AIN NEWS 1: गाजियाबाद में भ्रष्टाचार के खिलाफ पुलिस कमिश्नर की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विवेचना सेल में तैनात इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु को 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी क्राइम ब्रांच के परिसर में ही की गई, जहां पुलिस की स्पेशल टीम पहले से ही ट्रैप बिछाकर बैठी हुई थी। यह पूरी कार्रवाई बेहद योजनाबद्ध तरीके से की गई और अधिकारियों के मुताबिक, रिश्वत लेने के आरोपों पर पहले से ही नजर रखी जा रही थी।
कैसे हुआ पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, इंस्पेक्टर सिंधु पर कफ सिरप से जुड़े एक बड़े मामले में अवैध वसूली का आरोप लग रहा था। यह मामला करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये के कफ सिरप की बरामदगी से संबंधित है। आरोप है कि जांच के दौरान आरोपी पक्ष से इंस्पेक्टर ने पैसे की मांग की थी। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस कमिश्नर की टीम ने इसकी गोपनीय रूप से जांच की और फिर ट्रैप लगाने का फैसला किया।
जिस व्यक्ति से रिश्वत ली जा रही थी, उसे पुलिस ने अपने साथ मिलाया और योजना के तहत पैसे देने के लिए क्राइम ब्रांच के दफ्तर बुलाया। जैसे ही इंस्पेक्टर ने रिश्वत की रकम हाथ में ली, पुलिस की टीम अंदर घुस गई और उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया।
क्राइम ब्रांच के दफ्तर में ही हुई गिरफ्तारी
गिरफ्तारी का स्थान भी काफी हैरान करने वाला रहा। आमतौर पर ऐसे मामले किसी एकांत जगह पर होते हैं, लेकिन यह गिरफ्तारी क्राइम ब्रांच के ऑफिस में ही की गई। इससे यह साफ होता है कि टीम को इंस्पेक्टर सिंधु के खिलाफ भरोसेमंद जानकारी मिल चुकी थी और किसी भी तरह की ढिलाई बरतने की गुंजाइश नहीं थी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान पूरे सबूत इकट्ठे किए गए —
रिश्वत के नोटों की सीरियल नंबर पहले से मिलाए गए
पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग भी की गई
आरोपी के हाथों पर रसायन लगाकर सबूत पुख्ते किए गए
कफ सिरप केस क्या है?
यह मामला कथित रूप से दवाइयों की अवैध बिक्री और सप्लाई से जुड़ा है। जांच एजेंसियों ने हाल ही में लगभग ₹3.5 करोड़ कीमत का कफ सिरप बरामद किया था, जिसे नशे के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी मामले की जांच इंस्पेक्टर सिंधु को सौंपी गई थी।
आरोप है कि जांच को प्रभावित करने और आरोपियों को राहत देने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी। यह घटना न सिर्फ पुलिस की छवि पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार कितना गहरे तक पहुंच चुका है।
पुलिस कमिश्नर की टीम की सख्त कार्रवाई
पुलिस कमिश्नर ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया था। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उन्होंने ट्रैप सेल को निर्देश दिया कि आरोपों की जांच की जाए। जब रिश्वत मांगने के पुख्ता सबूत मिले, तब तुरंत कार्रवाई कर इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद
इंस्पेक्टर को हिरासत में लिया गया
उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ
विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है
अधिकारियों का कहना है कि पुलिस विभाग में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लोगों की प्रतिक्रिया
घटना सामने आने के बाद आम जनता में भी हैरानी और नाराजगी है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब कानून की रक्षा करने वाले ही भ्रष्टाचार में शामिल हो जाएं, तो आम लोगों को न्याय कैसे मिलेगा? कुछ लोगों ने पुलिस कमिश्नर की कार्रवाई की सराहना की और इसे “बड़ा सुधारात्मक कदम” बताया।
पुलिस विभाग के लिए बड़ा संदेश
यह घटना गाजियाबाद पुलिस के लिए एक बड़ा सबक है। वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया है कि विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी कर्मचारी या अधिकारी गलत कामों में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले की विस्तृत जांच होगी।
रिश्वत का पैसा कहां जाता था?
क्या इस मामले में किसी और की भूमिका है?
कफ सिरप घोटाले में और कौन शामिल है?
इन सभी सवालों पर पुलिस टीम काम कर रही है। जल्द ही इस पूरे घोटाले का बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है।
In a major crackdown on corruption, an inspector from Ghaziabad’s investigation cell was arrested for accepting a ₹4 lakh bribe linked to a ₹3.5 crore cough syrup scam. The Police Commissioner’s team set up a successful trap and caught the officer red-handed inside the crime branch office. This arrest highlights serious concerns about corruption in police investigations and brings renewed focus to the ongoing Ghaziabad bribe case, cough syrup scam, and illegal drug trade probe.



















