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“उदयपुर फाइल्स” को लेकर बढ़ा विवाद: जमीयत उलमा-ए-हिंद ने की कोर्ट में याचिका, धार्मिक सौहार्द्र और संविधान का हवाला!

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AIN NEWS 1: फिल्म “उदयपुर फाइल्स” को लेकर देशभर में विवाद बढ़ता जा रहा है। इस फिल्म के ट्रेलर में कई ऐसे दृश्य और संवाद दिखाए गए हैं, जिन्हें लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने गहरी आपत्ति जताई है। संस्था ने इस फिल्म की रिलीज़ रोकने के लिए दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

क्या है विवाद का कारण?

फिल्म के ट्रेलर में नुपुर शर्मा के पुराने विवादास्पद बयान को भी शामिल किया गया है, जिससे पहले भी देश में सांप्रदायिक तनाव फैला था। इसका असर न सिर्फ घरेलू माहौल पर पड़ा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि भी धूमिल हुई थी। इन घटनाओं के बाद ही भाजपा को नुपुर शर्मा को पार्टी से बाहर करना पड़ा था।

धार्मिक भावनाओं पर चोट का आरोप

फिल्म में पैग़म्बर मोहम्मद साहब और उनकी पवित्र पत्नियों के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गई हैं, जिसका जिक्र याचिका में प्रमुख रूप से किया गया है। जमीयत का कहना है कि इस तरह की बातें देश की शांति और कानून-व्यवस्था को खतरे में डाल सकती हैं।

देवबंद और उलेमा को निशाना बनाना

याचिका में यह भी आरोप है कि फिल्म में देवबंद को कट्टरता और उग्रवाद का केंद्र दिखाया गया है, और वहां के उलेमा (धार्मिक विद्वानों) के खिलाफ घृणास्पद और उकसाऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया है। यह एक खास धार्मिक समुदाय की छवि को बदनाम करने की कोशिश है, जिससे नफरत फैल सकती है और सामाजिक सौहार्द्र को गंभीर क्षति हो सकती है।

संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

फिल्म में ज्ञानवापी मस्जिद जैसे अति संवेदनशील और न्यायालय में लंबित मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है। याचिका में कहा गया है कि ऐसे मामलों को इस तरह फिल्म में दिखाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 में दिए गए नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है,

अनुच्छेद 15 धर्म, जाति आदि के आधार पर भेदभाव को रोकता है, और

अनुच्छेद 21 जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार सुनिश्चित करता है।

फिल्म का संभावित असर

जमीयत ने कोर्ट से गुज़ारिश की है कि फिल्म को रिलीज़ से रोका जाए क्योंकि यह लोगों के बीच धार्मिक द्वेष और अविश्वास को जन्म दे सकती है। इससे न केवल देश की आंतरिक शांति खतरे में पड़ सकती है, बल्कि सामाजिक समरसता और एकता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

अगर अदालतें इस याचिका पर सहमति जताती हैं, तो यह मामला फिल्मों में धार्मिक संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की आज़ादी की सीमा पर एक बड़ी कानूनी मिसाल बन सकता है।

The controversy around the film “Udaipur Files” has intensified as Jamiat Ulama-i-Hind approaches the High Courts of Delhi, Maharashtra, and Gujarat to halt its release. The petition cites the film’s controversial trailer that includes Nupur Sharma’s inflammatory statement, portrays Devband as a hub of extremism, and allegedly defames Prophet Muhammad and his wives—raising concerns over religious defamation, threats to communal harmony, and violation of fundamental rights guaranteed under Articles 14, 15, and 21 of the Indian Constitution. The movie also touches on the sensitive Gyanvapi Mosque case, which is currently sub judice in Indian courts.

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