकी बाजार कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपये आंकी गई। इस मामले में ट्रक ड्राइवर हेमंत पाल, बृजमोहन शिवहरे और मध्य प्रदेश के ट्रांसपोर्टर रामगोपाल धाकड़ को गिरफ्तार किया गया।

त्योहार का समय होने के कारण शुरुआती पूछताछ के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया, लेकिन बाद में पुलिस ने जेल में ही उनसे गहन पूछताछ की, जिससे तस्करी नेटवर्क की असली तस्वीर सामने आने लगी।

🚛 गाजियाबाद से रांची तक फैला जाल

पूछताछ में पता चला कि कफ सिरप की खेप गाजियाबाद से लोड की गई थी। इसके बाद पुलिस ने मेरठ से सौरभ त्यागी को गिरफ्तार किया। आगे की जांच में वसीम और आसिफ के नाम सामने आए।

जांच के आधार पर पुलिस ने रांची में एक और गाजियाबाद से चार ट्रक जब्त किए। इन ट्रकों में चूना और चावल की बोरियों के बीच बड़ी मात्रा में कफ सिरप छिपाकर रखा गया था। इससे साफ हो गया कि तस्करी का यह नेटवर्क बेहद सुनियोजित और बहुस्तरीय था।

🌍 दुबई और बांग्लादेश तक पहुंची तस्करी

पूछताछ के दौरान पहली बार दुबई में रह रहे आसिफ और वसीम के साथ शुभम जायसवाल का नाम खुलकर सामने आया। इन तीनों के खिलाफ गाजियाबाद के नंदग्राम थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस के अनुसार, शुभम जायसवाल के जरिए कोडीन युक्त कफ सिरप की खेप बांग्लादेश तक पहुंचाई जाती थी। यह खुलासा इस गिरोह की अंतरराष्ट्रीय पहुंच को दर्शाता है।

💸 100 करोड़ के अवैध कारोबार का आरोप

जांच के अगले चरण में शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला जायसवाल और काशी के करीब 28 दवा कारोबारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि इस नेटवर्क ने करीब 100 करोड़ रुपये की कीमत की 89 लाख शीशियां प्रतिबंधित कफ सिरप की खरीद-बिक्री की।

यह पूरा कारोबार फर्जी दस्तावेजों, शेल कंपनियों और कागजी मेडिकल स्टोरों के जरिए चलाया जा रहा था।

🏥 फर्जी मेडिकल स्टोर और बंद फर्मों का खेल

जांच में सामने आया कि काशी के 93 मेडिकल स्टोर के नाम पर करीब 84 लाख शीशियां खरीदी और बेची गईं, जबकि इनमें से अधिकांश स्टोर मौके पर अस्तित्व में ही नहीं थे।

इसके अलावा नौ बंद फर्मों के नाम पर भी लेनदेन दिखाया गया, जिनमें सृष्टि फार्मा, जीटी इंटरप्राइजेज, शिवम फार्मा, हर्ष फार्मा, डीएसए फार्मा, महाकाल मेडिकल स्टोर, निशांत फार्मा, वीपीएम मेडिकल एजेंसी और श्री बालाजी मेडिकल शामिल हैं।

⚖️ कई जिलों में दर्ज हैं केस

पुलिस के मुताबिक, सोनभद्र, जौनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, चंदौली समेत कई जिलों में शुभम जायसवाल और उसके नेटवर्क के खिलाफ मामले दर्ज हैं। पुलिस का साफ कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक उदाहरण है और आने वाले समय में पूरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा।

The Sonbhadra Police action against the codeine syrup smuggling network marks a major breakthrough in India’s fight against illegal drug trafficking. By attaching properties linked to mastermind Shubham Jaiswal in Varanasi, authorities have exposed an interstate and international racket involving fake medical stores, shell firms, and illegal export of codeine cough syrup to Bangladesh. This case highlights the scale of cough syrup trafficking in India and the increasing crackdown by law enforcement agencies.

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