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देश का पहला गांव जहां मोबाइल ऐप से खरीदा जा रहा घर-घर का कचरा, बिहार के इस मॉडल ने बदली सोच!

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AIN NEWS 1: देश में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर अक्सर शहरों के मॉडल की चर्चा होती है, लेकिन बिहार के सीवान जिले के एक छोटे से गांव ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण भारत भी तकनीक और नवाचार के दम पर बड़ा बदलाव ला सकता है। सीवान की लखवा ग्राम पंचायत आज पूरे देश में इसलिए चर्चा में है क्योंकि यह भारत का पहला ऐसा गांव बन गया है, जहां घरों से निकलने वाले कचरे को मोबाइल ऐप के जरिए खरीदा जा रहा है।

यह अनोखी पहल लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत शुरू की गई है, जिसने कचरे को बोझ नहीं बल्कि कमाई का जरिया और स्वच्छता का माध्यम बना दिया है।

कचरा अब समस्या नहीं, संसाधन बन गया

अक्सर गांवों में कचरा या तो खुले में फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों को नुकसान होता है। लेकिन लखवा गांव में इस सोच को पूरी तरह बदल दिया गया है। यहां लोगों को यह समझाया गया कि कचरा बेकार नहीं, बल्कि एक संसाधन है, जिसे सही तरीके से अलग कर बेचा जा सकता है।

गांव के हर घर से निकलने वाला सूखा कचरा – जैसे प्लास्टिक, कागज, लोहा, बोतलें और अन्य कबाड़ – अब मोबाइल ऐप के माध्यम से खरीदा जा रहा है।

‘कबाड़ मंडी’ मोबाइल ऐप बना बदलाव की रीढ़

इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ है ‘कबाड़ मंडी’ मोबाइल ऐप। यह ऐप ग्रामीणों और कचरा खरीदने वालों के बीच एक सीधा डिजिटल पुल बनाता है। गांव का कोई भी व्यक्ति ऐप के जरिए यह जानकारी दे सकता है कि उसके पास किस तरह का कचरा है। इसके बाद ऐप से जुड़े कलेक्टर तय समय पर घर पहुंचते हैं और कचरे के बदले भुगतान करते हैं।

इस प्रक्रिया में न तो दलाल हैं और न ही किसी तरह की झंझट। पूरी व्यवस्था पारदर्शी और सरल है, जिससे ग्रामीणों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

गांव वालों की आय में भी हो रहा इजाफा

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि गांव के लोगों को अतिरिक्त आय मिलने लगी है। जो कचरा पहले बेकार समझकर फेंक दिया जाता था, वही अब कुछ पैसे कमा रहा है। भले ही यह रकम छोटी हो, लेकिन इससे लोगों में यह भावना मजबूत हुई है कि स्वच्छता सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि फायदे का सौदा भी हो सकती है।

कई महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह पहल खास तौर पर मददगार साबित हो रही है, क्योंकि उन्हें बिना कहीं जाए घर बैठे कचरे के बदले पैसे मिल रहे हैं।

स्वच्छता के साथ बदली गांव की तस्वीर

इस मॉडल के लागू होने के बाद लखवा गांव की साफ-सफाई में बड़ा सुधार देखा गया है। गलियों में फैला कचरा लगभग खत्म हो चुका है। नालियां साफ रहने लगी हैं और बदबू व मच्छरों की समस्या भी काफी हद तक कम हुई है।

गांव में अब लोग खुद ही अपने घर का कचरा सूखा और गीला अलग करने लगे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में स्वच्छता को लेकर जागरूकता साफ दिखाई देती है।

प्रशासन और पंचायत की अहम भूमिका

इस पूरी पहल के पीछे ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भूमिका रही है। पंचायत स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान चलाए गए, लोगों को ऐप के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई और यह भरोसा दिलाया गया कि उनका कचरा सही दाम पर खरीदा जाएगा।

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लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत यह प्रयोग पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था, लेकिन इसकी सफलता ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

अन्य गांवों के लिए बना मिसाल

लखवा ग्राम पंचायत का यह मॉडल अब अन्य गांवों के लिए एक उदाहरण बन चुका है। बिहार ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे राज्यों से भी पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी इस मॉडल को देखने और समझने पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की व्यवस्था को बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है।

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तकनीक और ग्रामीण भारत का सफल मेल

लखवा गांव की यह पहल यह भी साबित करती है कि तकनीक सिर्फ शहरों के लिए नहीं है। सही दिशा और सही सोच के साथ अगर तकनीक को गांवों तक पहुंचाया जाए, तो वह सामाजिक और आर्थिक बदलाव का मजबूत जरिया बन सकती है।

यह मॉडल डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत मिशन – दोनों की भावना को जमीन पर उतारता नजर आता है।

भविष्य की योजनाएं

पंचायत की योजना है कि आने वाले समय में गीले कचरे के प्रबंधन पर भी काम किया जाए। इसके लिए कंपोस्टिंग यूनिट लगाने और जैविक खाद तैयार करने की तैयारी चल रही है। इससे न सिर्फ गांव की खेती को फायदा होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

Lakhwa village in Siwan district of Bihar has emerged as India’s first village where household waste is purchased through a mobile app. Under the Lohiya Swachh Bihar Abhiyan, this innovative waste management model uses the Kabadi Mandi app to connect villagers with waste collectors, turning garbage into income and promoting rural cleanliness. This initiative is being seen as a sustainable rural innovation and a scalable model for waste management across India.

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