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कैम्पस में कट्टरपंथ का जाल: बीडीएस छात्र हारिश अली पर ISIS कनेक्शन का बड़ा खुलासा!

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कैम्पस में कट्टरपंथ का जाल: बीडीएस छात्र हारिश अली पर ISIS कनेक्शन का बड़ा खुलासा

AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से सामने आया एक मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। यहां से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आतंकी हारिश अली के बारे में जो खुलासे हुए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि किस तरह अब कट्टरपंथी विचारधारा शिक्षण संस्थानों तक अपनी पहुंच बना रही है।

कौन है हारिश अली?

हारिश अली एक बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) का छात्र बताया जा रहा है। पहली नजर में वह एक सामान्य छात्र की तरह ही जीवन जी रहा था, लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार, उसकी गतिविधियां काफी संदिग्ध थीं। वह पढ़ाई की आड़ में एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ था, जो कथित तौर पर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का काम कर रहा था।

एटीएस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को हारिश अली की गतिविधियों के बारे में कुछ समय से इनपुट मिल रहे थे। जांच के बाद जब उसकी निगरानी बढ़ाई गई, तो कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। इसके बाद एटीएस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद जब उसके लैपटॉप और डिजिटल उपकरणों की जांच की गई, तो उसमें कई ऐसे दस्तावेज, चैट्स और सामग्री मिली, जो किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा कर रही थीं।

लैपटॉप से मिले अहम सुराग

हारिश अली के लैपटॉप से जो जानकारी सामने आई है, वह बेहद गंभीर है। जांच में पता चला कि वह ‘अल इत्तिहाद मीडिया फाउंडेशन’ नाम के एक प्लेटफॉर्म से जुड़ा हुआ था। इस प्लेटफॉर्म के जरिए कथित तौर पर कट्टरपंथी सामग्री साझा की जाती थी।

डिजिटल सबूतों से यह भी संकेत मिला है कि वह युवाओं को प्रभावित करने के लिए विशेष रणनीति का इस्तेमाल कर रहा था। सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और निजी ग्रुप्स के जरिए वह संपर्क बनाए रखता था।

‘डॉक्टर मॉड्यूल’ का खुलासा

जांच एजेंसियों के अनुसार, हारिश अली एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा था, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ कहा जा रहा है। इस मॉड्यूल का उद्देश्य शिक्षित और पेशेवर छात्रों को अपने प्रभाव में लेना था।

यह मॉड्यूल खासतौर पर मेडिकल और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े छात्रों को टारगेट करता था। ऐसा इसलिए क्योंकि ये छात्र समाज में प्रभावशाली भूमिका निभा सकते हैं और इनके जरिए नेटवर्क को मजबूत किया जा सकता है।

12 जिलों तक फैला नेटवर्क

एटीएस की जांच में यह भी सामने आया है कि हारिश अली का नेटवर्क सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं था। वह उत्तर प्रदेश के करीब 12 जिलों में युवाओं के संपर्क में था।

इन जिलों में अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्र शामिल थे, जिनमें कई उच्च शिक्षित युवा भी बताए जा रहे हैं। यह बात और भी चिंता बढ़ाती है कि कट्टरपंथ अब सिर्फ सीमित वर्ग तक नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे युवाओं तक भी पहुंच रहा है।

कैम्पस में फैल रहा कट्टरपंथ

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे शिक्षण संस्थान अब सुरक्षित हैं? जिस जगह को ज्ञान और विकास का केंद्र माना जाता है, वहीं अगर इस तरह की गतिविधियां पनपने लगें, तो यह समाज के लिए खतरे की घंटी है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि हारिश अली जैसे लोग छात्रों के बीच भरोसा बनाकर धीरे-धीरे उन्हें अपने विचारों से प्रभावित करते हैं। शुरुआत में सामान्य बातचीत से शुरू होकर यह प्रक्रिया धीरे-धीरे कट्टरपंथी सोच तक पहुंच जाती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल

आज के दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया की पहुंच बहुत व्यापक हो चुकी है। यही वजह है कि ऐसे नेटवर्क अब डिजिटल माध्यमों का सहारा ले रहे हैं।

हारिश अली के मामले में भी यही देखा गया कि वह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं से जुड़ता था। एन्क्रिप्टेड चैट्स और निजी ग्रुप्स के जरिए वह अपनी गतिविधियों को छिपाने की कोशिश करता था।

परिवार और आसपास के लोग अनजान

सबसे हैरानी की बात यह है कि हारिश अली के परिवार और आसपास के लोगों को उसकी इन गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वह सामान्य जीवन जीते हुए अपनी असली पहचान छुपाए हुए था।

यह पहलू इस बात को और गंभीर बना देता है कि ऐसे लोग समाज में आसानी से घुलमिल जाते हैं और उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

जांच अभी जारी

फिलहाल एटीएस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसका दायरा कितना बड़ा है।

इसके साथ ही, जिन युवाओं से हारिश अली का संपर्क था, उनकी भी जांच की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं कोई और इस जाल में फंसा तो नहीं है।

क्या कहता है यह मामला?

यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कैसे एक पढ़ा-लिखा छात्र इस रास्ते पर चला गया? क्या समाज, परिवार और शिक्षण संस्थान इस तरह की गतिविधियों को पहचानने में असफल हो रहे हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है। छात्रों के व्यवहार में अचानक बदलाव, अलगाव या संदिग्ध गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मुरादाबाद का यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है। यह दिखाता है कि किस तरह कट्टरपंथी नेटवर्क अब नई रणनीतियों के साथ समाज के अंदर घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में जरूरी है कि सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ समाज भी सतर्क रहे और समय रहते ऐसे खतरों को पहचानकर उन्हें रोकने में सहयोग करे।

The Moradabad ISIS suspect Harish Ali case has raised serious concerns about radicalization in educational institutions. A BDS student allegedly used digital platforms and a covert network linked to Al Ittihad Media Foundation to influence and recruit educated youth across Uttar Pradesh. The UP ATS investigation highlights how terror modules are evolving and targeting campuses, making this case a crucial example of modern-day extremist strategies in India.

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