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पूरे प्रदेश में बॉडी वॉर्न कैमरा और जीपीएस से लैस हुईं विजिलेंस टीमें, उपभोक्ता परिषद ने फैसले को बताया ऐतिहासिक!

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AIN NEWS 1 लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। प्रदेश भर में बिजली विभाग की विजिलेंस और विभागीय जांच टीमों को अब बॉडी वॉर्न कैमरा और जीपीएस सिस्टम से लैस कर दिया गया है। इस फैसले का उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने खुलकर स्वागत किया है और इसे उपभोक्ताओं के हित में एक बड़ा सुधार बताया है।

उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यह वही मांग है, जिसे वे पिछले दो वर्षों से लगातार उठा रहे थे। लंबे इंतजार और लगातार प्रयासों के बाद अब यह व्यवस्था ज़मीनी स्तर पर लागू हो चुकी है। परिषद के अनुसार, यह कदम न केवल विजिलेंस टीमों की कार्यशैली को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ होने वाले कथित उत्पीड़न और भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगाएगा।

पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बॉडी वॉर्न कैमरे की व्यवस्था लागू होने से विजिलेंस टीमों की हर कार्रवाई रिकॉर्ड में रहेगी। इससे यह साफ हो सकेगा कि किस उपभोक्ता के साथ किस तरह की कार्रवाई की गई और वह कितनी न्यायसंगत थी।

उन्होंने कहा कि जब भी कोई विजिलेंस या रेड टीम किसी उपभोक्ता के परिसर में जाएगी, तो कैमरा चालू रहेगा और पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड होगी। इससे न केवल उपभोक्ताओं को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि ईमानदार अधिकारियों को भी अनावश्यक आरोपों से बचाया जा सकेगा।

लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें

उपभोक्ता परिषद ने यह भी बताया कि पिछले कई वर्षों से प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों में आरोप लगाया जाता रहा है कि कई जगह विजिलेंस और विभागीय रेड टीमें गरीब, कमजोर और असहाय उपभोक्ताओं को छोटे-छोटे मामलों में परेशान करती हैं, जबकि बड़े और प्रभावशाली मामलों में साठ-गांठ कर कार्रवाई से बचा लिया जाता है।

परिषद का कहना है कि इस तरह की शिकायतों से न केवल आम उपभोक्ता मानसिक रूप से प्रताड़ित होता है, बल्कि इससे सरकार और बिजली विभाग की छवि को भी नुकसान पहुंचता है। अब बॉडी वॉर्न कैमरा और जीपीएस जैसी तकनीक से इन आरोपों की सच्चाई सामने लाई जा सकेगी।

ईमानदार उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

अवधेश कुमार वर्मा ने स्पष्ट कहा कि इस नई व्यवस्था से ईमानदार उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा लाभ होगा। अब कोई भी अधिकारी या विजिलेंस टीम मनमानी नहीं कर सकेगी। यदि किसी उपभोक्ता के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि बिजली चोरी जैसे गंभीर मामलों में भी अब निष्पक्ष और सटीक कार्रवाई संभव हो सकेगी। कैमरे और जीपीएस से यह तय होगा कि टीम कहां गई, कितनी देर रुकी और क्या कार्रवाई की।

बिजली चोरी पर नियंत्रण की जरूरत

परिषद के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हर साल लगभग 5000 करोड़ रुपये की बिजली चोरी होती है। यह नुकसान अंततः ईमानदार उपभोक्ताओं और सरकार दोनों को उठाना पड़ता है। बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल छापेमारी ही नहीं, बल्कि पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था की जरूरत थी।

बॉडी वॉर्न कैमरा और जीपीएस सिस्टम इसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। इससे वास्तविक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव होगी और निर्दोष लोगों को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा।

सरकार और विभाग की छवि को होगा लाभ

उपभोक्ता परिषद का मानना है कि इस व्यवस्था से बिजली विभाग और राज्य सरकार की छवि भी बेहतर होगी। जब कार्रवाई पारदर्शी होगी और उसका रिकॉर्ड मौजूद रहेगा, तो जनता का भरोसा भी बढ़ेगा।

परिषद ने उम्मीद जताई है कि इस व्यवस्था का ईमानदारी से और बिना किसी भेदभाव के क्रियान्वयन किया जाएगा। यदि यह सिस्टम सही तरीके से लागू हुआ, तो यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

सही क्रियान्वयन पर टिकी सफलता

हालांकि परिषद ने यह भी कहा कि किसी भी व्यवस्था की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। सिर्फ कैमरे लगाना काफी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि वे हर कार्रवाई के दौरान चालू रहें और रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

परिषद ने सरकार और बिजली विभाग से अपील की है कि इस प्रणाली की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हो।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में विजिलेंस टीमों को बॉडी वॉर्न कैमरा और जीपीएस से लैस करने का फैसला बिजली विभाग में सुधार और उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और ईमानदार उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह व्यवस्था ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

The Uttar Pradesh government has equipped electricity vigilance teams with body worn cameras and GPS systems to improve transparency and accountability in power theft investigations. This reform aims to curb corruption, protect honest consumers, and ensure fair action by vigilance squads. The Uttar Pradesh Electricity Consumers Council welcomed the decision, stating that technology-based monitoring will help reduce electricity theft, prevent harassment of poor consumers, and improve the credibility of the power department across the state.

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