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कर्नाटक सरकार को झटका: हाईकोर्ट ने RSS की गतिविधियों पर लगी रोक पर लगाई अंतरिम रोक!

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AIN NEWS 1: कर्नाटक सरकार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने के अपने फैसले में बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार के इस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने साफ कहा कि सरकार किसी संगठन की सभा या कार्यक्रम को केवल इस आधार पर अपराध नहीं ठहरा सकती कि उसके लिए पहले अनुमति नहीं ली गई थी।

क्या था मामला?

हाल ही में कर्नाटक सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत कुछ जिलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों की सार्वजनिक सभाओं और शाखाओं पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे। सरकार का कहना था कि ये सभाएं “कानून-व्यवस्था” के लिए खतरा बन सकती हैं, इसलिए इन्हें रोका जाना जरूरी है।

इस आदेश के खिलाफ आरएसएस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि संविधान सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति, संगठन और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार देता है, और सरकार का यह कदम मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

अदालत का रुख

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार का आदेश पहली नजर में कानूनी अधिकारों का हनन प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी संगठन, जब तक वह हिंसा या कानून-व्यवस्था में बाधा नहीं डालता, तब तक उसकी गतिविधियों को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने कहा —

“किसी सभा या कार्यक्रम के लिए अनुमति लेना एक प्रशासनिक औपचारिकता है, लेकिन बिना अनुमति के सभा करना अपराध नहीं कहा जा सकता। सरकार का आदेश इस सिद्धांत के विपरीत है।”

सरकार का पक्ष

कर्नाटक सरकार ने अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा कि राज्य में कुछ स्थानों पर आरएसएस की गतिविधियों को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इसलिए प्रशासन ने एहतियातन ये कदम उठाया। सरकार ने दावा किया कि यह सार्वजनिक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक था।

हालांकि अदालत ने सरकार के इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि “सामान्य और अस्पष्ट कारणों के आधार पर किसी संगठन की गतिविधियों पर रोक लगाना संविधान सम्मत नहीं है।”

आरएसएस का तर्क

आरएसएस की ओर से अदालत में पेश अधिवक्ताओं ने कहा कि संघ का काम सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा है। उनकी शाखाओं में किसी प्रकार की हिंसक या भड़काऊ गतिविधि नहीं होती। इसलिए सरकार का यह कदम राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।

अदालत का आदेश

हाईकोर्ट ने फिलहाल राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक इस आदेश को लागू नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि उसने यह प्रतिबंध किन विशेष परिस्थितियों में लगाया और क्या कोई ठोस सबूत था कि आरएसएस की सभाओं से हिंसा फैल सकती थी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस फैसले के बाद कर्नाटक की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने राजनीतिक भेदभाव के चलते यह आदेश जारी किया था।

भाजपा ने कहा कि “हाईकोर्ट का फैसला संविधान की जीत है। आरएसएस समाज और राष्ट्र की सेवा करने वाला संगठन है, उस पर रोक लगाना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”

वहीं, कांग्रेस सरकार के कुछ मंत्रियों ने कहा कि अदालत के आदेश का सम्मान किया जाएगा, लेकिन सरकार अपने कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।

विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला नागरिक स्वतंत्रता और संघ की स्वतंत्रता से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनेगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार कहा है कि “किसी संगठन पर प्रतिबंध तभी लगाया जा सकता है जब उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य हों।”

इसलिए यह मामला भविष्य में राज्य सरकारों के लिए एक दिशा तय कर सकता है कि वे कानून-व्यवस्था के नाम पर मनमाने प्रतिबंध न लगाएं।

आगे क्या?

अदालत में अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने वाली है, जिसमें राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। कोर्ट यह तय करेगी कि क्या सरकार का आदेश केवल प्रशासनिक निर्णय था या किसी विशेष संगठन को निशाना बनाने की मंशा से लिया गया कदम।

फिलहाल इस अंतरिम राहत के बाद आरएसएस अपने नियमित कार्यक्रमों और शाखाओं को फिर से शुरू कर सकेगा।

The Karnataka High Court has issued an interim stay on the state government’s order banning RSS activities across several districts. The court emphasized that organizing a meeting without prior permission cannot be treated as a crime, reaffirming constitutional rights to freedom of assembly and association. This decision marks a major setback for the Karnataka government and a significant victory for the RSS, highlighting the importance of protecting democratic and constitutional freedoms in India.

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