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गढ़ गंगा मेला: दो नवंबर से हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक, प्रशासन ने जारी किया ट्रैफिक प्लान!

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AIN NEWS 1 गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़): हर साल लगने वाला प्रसिद्ध गढ़ गंगा मेला इस बार दो नवंबर से शुरू होने जा रहा है। मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने ट्रैफिक को लेकर बड़ी तैयारी की है। इसी के तहत दो नवंबर से दिल्ली–लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-9) पर भारी वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी जाएगी।

भीड़ और सुरक्षा के मद्देनजर सख्त इंतज़ाम

गढ़ गंगा मेले में हर वर्ष लाखों की भीड़ उमड़ती है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। इसी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने संयुक्त रूप से ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया है ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो और भारी वाहनों से सड़क पर जाम की स्थिति न बने।

दो नवंबर से लागू होगा ट्रैफिक डायवर्जन प्लान

हापुड़ पुलिस ने जानकारी दी कि 2 नवंबर से 19 नवंबर तक भारी वाहनों का प्रवेश गढ़मुक्तेश्वर की ओर प्रतिबंधित रहेगा। इस अवधि में दिल्ली से मुरादाबाद या लखनऊ की ओर जाने वाले ट्रक, ट्रेलर और अन्य भारी वाहन बाईपास मार्ग से डायवर्ट किए जाएंगे।

दिल्ली की ओर से आने वाले वाहन हापुड़ बाईपास से मुरादाबाद मार्ग की बजाय मेरठ या बुलंदशहर मार्ग से गुजारे जाएंगे। इसी तरह, मुरादाबाद या गढ़मुक्तेश्वर से आने वाले भारी वाहन भी गढ़ पुल पार कर आगे नहीं जा सकेंगे।

श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए वैकल्पिक मार्ग

प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग स्थल और वैकल्पिक मार्गों की भी व्यवस्था की है।

दिल्ली से आने वाले श्रद्धालु हापुड़ बाईपास से गढ़मुक्तेश्वर की ओर जाएंगे।

मुरादाबाद से आने वाले श्रद्धालु गंगा पुल से पहले बने अस्थायी पार्किंग स्थलों में अपने वाहन खड़े कर सकते हैं।

छोटे वाहनों को शहर के अंदर जाने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन इसके लिए विशेष पार्किंग क्षेत्र तय किए गए हैं।

DM और SP ने किया स्थलीय निरीक्षण

हापुड़ के जिलाधिकारी अभिषेक पांडे और पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने मेले की तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने मेले के रूट, स्नान घाट, पार्किंग स्थलों और मेडिकल कैंपों का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि इस बार मेले में सुरक्षा को लेकर ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जाएगी।

सुरक्षा और सुविधा दोनों पर बराबर ध्यान

DM अभिषेक पांडे ने कहा कि गढ़ गंगा मेला इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है। यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात पर प्रशासन का विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने बताया कि मेले में एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस बल की टीमें 24 घंटे तैनात रहेंगी।

साथ ही, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती भी बढ़ाई गई है। बच्चों के खो जाने पर तत्काल सहायता के लिए चाइल्ड हेल्प डेस्क भी स्थापित की जा रही है।

हाईवे से भारी वाहनों की रोक क्यों जरूरी

पिछले वर्षों में देखा गया है कि गढ़ गंगा मेले के दौरान भारी वाहनों की वजह से लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता था। इससे श्रद्धालुओं और आम यात्रियों दोनों को परेशानी होती थी। प्रशासन ने इस बार पहले से ही रोक लगाकर इस समस्या से निपटने की कोशिश की है।

NH-9 पर भारी वाहनों की एंट्री बंद होने से हल्के वाहनों और श्रद्धालुओं के बसों को आसानी से आने-जाने का मौका मिलेगा। प्रशासन का कहना है कि ये रोक अस्थायी है और मेले के समाप्त होते ही हटाई जाएगी।

मेले की विशेषताएं और धार्मिक महत्व

गढ़मुक्तेश्वर का यह मेला कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान से लाखों श्रद्धालु गढ़ पहुंचते हैं।

इस दौरान संत-महात्माओं के प्रवचन, भजन-कीर्तन, पशु मेला और स्थानीय व्यापार भी मेले की शोभा बढ़ाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।

व्यापारियों और स्थानीय लोगों की भूमिका

गढ़ गंगा मेले में स्थानीय व्यापारियों की भी बड़ी भूमिका रहती है। मेले में अस्थायी दुकानों और खाने-पीने के स्टॉल्स की भरमार होती है। व्यापारियों के अनुसार, इस मेले से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलता है।

पुलिस प्रशासन ने स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों से सहयोग की अपील की है ताकि मेला शांति और सुव्यवस्था के साथ संपन्न हो सके।

अंतिम रूप से तैयार है गढ़ गंगा मेला प्लान

सभी तैयारियों के बाद प्रशासन ने दावा किया है कि इस बार गढ़ गंगा मेला “मिनी कुंभ” के रूप में आयोजित होगा। साफ-सफाई, ट्रैफिक, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया गया है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और प्रशासन के निर्देशों का सहयोग करें ताकि मेला सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

गढ़ गंगा मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तर भारत की लोक संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। प्रशासन के सख्त कदमों से इस बार न सिर्फ श्रद्धालु सुरक्षित रहेंगे, बल्कि ट्रैफिक और व्यवस्थाएं भी पहले से बेहतर दिखेंगी।

Garh Ganga Mela 2025 in Garhmukteshwar, Hapur district, is expected to attract lakhs of devotees for the holy Ganga bath. To manage the huge crowd and prevent congestion, authorities have announced a traffic diversion plan banning heavy vehicles on NH-9 from November 2 to 19. This Garh Ganga Mela, also called the Mini Kumbh of western Uttar Pradesh, will feature strict security, drone surveillance, and dedicated routes for pilgrims. The administration’s proactive steps aim to ensure a safe, smooth, and spiritual experience for all visitors.

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