AIN NEWS 1: केंद्र सरकार देश में गुटखा और पान मसाला उद्योग पर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए अब कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रही है। शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार ‘हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025’ संसद में पेश करने जा रही है। यह बिल न सिर्फ स्वास्थ्य के मामले में इन उत्पादों से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है, बल्कि इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू भी महत्वपूर्ण हैं।

गुटखा उद्योग पर बढ़ती सख्ती क्यों ज़रूरी?
भारत में तंबाकू से जुड़े उत्पादों की खपत बहुत ज्यादा है। खासकर गुटखा और पान मसाला का इस्तेमाल युवा और गरीब तबके में लगातार बढ़ रहा है। इससे कैंसर, दिल की बीमारी, मुंह के रोग और कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, तंबाकू से जुड़े रोगों पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।
इसी के साथ, सरकार के पास ऐसे इनपुट्स भी आए हैं कि गुटखा और पान मसाला उद्योग के कुछ हिस्सों में काले पैसे और अवैध वित्तीय गतिविधियों का इस्तेमाल होता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। इसीलिए सरकार इन दोनों चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत और पारदर्शी प्रणाली लाना चाहती है।
क्या है ‘हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025’?
यह बिल गुटखा और पान मसाला बनाने वाली कंपनियों पर एक विशेष सेस लागू करेगा। यह सेस उत्पाद की कीमत पर नहीं बल्कि उत्पादन क्षमता (Production Capacity) के आधार पर तय किया जाएगा। यानी फैक्ट्री कितनी क्षमता से उत्पादन कर सकती है, उसी के आधार पर अतिरिक्त टैक्स वसूला जाएगा।
इससे सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और उस पैसे का इस्तेमाल स्वास्थ्य योजनाओं, नशा-निरोधक कार्यक्रमों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खर्चों में किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि उत्पादन क्षमता आधारित सेस लगाने से उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी। अभी तक कई कंपनियां उत्पादन छिपाकर टैक्स बचाने की कोशिश करती थीं, जिससे सरकार को बड़ा नुकसान होता था।
उल्लंघन करने वालों पर सख्त सज़ा
सरकार ने बिल में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यदि कोई कंपनी सेस नियमों का पालन नहीं करती है, या उत्पादन क्षमता के बारे में गलत जानकारी देती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
इसमें 5 साल तक की जेल तक का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा भारी जुर्माना लगाने का भी अधिकार सरकार को दिया जाएगा। इससे उद्योग में नियमों का पालन करवाना आसान होगा और फर्जीवाड़ा करने वाली कंपनियां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएंगी।
कैसे बदलेगा गुटखा–पान मसाला उद्योग का संचालन?
इस बिल के लागू होने के बाद कंपनियों को अपनी फैक्ट्रियों की वास्तविक क्षमता सरकार को बतानी होगी। सरकार समय-समय पर निरीक्षण कर सकती है। इस व्यवस्था से दो बड़े फायदे होंगे:
1. टैक्स चोरी रोकी जा सकेगी
2. बाजार में अवैध और नकली उत्पाद कम होंगे
साथ ही सरकार द्वारा एक ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित किया जा सकता है, जिसमें उत्पाद की पैकेजिंग से लेकर फैक्ट्री स्तर पर हर गतिविधि डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होगी। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि उपभोक्ता तक सुरक्षित और प्रमाणित उत्पाद पहुंचेंगे।
स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम
देश के अस्पतालों में कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, जिनमें से अधिकतर मामलों में गुटखा और पान मसाला जैसे तंबाकू उत्पाद जिम्मेदार होते हैं।
गुटखा खाने से मुंह का कैंसर बहुत तेजी से बढ़ता है। यह बीमारी भारत में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली कैंसर श्रेणी में आती है। डॉक्टरों का कहना है कि 10 में से 7 मरीजों में तंबाकू इसका मुख्य कारण होता है।
सरकार को उम्मीद है कि सेस लगाने और उद्योग पर निगरानी सख्त होने से इन उत्पादों की उपलब्धता और गलत प्रचार पर भी रोक लगेगी। इससे आने वाले समय में तंबाकू से होने वाली बीमारियों की संख्या कम हो सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से क्या संबंध?
सरकार का कहना है कि कुछ मामलों में गुटखा और पान मसाला उद्योग में अवैध रूप से जमा की गई रकम का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों में किया जाता है। इसके अलावा, नकली उत्पादों के ज़रिए भी बाजार में अवैध पैसा घूमता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को चिंता रहती है।
सेस के पैसों का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों और सुरक्षा एजेंसियों की क्षमताओं को बढ़ाने में किया जाएगा।
नए बिल से सरकार को क्या लाभ?
हजारों करोड़ का राजस्व
उत्पादन क्षमता आधारित सेस सरकार को हर साल बड़ी राशि दिला सकता है।
स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी
कैंसर और तंबाकूजनित रोगों के इलाज और रोकथाम पर सीधा निवेश किया जा सकेगा।
उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी
फर्जी कंपनियां बंद होंगी, असली कंपनियों को ईमानदारी से काम करने का मौका मिलेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूती
अवैध धन शोधन पर कड़ी रोक लग सकेगी।
जनता पर क्या असर पड़ेगा?
बिल के लागू होने के बाद गुटखा और पान मसाला की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इससे उसकी खपत कुछ हद तक कम होगी, जो स्वास्थ्य के नजरिए से सही माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी किसी हानिकारक उत्पाद पर टैक्स बढ़ाया जाता है, उसका उपभोग स्वाभाविक रूप से कम होता है।
The Indian government is preparing to introduce the Health and National Security Cess Bill 2025, aiming to regulate the gutkha and pan masala industry with stricter rules and a production-based cess. This measure is designed to boost public health, reduce tax evasion, curb illegal manufacturing, and strengthen national security by increasing transparency in the sector. The bill also proposes penalties, including imprisonment, for companies violating the norms. With rising health concerns linked to tobacco products, the new cess is expected to generate significant revenue for healthcare and security initiatives.







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