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नोएडा: जेल से बाहर आया कुख्यात गैंगस्टर सुंदर भाटी, पुलिस की बढ़ी चिंता, जनता में भी उठे सवाल!

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AIN NEWS 1 नोएडा: कुख्यात गैंगस्टर सुंदर भाटी आखिरकार सोनभद्र जेल से रिहा हो गया है। जैसे ही वह जेल की दीवारों के बाहर आया, हवा में एक बार फिर पुराने अपराधों की याद और नए खतरे की आहट महसूस की जाने लगी। भाटी की रिहाई ने न केवल पुलिस महकमे की नींद उड़ाई है, बल्कि आम जनता के मन में भी कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।

चाचा-भतीजे की रिहाई से पुलिस में हलचल

सुंदर भाटी के साथ उसका भतीजा अनिल भाटी भी जेल से बाहर आया है। दोनों पर 60 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें हत्या, रंगदारी, अपहरण और अवैध वसूली जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।

इन दोनों की एक साथ जमानत पर रिहाई को लेकर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चर्चा तेज है। सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े अपराध रिकॉर्ड के बावजूद ये दोनों जेल से कैसे बाहर आ गए?

जानकारों का कहना है कि यह कमजोर पैरवी और गैंगस्टर की चालाकी का परिणाम हो सकता है। कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि एक प्रभावशाली नेता का सहयोग उन्हें मिला, जिससे कानूनी प्रक्रिया उनके पक्ष में झुकी।

हालांकि रिहाई का आधार पारिवारिक शादी बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पैरोल का विकल्प अधिक उचित रहता, ताकि निगरानी बनी रहती और गैंगस्टर का दुरुपयोग न होता।

पूर्व डीजीपी की चेतावनी: पुलिस को करनी चाहिए अपील

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. विक्रम सिंह ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “जमानत मिलना या पैरोल दिया जाना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन ऐसे कुख्यात अपराधियों को जेल से बाहर आने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”

डॉ. सिंह ने सुझाव दिया कि जब किसी बड़े अपराधी को जमानत मिल भी जाती है, तो पुलिस को तुरंत उच्च न्यायालय में अपील करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी अपीलों के लिए अनुभवी और सक्षम वकीलों की नियुक्ति जरूरी है, ताकि अपराधी खुलेआम घूमने न लगें और कानून की पकड़ से बाहर न हो जाएं।

सीएम योगी की 65 माफियाओं की सूची में नाम

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुंदर भाटी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 65 माफियाओं की सूची में शामिल है। इस सूची में गौतमबुद्ध नगर से जुड़े कई नाम हैंसुंदर भाटी, सिंहराज भाटी, अमित कसाना, अनिल भाटी, रणदीप भाटी, मनोज आसे और अनिल दुजाना।

हालांकि 2022 में अनिल दुजाना गाजियाबाद पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है, फिर भी इस क्षेत्र में अब भी छह सक्रिय माफिया मौजूद हैं, जो पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं।

सुंदर भाटी का अपराधी सफर

सुंदर भाटी का नाम पश्चिमी यूपी में अपराध, राजनीति और सत्ता के गठजोड़ का प्रतीक माना जाता है।

65 माफियाओं की सूची में स्थान

60 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज

18 मुकदमे एनसीआर क्षेत्र में

10 साल बाद जेल से बाहर आया

वह पिछले एक दशक से जेल में था, लेकिन उसके गैंग के सदस्य जेल से बाहर रहकर अपराध की गतिविधियों को जारी रखे हुए थे।

शादियों से जुड़ा अपराध इतिहास

सुंदर भाटी का अतीत बताता है कि शादी समारोह उसके लिए कई बार अपराधों का अड्डा बन चुके हैं।

नवंबर 2011 में साहिबाबाद थाना क्षेत्र के एक मैरिज होम में उसकी भांजी की शादी के दौरान अनिल दुजाना ने एके-47 से फायरिंग कर दी थी।

वर्ष 2015 में भी एक शादी समारोह के दौरान स्क्रैप व्यापारी हरेंद्र नागर और उसके गनर की हत्या करवा दी गई थी। इन घटनाओं ने पूरे एनसीआर में दहशत फैला दी थी।

अब जब वह फिर से एक पारिवारिक शादी के बहाने बाहर आया है, तो लोगों को डर है कि कहीं इतिहास खुद को न दोहरा दे।

जनता में असुरक्षा, पुलिस की साख पर सवाल

भाटी की रिहाई के बाद से स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल है।

लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती है, तो ऐसे गैंगस्टर कैसे जेल से बाहर निकल जाते हैं?

पुलिस महकमे में भी इस बात को लेकर बेचैनी है। कई अधिकारी मानते हैं कि यह मामला कानूनी प्रक्रिया की कमजोरी का परिणाम है और अब पुलिस को यह साबित करना होगा कि वह अपराधियों के खिलाफ उतनी ही सख्त है जितनी सरकार दावा करती है।

भविष्य के लिए चुनौती

सुंदर भाटी की रिहाई सिर्फ एक गैंगस्टर के जेल से बाहर आने का मामला नहीं है, बल्कि यह न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था की परीक्षा है। अगर पुलिस ने मजबूत कानूनी तैयारी नहीं की, तो एक बार फिर नोएडा और आसपास के इलाकों में अपराध का जाल फैल सकता है।

पुलिस और न्यायालय दोनों के सामने यह बड़ी जिम्मेदारी है कि कानून का सम्मान बरकरार रहे और अपराधियों को समाज में भय फैलाने का कोई अवसर न मिले।

Notorious gangster Sundar Bhati, who was listed among UP CM Yogi Adityanath’s 65 mafia, has been released from Sonbhadra jail after nearly ten years of imprisonment. His sudden release, along with his nephew Anil Bhati, has raised serious concerns for Noida Police and the general public. With over 60 criminal cases, including murder and extortion, Bhati’s freedom has once again brought crime and law enforcement in Uttar Pradesh under scrutiny. The police are now on alert as citizens question how such dangerous gangsters are managing to secure bail so easily.

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